डॉ॰गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' की कविता - जन गण मन का हर्ष आज गणतन्त्र दिवस पर छाया

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जन गण मन का हर्ष  आज गणतन्त्र  दिवस पर छाया

भूली -बिसरी यादें हमको फिर-फिर घेर रही हैं
और हमारी त्याग तपस्या हमको फेर रही हैं
बँधुआ बच्चों, मज़दूरों को उन्मुक्त करें
भारत माँ को भ्रष्ट तंत्र से मिलकर मुक्त करें
अपने दिल के घावों को है माँ ने खोल  दिखाया.
जन गण मन का हर्ष  आज गणतन्त्र  दिवस पर छाया ।    

    पंजाब,असम,कश्मीर प्रांत सब भारत माँ के हिस्से हैं 
बाहों को कंधों से काटें ये कैसे किस्से हैं
माँ के पूतों के शोणित से धरा लाल होगी तो
श्वान, गीध भी खा न सकेंगे दुश्मन की बोटी को
सवा लाख से एक लड़ा  है वीरभूमि का जाया .
जन गण मन का हर्ष  आज गणतन्त्र  दिवस पर छाया । 

    बैरी को भी मीत मान लेते हैं मन से
मित्र कहीं गर शत्रु बन गये, त्यागेंगे तन-मन से
अर्जुन,त्रिशूल, पृथ्वी का जिसको भान नहीं हैं
मिट जायेंगे  धरती से यह अनुमान नहीं है
जो भी आगे बढ़ा समझ लो अपना नाम मिटाया। 
जन गण मन का हर्ष  आज गणतन्त्र दिवस पर छाया।

-डॉ॰गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर'

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1 टिप्पणी "डॉ॰गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' की कविता - जन गण मन का हर्ष आज गणतन्त्र दिवस पर छाया"

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