राम प्रवेश रजक की कविता - मैं

 
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मैं
सीढ़ी का पहला पायदान नहीं हूँ
दूसरे पायदान पर चढ़कर जिसे भुला दिया
न ही पेड़ की कोई शाख हूँ
जरूरत पड़ने पर जिसे काट दिया
गुलदस्ते का फूल भी नहीं हूँ
सूखने पर जिसे फेंक दिया

कूड़े पर फेंका गंदगी का ढेर भी नहीं हूँ
कांटों से लदा बेर भी नहीं हूँ
जंगल का बूढ़ा शेर भी नहीं हूँ
कोई अपराधी, कैदी या जेल में नहीं हूँ
दीवार पर टंगे पुरानी फ्रेम की तस्वीर नहीं हूँ
जिन्दगी से हारा खिलाड़ी नहीं हूँ
रात भर खेलने वाला जुआरी भी नहीं हूँ

काशी बनारस का पंडित पुजारी नहीं हूँ
आटा में घाटा और चीनी में नफा
कमाने वाला व्यापारी भी नहीं हूँ
न्यायालयों की जंग लगी आलमारी नहीं हूँ
अधूरे काम करने वाला आदमी मैं
सरकारी भी नहीं हूँ।

मैं तुम्हारा पिता हूँ, था और रहूँगा।

राम प्रवेश रजक
रिसर्च स्कॉलर
हिंदी भवन
विश्व भारती
शांतिनिकेतन

Rajak.ram2010@gmail.com

1 टिप्पणी "राम प्रवेश रजक की कविता - मैं"

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