रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

राकेश भ्रमर की कहानी - गांठें

SHARE:

कहानी गांठें -राकेश भ्रमर ‘‘हर औरत के दो चरित्र होते हैं।’’ दिनेश के बोल उसके कानों में अभी तक गूंज रहे थे। उसके हृदय में एक अजीब पीड़ा हो र...

image

कहानी

गांठें

-राकेश भ्रमर

‘‘हर औरत के दो चरित्र होते हैं।’’ दिनेश के बोल उसके कानों में अभी तक गूंज रहे थे। उसके हृदय में एक अजीब पीड़ा हो रही थी। वह समझ नहीं पा रहा था कि किस प्रकार अपने दिल को इस अनजानी पीड़ा से बचाए। कैसी अजीब बात थी कि उसके पास दुःखी और पीड़ित होने का कोई खास कारण नहीं था। फिर भी वह दु:खी था। पीड़ा से उसका शरीर ही नहीं आत्मा भी तड़फड़ा रही थी।

बगल में सोई पत्नी को एकटक घूर रहा था। सोती हुई पत्नी का चेहरा कितना मासूम लग रहा था। कितना भोलापन था उसकी सुन्दरता में ? क्या ऐसी सुन्दर और भोली पत्नी के भी दो चरित्र हो सकते हैं ? पत्नी को देखता है तो उसे विश्वास नहीं होता, परन्तु फिर जब दिनेश की बातों की तरफ गौर करता है, तो लगता है, सचमुच उसकी बातों में कुछ दम है, अजीब सी खलबली मची है उसके दिलो-दिमाग में। सो भी नहीं सकता वह। नींद का दूर-दूर तक कहीं पता नहीं है। सोने का मन भी तो नहीं कर रहा है। क्या करे वह ?

आज शाम की ही तो बात है। ऑफिस से लौटते समय बस में दिनेश से मुलाकात हो गई थी। काफी दिनों बाद मिले थे दोनों। कालेज में दोनों साथ थे। यह तो नहीं कह सकते कि दोनों में गहरी दोस्ती थी, लेकिन जान-पहचान अच्छी थी। काफी दिनों बाद मिले थे सो दिनेश ने ही प्रस्ताव रखा था कि कहीं बैठकर चाय पी जाए तथा पुरानी यादों को नए सिरे से ताजा किया जाए। ऐसे मौके मुश्किल से लौटकर किसी की जिन्दगी में आते हैं। अतः वह भी राजी हो गया था। हालांकि शादी के बाद ऑफिस से सीधे घर पहुंचना उसका नियम बन गया था।

चाय के साथ-साथ बातों का सिलसिला शादी-ब्याह की तरफ मुड़ गया था। दिनेश ने तैश में आकर कहा था, ‘‘मुझे शादी से घृणा है। शादी क्या है... ? एक अनजान लड़की को अपने घर में लाकर बिठा लेने से क्या आप समझते हैं कि दो पवित्र आत्माओं का मिलन हो गया है। ऐसा समझना एक महान मूर्खता है। हम उस लड़की को ता-उम्र सुरक्षा प्रदान करें, उसकी सुख-सुविधाओं का ख्याल रखें, जिसके चरित्र के बारे में रंचमात्र भी पता नहीं है। ऐसी गलती हम क्यों करें ? और फिर हम बचपन से लेकर जवानी तक तमाम परेशानियां झेलते हुए अपनी शिक्षा पूरी करते हैं, नौकरी के लिए हाथ-पैर पटकते हैं, तो फिर अपनी खून-पसीने की कमाई में किसी को हक़दार क्यों बनाए, जिसका हमारे जीवन को संवारने में नाममात्र का भी योगदान नहीं है। क्या किसी लड़की का बाप किसी बेरोजगार युवक से अपनी बेटी की शादी करने लिए राजी होगा। नहीं... तो फिर उसकी बेटी का भार हम जीवन भर क्यों उठाते फिरें ?’’

दिनेश की बातों को वह पचा नहीं पाया। उनसे सहमत होना तो दूर की बात थी, ‘‘यह तो सामाजिक व्यवस्था है जिसमें ज्यादा फायदा पुरुष को ही होता है। लड़की अपने मां-बाप का घर छोड़कर हमारे घर आती है। हमारी सारी जरूरतों का ख्याल रखती है। इसके बदले में अगर हम उसे खाना-कपड़ा और सुरक्षा प्रदान करते हैं तो कोई महान काम नहीं करते हैं। तुलनात्मक दृष्टि से तो हम लड़की को ही महान ठहराएंगे।’’

‘‘तुमने ठीक तरह से मेरी बात को नहीं समझा है। मैं इस बात के खिलाफ नहीं हूं कि औरत का भार उसकी शादी के बाद हम उठाते हैं। मेरा मुद्दा यह है कि उस औरत का भार क्यों हम उठाएं जो समाज में एक मुखौटा लगाकर जीती है। सबके सामने वह चरित्रवान बनती है और अपनी सच्चरित्रता का प्रमाण-पत्र सबको दिखाती फिरती है। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि प्रत्येक औरत के दो चरित्र होते हैं। एक वह जो वह पति तथा समाज के समक्ष प्रस्तुत करती है तथा दूसरा वह जो उसके हृदय में कैद रहता है। दूसरा चरित्र किसी को नज़र नहीं आता है। उसका उपयोग औरत रात के अन्धेरे के एकान्त में करती है। ऐसी मुखौटे ओढ़ने वाली औरतों की अपेक्षा मैं किसी चरित्रहीन लड़की से शादी करना ज्यादा पसन्द कंरूगा जो किसी को अपनी सच्चरित्रता का प्रमाण तो नहीं देती फिरती।’’

उसकी समझ में नहीं आया कि दिनेश के मन में औरतों के प्रति ऐसी नफ़रत क्यों है ? क्यों उनके बारे में ऐसी धारणा बना रखी है ? हो सकता है किसी औरत ने उसे धोखा दिया हो। प्यार में धोखा खाने के बाद ही पुरुष स्त्री जाति से नफ़रत करने लगता है, वरना कोई कारण नहीं है कि हमें हर औरत चरित्रहीन ही नज़र आए।

दिनेश की बातों पर मनन करता वह कई पलों तक गुमसुम बैठा रहा। वह उसकी बातों से सहमत नहीं था, फिर भी उसे पता नहीं था कि किस प्रकार उसके तर्कों को काटा जा सकता था। किसी भी विषय पर न तो उसका गहरा अध्ययन था, न तो किसी चीज को गहराई से समझने की आदत। फिर भी उसने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता, तुम्हारी बातों में कहां तक सच्चाई है। बस इतना जानता हूं कि हमारी सामाजिक व्यवस्था कुछ ऐसी है कि हमें दाम्पत्य-सूत्र में बंधकर सदियों पुरानी परम्परा को निभाना ही पड़ता है। इस बात का हमारे लिए अधिक महत्व नहीं है कि शादी के पूर्व स्त्री का क्या चरित्र था या शादी के बाद अपने पति के प्रति वह वफ़ादार नहीं रह पाती है। फिर भी मैं तुमसे एक बात पूछना चाहूंगा कि औरतों के प्रति तुम्हारे मन में इतनी घृणा क्यों है ? चरित्रहीन तो पुरुष भी होते हैं। फिर तुम उन्हें गलत क्यों नहीं ठहराते हो ?’’

दिनेश उसकी बात सुनकर हंसा, ‘‘इसे तुम हमारी कमजोरी कह सकते हो। चूकि हम स्वयं गलत होते हैं और गलत इन्सान में इतना आत्मविश्वास नहीं होता है कि वह अपनी गलती किसी के सामने स्वीकार करने की हिम्मत जुटा सके।’’ इतना कहने के बाद दिनेश चुप हो गया था। हालांकि उसकी बातों का पूरा जवाब नहीं दिया था दिनेश ने, उसने दुबारा पूछा भी नहीं। पहले ही उसे काफी देर हो चुकी थी और वह नहीं चाहता था कि बातों का सिलसिला कुछ ऐसे मोड़ से गुजरे, जिधर उसे जाना पसन्द नहीं था। दिनेश पत्नी, परिवार, समाज तथा देश के बारे में क्या सोचता है, यह उसका अपना व्यक्तिगत मामला था। यह कोई जरूरी नहीं था कि हर व्यक्ति उसकी बातों से सहमत ही हो। वह भी नहीं था।

फिर भी चाहे दिनेश के साथ हुई बातों से वह सहमत न हुआ हो, लेकिन एक सन्देह उसके मन में जरूर घर कर गया था। रह-रहकर उसके कानों में दिनेश द्वारा कहा गया यह वाक्य ‘‘हर औरत के दो चरित्र होते हैं’’ गूंज उठता था। कई सालों के दाम्पत्य जीवन में आज तक उसे पत्नी के चरित्र पर कभी सन्देह नहीं हुआ था। सन्देह करने का कोई कारण भी उसे नज़र नहीं आता था। दोनों एक दूसरे के प्यार में कुछ इस तरह गुंथे हुए थे कि अन्य बातों की तरफ ध्यान मुश्किल से जाता था।

उस दिन घर में पत्नी की मधुर मुस्कान भी उसे आह्लादित न कर सकी। पत्नी की हर क्रिया को वह सन्देह की नज़र से देखता। अब तो उसे हर बात में छल नज़र आने लगा था। पत्नी का उसके प्रति अत्यधिक प्यार क्या इस बात का सबूत नहीं है कि वह अपनी पिछली जिन्दगी को ढंकने की कोशिश कर रही थी। घर में आकर ही उसे लगा था कि दिनेश की बातों का उसके ऊपर कितना गहरा असर हुआ था।

सोते-जागते उसके मन में बस एक ही धारणा बल पकड़ती जा रही थी कि उसकी पत्नी का भी कोई न कोई दूसरा चरित्र जरूर होगा। शादी के पहले का चरित्र... जिसका ज़िक्र आमतौर पर स्त्रियां शादी के बाद किसी से नहीं करती हैं। पति से तो भूलकर नहीं, तो भी वह इस बात का पता कैसे लगाए ? प्रत्यक्ष रूप से पूछना अच्छा नहीं होता। पत्नी सोचती वह कितनी नीच मानसिकता का शिकार है। आदमी भुलावों में जीने का आदी होता है। काश उसकी मुलाकात दिनेश से कभी न हुई होती। भुलावे में ही सही वह शान्ति से जी तो रहा था।

उसकी उदासीनता, व्यवहार का ठण्डापन और हर बात को शक़ की नज़र से देखना पत्नी की नज़रों से छिपा न रह सका। एक दिन पूछ ही बैठी, ‘‘आपके व्यवहार में आजकल कुछ अजीब सा परिवर्तन होता नजर आ रहा है। क्या बात है ? कोई परेशानी है आपको ?’’

‘‘नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है।’’ उसने उसी ठण्डेपन से जवाब दिया था। पत्नी संतुष्ट नहीं हुई। वह उसके नज़दीक आकर खड़ी हो गई और शर्ट के बटनों से खेलती हुई बोली-

‘‘आप कहते हैं तो मैं मान लेती हूं, परन्तु जब हमें साथ-साथ रहना है तो आपस में दुराव-छिपाव क्यों ? मैं क्या देखती नहीं कि कई दिनों से न तो आप ठीक से बात करते हैं न ही पहले की तरह मुझे प्यार। छोटे-छोटे अन्तर तो बहुत जल्दी स्पष्ट हो जाते हैं। फिर उन्हें छिपाना क्या ?’’

‘‘यही बात मैं तुमसे कहूं तो?’’

‘‘क्या मतलब ?’’ वह थोड़ा चौंकी।

‘‘देखो, हम आपस में पति-पत्नी हैं। हममें से कोई एक अगर दूसरे से कुछ भी छुपाता है तो क्या इसे विश्वासघात की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। हालांकि यह मेरी तुम्हारे प्रति ज्यादती होगी अगर मैं शादी के पूर्व की तुम्हारी ज़िन्दगी के बारे में कोई सवाल करता हूं। परन्तु कभी-कभी परिस्थितियां हमें यह जानने के लिए मजबूर कर देती हैं।’’

उसके स्वर की दृढ़ता पत्नी को अन्दर तक हिला गई। वह सहमकर एक कदम पीछे हट गई और फटी-फटी आंखों से उसके गंभीर चेहरे को ताकने लगी। एक बार तो उसकी समझ में नहीं आया कि पति की बातों का तात्पर्य क्या है ? फिर जब समझी तो हृदय की धड़कन असामान्य रूप से बढ़ गई थी। एक दिन पति उसकी पिछली ज़िन्दगी के आगे एक प्रश्नचिह्न खड़ा कर देगा। ऐसा तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था।

और उसी दिन से उन दोनों के जीवन में बिष का एक बीज पड़ गया जो धीरे-धीरे वट वृक्ष का रूप लेने लगा था। उनकी बेहद खुशहाल ज़िन्दगी में ऐसा परिवर्तन आ जाएगा, दोनों को ही आशा नहीं थी। उसने अगर यह सोचा हो कि पत्नी अपनी पिछली जिन्दगी के बारे में कुछ बताएगी तो यह उसकी भूल थी। स्त्रियां विवाह-पूर्व संबन्धों की चर्चा न तो पति से करती है, न ही किसी दूसरे को बताने की भूल; ऐसा दिनेश ने कहा था। शादी के बाद उनका केवल सती-सावित्री का रूप ही पति को नज़र आता है। इस संबन्ध में जितना ही वह सोचता, उतना ही ज्यादा गांठें उसके मन में पड़ती जा रही थीं। क्या करे वह ? हारकर उसने किताबों में अपना मन लगाने की कोशिश की। हालाकि यहां भी उसकी कोशिश यहीं रहती कि स्त्रियों के चरित्र का गहराई से अध्ययन किया जाए।

एक बार उसने हितोपदेश में एक कथा पढ़ी- वणिक् स्त्री और उसके यार की कथा। कथा कुछ इस प्रकार थी, ‘‘बहुत पहले किसी शहर में एक बनिया रहता था। उसकी स्त्री अपने नौकर के साथ रति-क्रीड़ा में रत रहती थी। एक दिन बनिए ने अपनी स्त्री को उसे चुम्बन देते देख लिया। कुलटा तुरन्त पति के पास जाकर कहने लगी, ‘स्वामी, यह दुष्ट नौकर प्रतिदिन काफूर चुराकर खाता है। मैंने इसका मुंह सूंघकर देखा है।’ बनिए ने पत्नी की बात का विश्वास कर लिया।’’

उसने इस कथा पर काफी मनन किया, तो ऐसी होती है स्त्रियां। बुद्विचातुर्य द्वारा वह अपने पति को उल्लू बनाए रखती हैं। एक तरफ तो वह व्यभिचार में व्यस्त रहती हैं, दूसरी तरफ चतुराई के साथ अपने पतिव्रत धर्म का अनुपालन भी करती रहती हैं। कहा भी है, पुरुष के भाग्य तथा स्त्रियों के चरित्र को देवता भी नहीं जानते, मनुष्य की क्या बिसात ?

उसने इस कथा का जिक्र पत्नी से किया, इस आशा से कि वह कुछ टिप्पड़ी करेगी, परन्तु पत्नी सुनकर चुप रह गई थी। उसने सन्देह को इससे और बल मिला। सचमुच अगर वह चरित्रवान होती तो कुछ न कुछ जवाब अवश्य देती। इस तरह चुप्पी नहीं लगा जाती।

धीरे-धीरे उनके संबन्धों में ज़ंग लगता जा रहा था। औपचारिक किस्म की बातों के सिवा उनमें और कोई बातें न होती। कभी-कभी उसे पछतावा होता कि पत्नी के चरित्र पर संदेह कर के उसे क्या हासिल हुआ। अगर दिनेश की बातें सच हैं, तो सभी स्त्रियां चरित्रहीन होती हैं। तब तो परिवार नाम की चीज का अस्तित्व ही इस दुनिया से मिट जाएगा। वैसी हालत में क्या कोई खुश रह सकता है ? ..... कदापि नहीं। तो फिर क्यों नहीं हम एक दूसरे पर विश्वास करके जीते हैं ? औरत या मर्द की पिछली जिन्दगी से किसी को कुछ लेना-देना न रहे, तभी हम खुश रहने की उम्मीद कर सकते हैं। इसके सिवा और चारा क्या है ?

लेकिन अब तो बिष-वृक्ष काफी बड़ा हो चुका था। उसे काट पाना उनके लिए बिलकुल असंभव था। तो फिर क्या इसे इसी तरह पनपने देना होगा। पत्नी अपने आप में कुछ अलग ढंग से रहने लगी है। उसकी बातों का बहुत नपा-तुला जवाब देती है। ज्यादा तो कभी नहीं। हां कभी-कभी जवाब में लिपटे शब्द जरूरत से काफी कम होते हैं और उसे पत्नी का तात्पर्य समझने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देना पड़ता है। खीझने की आदत नहीं है। गुस्सा भी कम ही करता है। बस चुपचाप पड़ा रह जाता है।

दोनों के संबंधों में पड़ी दरार चौड़ी-दर-चौड़ी होती जा रही थी। उसे पाट पाना दोनों के लिए असंभव था। अतः एक दिन उसने तय किया कि इस संबंध में पत्नी से साफ-साफ बात कर के देखे कि उसका इरादा क्या है। पलंग पर लेटे हुए उसने धीमे स्वर में कहना शुरू किया, ‘‘मैं मानता हूं कि तुम्हारी पिछली ज़िन्दगी के बारे में पूछ कर मैंने बहुत बड़ी गलती की थी। मेरी समझ में नहीं आता कि मैं अब उस गलती को सुधार भी सकता हूं। यह तुम्हारी खुशी थी कि तुमने अपने बारे में कुछ नहीं बताया। लेकिन मेरी गलती की सजा तुम क्यों भुगतो ? हमारे संबंध अब उस स्थिति में नहीं रह गए है कि जीवन पथ पर एक कदम भी साथ-साथ आगे बढ़ा जा सके। तो हमारे लिए बेहतर यहीं होगा कि हम दोनों इच्छानुसार अपने अपने रास्ते चुन लें। बोलो, तुम क्या कहती हो ? मुझे आशा है कि मेरी बात से तुम जरूर सहमत होगी ?’’

पत्नी कुछ देर तक छत की तरफ निहारती रही। फिर बोली, ‘‘गलती तो मेरी भी है। पति होने के नाते पत्नी के बारे में आपको कुछ भी पूछने का अधिकार है। भूल तो मुझसे हुई कि मैंने आपको कुछ बताया नहीं। बता देती तो शायद हमारे संबंधों में आज इतना कड़वापन नहीं होता। तो भी मैंने कुछ सोचकर ही नहीं बताया था। सोचा था, आपसे कुछ नहीं बताऊंगी तो आपको विश्वास हो जाएगा कि शादी-पूर्व मेरा किसी से काई संबंध नहीं था। शायद यहीं मैं कुछ भूल कर गई। मेरे सोचे अनुसार तो कुछ नहीं हुआ। बल्कि उसका उल्टा ही हो गया। फिर भी मुझे इसका कोई पश्चाताप नहीं है कि मैंने आपके साथ विश्वासधात किया। अब जब हमारे संबंध ढह ही रहे हैं तो मुझे यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं हो रहा है कि विवाह-पूर्व मेरे संबंध किसी से अवश्य रहे हैं। परन्तु शादी के बाद मेरा पहला प्यार मेरे लिए एक स्वप्न के समान था। मैं उसे पूरी तरह भूल चुकी थी। आपने याद दिलाया तो सोए हुए जज्बात फिर से जाग उठे। हां, मैंने अपराध किया है और उसकी सजा भी भुगत रही हूं। इतना सब जान लेने के बाद कोई भी पति अपनी पत्नी को सच्चे दिल से स्वीकार नहीं कर सकता है। आप भी नहीं करेंगे, ऐसी मुझे आशा है। मेरे अपराध की यह सबसे बड़ी सजा है।’’

पत्नी के स्वर में कोई घबराहट, कोई कम्पन नहीं था। लग रहा था जैसे वह पति को कोई कहानी सुना रही थी।

पत्नी की बात सुनने के बाद उसने कहा, ‘‘मेरे पूछने पर अगर तुम यह सब बता देती तो भी तुम्हें स्वीकार कर लेता, ऐसा अब मुझे नहीं लगता है। तब भी नहीं लगता। आज तुमने अपनी खुशी से सब कुछ बताया है तो अब यह भी बता दो कि तुम क्या चाहती हो ?’’

‘‘आपकी कोई चाहत नहीं है ?’’ पत्नी ने उसकी तरफ मुंह घुमाकर पूछा।

‘‘मेरी चाहत का अब कोई मतलब नहीं रह गया है। तुम अगर मेरे साथ रहना चाहती हो तो रह सकती हो। मुझे न तो खुशी होगी, न ही दुःख... जीना मुझे आता है। मैं हर हाल में जी लूंगा।’’

‘‘संबंधों में अगर ऐसा तनाव रहे कि वह अब टूटें, तब टूटें तो जीने का क्या मतलब रह जाता है ?’’

‘‘संबंधों को हर हाल में निभाया जा सकता है। बशर्ते कि उनको निभाने की शक्ति हममें हो। यह कोई जरूरी नहीं कि उनसे एक विशेष खुशी हासिल हो ही।’’

‘‘आप यह क्यों भूल जाते है कि मैं एक औरत हूं और औरत पति से केवल खुशी ही नहीं, कुछ अधिकारों की भी अपेक्षा करती हैं। खुशी न सही अगर अधिकार ही मुझे मिल जाए तो मैं आपके साथ गुजारा कर सकती हूं।’’

‘‘अधिकारों से तुम्हारा क्या तात्पर्य है ?’’

‘‘पत्नी के जो अधिकार होते हैं..... पति की सेवा करना, उससे मातृत्व पाना और यह अपेक्षा करना कि वह किसी दूसरी औरत के आगोश में न लुढ़क जाए।’’

‘‘इन अधिकारों की आशा करना तुम्हारे लिए व्यर्थ है। मैं एक इन्सान हूं, भगवान नहीं। मैं तुम्हें सहारा दे सकता हूं, इसके सिवा कुछ नहीं।’’ उसने दृढ़ता से कहा और करवट बदलकर आंख मूंद ली।

पत्नी ने दरारों को पाटने की एक कमजोर कोशिश की थी। लेकिन उसके एक धक्के से दरार और चौड़ी हो गई थी। अब और कोशिश करनी बेकार थी।

वह दोनों अदालत जाने के झमेले में नहीं पड़े। आपसी समझौते के तहत दोनों एक दूसरे से अलग हो गए। पत्नी अपनी मां के घर चली गई थी। इतना सब होने के बाद उसके लिए शादी करना एक मूर्खता होगी। अतः उसने तय किया कि अकेला रहना ही उसके लिए बेहतर होगा।

आज पत्नी से अलग होने के बाद जब वह दिनेश की बातों पर गौर करता है तो उसे उसकी बातों की सच्चाई का एहसास होता है। स्त्रियां सचमुच दोहरा चरित्र जीती हैं। पुरुष भी कितने मूर्ख होते हैं जो उसके चरित्र की गहराई तक नहीं पहुंच पाते हैं।

पत्नी से अलग हुए कई महीने हो चुके थे। अब तो न उसे घर पहुंचने की जल्दी होती थी, न ही इस बात की चिन्ता कि घर में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है। उनका प्रबंध करना है। घर वह केवल सोने के लिए जाता था। खाना वह होटल में खा लेता था।

तो दिन ऐसे ही गुजर रहे थे कि एक दिन अचानक फिर दिनेश से बस में मुलाकात हो गई। उसने दिनेश को धन्यवाद देते हुए कहा, ‘‘भई, मैं तो तुम्हारी बातों का कायल हो गया हूं। सचमुच स्त्रियों के चरित्र का तुमने गहरा अध्ययन किया है।’’ फिर उसने विस्तार से अपनी कहानी दिनेश को सुनाई।

कहानी सुनकर दिनेश हंसा, ‘‘तुम पहले व्यक्ति हो, जिसने मेरी बातों को इतनी गहराई से महसूस किया है और उन्हें अपने जीवन में अमल करके भी दिखा दिया। लेकिन शायद तुम्हें यह सुनकर भी आश्चर्य हो कि मैंने शादी कर ली है।’’

उसे सचमुच आश्चर्य हुआ, ‘‘अच्छा... तब तो जरूर तुम्हें कोई ऐसी लड़की मिल गयी होगी, जिसने अपनी पिछली जिन्दगी की सारी अच्छाइयां-बुराइयां सच-सच तुमसे बता दी होंगी।’’

‘‘उसकी जरूरत ही नहीं पड़ी। हम दोनों काफी पहले एक दूसरे को प्यार करते थे। वह मेरे पड़ोस में रहती थी, परन्तु तब सामाजिक रीति-रिवाजों ने हमें एक होने नहीं दिया था। फलतः उसकी शादी एक दूसरे व्यक्ति से हो गई थी। लेकिन कुछ महीनों पूर्व पति-पत्नी में किसी कारणवश तलाक हो गया तो मैंने उससे शादी कर ली।’’

‘‘अच्छा, यह तो बहुत अच्छी बात है। परन्तु क्या तुमने उससे उसके पहले पति के बारे में नहीं पूछा ?

‘‘यह पूछकर अपने दिल को क्यों जलाएं ? जो उसका अतीत है, वह मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता, तो उसको जानकर मुझे क्या करना ?’’ दिनेश ने बताया।

वह सोच में पड़ गया। पत्नी के अतीत के बारे में पूछकर उसने कोई गल्ती तो नहीं की थी ? वह कुछ समझ नहीं पाया। थके मन से बोला, ‘‘अच्छा, तो क्या अपनी पत्नी से मुझे नहीं मिलवाओगे?’’

‘‘क्यों नहीं जरूर मिलवाऊंगा? आज ही चलो।’’

दिनेश के साथ जाते हुए वह सोच रहा था- क्या उसने कोई भूल की है। दिनेश की बातों में पड़कर उसने तो अपना दाम्पत्य-जीवन समाप्त कर लिया था। दूसरी तरफ दिनेश ने अपना घर बसा लिया। ऐसी औरत के साथ जो पहले से शादी-शुदा थी। तो क्या वह अपनी पत्नी के साथ नहीं निभा सकता था ? जरूर निभा सकता था। बशर्ते कि उसमें पत्नी की गलतियों को माफ कर सकने की शक्ति होती। गलतियां मनुष्य से ही होती हैं। और उन्हें माफ किया जा सकता है। उसने क्यों न माफ किया पत्नी की गलती को, जब उसने सच्चे मन से उसके सामने सब कुछ बयान कर दिया था।

सारे रास्ते वह गुमसुम रहा। दिनेश के घर पहुंचकर भी वह गुमसुम ही था। दिनेश ने घण्टी का बटन दबाया। अन्दर एक जल तरंग की सी आवाज उठी। उसका दिल पता नहीं क्यों असामान्य रूप से धड़कने लगा था। शायद कुछ अप्रत्याशित घटित होने वाला था।

किसी के कदमों की आहट दरवाजे की तरफ आती हुई प्रतीत हुई। फिर पी होल से किसी की एक आंख ने बाहर झांककर देखा। सिटकनी गिरने की आवाज आई और फिर एक झटके के साथ पूरा दरवाजा खुल गया। उसने दरवाजे का पल्ला पक्ड़कर खड़ी औरत को देखा और उसे लगा कि वह भरभराकर गिर पड़ेगा। उसने तुरन्त अपना हाथ दीवाल पर टिका दिया।

वह फटी-फटी आंखों से दरवाजे पर खड़ी अपनी पत्नी को घूरे जा रहा था। उसकी अपनी भूतपूर्व पत्नी... संज्ञाशून्य होते जा रहे अपने कानों में उसने दिनेश की आवाज सुनी-

‘‘मिलिए मेरी पत्नी प्रज्ञा से और प्रज्ञा यह है मेरे कॉलेज के दिनों के दोस्त......’’

(समाप्त)

--

(राकेश भ्रमर)

ई-15, प्रगति विहार हास्टल,

लोधी रोड, नई दिल्ली-110003

मोबाइल- 09968020930

COMMENTS

BLOGGER
---*---

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3790,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2067,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: राकेश भ्रमर की कहानी - गांठें
राकेश भ्रमर की कहानी - गांठें
http://lh4.ggpht.com/-jZASZj33itA/UPeddbdXJZI/AAAAAAAAScQ/x9bmj4Xpwqw/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-jZASZj33itA/UPeddbdXJZI/AAAAAAAAScQ/x9bmj4Xpwqw/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2013/01/blog-post_222.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2013/01/blog-post_222.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ