रविवार, 13 जनवरी 2013

यशवन्‍त कोठारी का व्यंग्य - जनहित में...

जनहित में ․․․

यशवन्‍त कोठारी

सरकार को जनहित की बड़ी चिन्‍ता है सरकार का हर फैसला जनहित में होता है। सरकार हर विज्ञापन जनहित में देती है। मंत्री हर वक्‍तव्‍य जन हित में देता है यदि वक्‍तव्‍य में कमी हो तो जिम्‍मेदारी सरकार की नहीं। एक कबीना मंत्री ने कह दिया जो भाषण में लिखा था वो बोला। जनहित में गलत बोल दिया जिम्‍मेदारी भाषण लेखक की है। सरकार अचानक तेजी से काम करने लग गई है। जनहित में सरकार चार साल सोती रही, अब जनहित में पांचवे साल तेजी से काम कर रही है। कभी काम नहीं करने वाली सरकार को अचानक चिन्‍ता हुई। ये कुर्सी चली गई तो क्‍या होगा। सरकार तुरन्‍त दौड़ने लगी। जनहित में फैसले करने लगी। जनहित में एफ․डी․ आई․ जनहित में बीमा, बैकिंग, जनहित में वालमार्ट।

जनहित में साहित्‍य, संस्‍कृति, कला के विद्वानों का सम्‍मान। स्‍वर्गीयों का भी सम्‍मान। जन हित का मामला है भाई। जनहित में सरकारें कुछ भी कर सकती है। एक गरीब की झोपड़ी पर सरकार जन हित में बुलडोजर फिरा सकती है और जनहित में उद्योगपति की कोठी बचाने के लिए फ्‌लाईओवर की दिशा बदल सकती है। जनहित में सरकार पिछला दरवाजा खोलकर हारे हुए नेता को राज्‍य सभा में लेकर मंत्री बना सकती है। जनहित में सरकार अगला दरवाजा बन्‍द कर के पिछले दरवाजे से माया, मुलायम, ममता, जलललिता को निहाल कर सकती है। पिछले दरवाजे आगे के मुख्‍य दरवाजे से भी ज्‍यादा बडे, चमकदार, और शानदार होते है। कई न्‍यूज चैनल पिछले दरवाजे पर खड़े होकर सरकार के कारनामों को जनता तक ले जाने को तैयार है। पिछले दरवाजे से क्‍या नहीं होता लेकिन सब कुछ जनहित के नाम पर।

जनहित के नाम पर कभी कभी अफसरों की भी मौज हो जाती है, उन्‍हें सेवाविस्‍तार मिल जाता है या कही सलाहकार बन जाते है। जनहित में राज्‍यपाल, आयोगों के अध्‍यक्ष तो बनते ही रहते है। जनहित में ही योजना आयोग में टोयलेट तीस लाख का बनता है। जनहित में ही वाल-मार्ट लोबिंग में करोड़ो खर्च कर देता है। जनहित में ही मंत्री के काफिले में पचासों कारे होती है। जनहित में ही नेता का लड़का नेता और जनहित में ही अफसर काली कमाई कर स्‍विस बैंक में जमा कराता है। जनहित के फैसलों की समीक्षा संभव नहीं सरकार का हर कदम जनहित में। ये अलग बात है कि जनहित में व्‍यक्‍तिहित होता है। स्‍वहित में होता है।

सरकार जनहित में सड़कें, पुल, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, रेल, हवाई जहाज के काम करती है और इन कामों से जनता से ज्‍यादा लाभ व्‍यापारी, उद्योगपति, अफसर, नेता या छुट भैय्‌ये उठाते हैं।

जनहित में ही सरकारे अपराधियों को छोड़ देती है ताकि चुनाव में ये लोग काम आये। जनहित में ही सरकार साहित्‍य, संस्‍कृति, कला, विज्ञान का बंटाढार करती है जनहित में ही सरकार वोटर को लुभाने-रिझाने के लिए तरह तरह के स्‍वांग करती है। जनहित में ही सरकारें बदल दी जाती है। जनहित सर्वोपरि हित है मगर सरकार का जनहित कुर्सी-हित में बदल गया है।

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यशवन्‍त कोठारी, 86, लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर जयपुर - 2, फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

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