गुरुवार, 17 जनवरी 2013

उमेश मौर्य की कहानी - तलाश जारी है....

॥ तलाश जारी है............।

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उमेश मौर्य

सड़क के बगल लड़की की कराहती हुई आवाज सुनकर मोटरसाईकिल वाले रूके। देखा तो एक जवान लड़की नग्‍न अवस्‍था में छटपटा रही थी। रात के अंधेरे में कुछ स्‍पष्‍ट नहीं हो रहा था। किसी तरह उसे पास के पुलिस स्‍टेशन में रिपोर्ट करके। महानगर हास्‍पिटल में पहुंचाया गया। बाद में पता चला लड़की किसी डिग्री कालेज की छात्रा थी। धीरे-धीरे ये हवा पूरे शहर में धुएं की तरह फैल गयी। मीडियॉ की गाड़ियॉ अपनी नौकरी पर तैनात हो गयी। लड़की के कुछ होश में आते ही। मुंह में माईक डाल दिये। और कितने सवाल दाग दिये।

मीडिया- आपकी ये हालत क्‍यों हुई। कैसे हुई। आप वहाँ क्‍या करने गई थी। आपको इतनी रात अकेले निकलने की क्‍या जरूरत थी। कितने लोगों न आपके साथ दुर्व्‍यवहार किया। कितना समय रहा होगा। वो किस रंग के कपड़े में थे। किन लोगों ने आपकी सहायता की। आपको अपराधियों के बारे में क्‍या कहना है। आपके तरीके से उन्‍हें क्‍या सजा मिलनी चाहिए। क्‍या आप इस घटना में प्रसाशन को जिम्‍मेदार ठहरायेगी। सरकार के प्रति आपका क्‍या विचार है। आपको इस शासन व्‍यवस्‍था में क्‍या कमियॉ नजर आ रहीं है। अभी आपको कैसा महसूस हो रहा है। ऐसे कितने हजारों सवाल दाग दिये गये। बिना किसी हिचक के। क्‍योंकि उन्‍हें कुछ भी बोलने की पूछने की स्‍वतंत्रता जो है। कही भी किसी से भी कोई सवाल कर सकते हैं। ये भी देश सेवा है। सब अपनी नौकरी निभा रहे थे। बिना किसी सहानुभूति के फर्ज अदायगी हो रही थी बस।

लड़की कुछ न बोल सकी। शायद ये सोचकर की कि उसके एक एक शब्‍दों का भी बाद में बलात्‍कार होगा। उन्‍हें भी मेकअप के साथ मार्केट में बेचा जायेगा। उन पर पब्‍लिसिटी बढ़ाई जायेगी। राजनीति होगी। वोटबैंक बढ़ाये जायेगें। चुप रह कर ही अपनी बची इज्‍जत को बचाना उचित समझा। हफ्‌ते भर हवस के शिकारियों का दर्द झेलते-झेलते दम तोड़ दिया। लेकिन मीडिया न उसे भी निशाना बनाया। इसमे किसी पार्टी वालो का हाथ लगता है।

किसी तरह बलात्‍कारियों को पकड़ा गया। पूरा देश इस घटना में उमड़ पड़ा। लेकिन कुछ भी न हो सका। अपराधी पुलिस की सेवा में सुरक्षित। जनता गला फाड़-फाड़ कर चिल्‍ला रही। मंत्री जी के भाषण भी रंग पकड़ रहे है - देखिए हमें इस घटना का बहुत ही अफसोस है। हम इसके लिए भगवान से प्रार्थना करते है। निश्‍चित ही बहुत ही घिनौनी हरकत है। और इसमे कहीं न कहीं विरोधी पार्टी का हाथ है। हम गृहमंत्री जी से बात कर रहें है। घटना की पूरी तहकीकात की जाए। रिपोर्ट सौंपी जाय। स्‍थानीय पुलिस की रिपोर्ट आ गई है। अपराधी पकड़े गये हैं। ये हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। हम इन पुलिस वालो को बधाई देते है। इनके पदोन्‍नति की फाईल भी तैयार हो गई है। हमारे चुस्‍त-दुरूस्‍त शासन में अपराधी कैसे अपराध करके भाग सकता है। शत्‌-शत्‌ नमन इन नौजवानों को।

टी0वी0 के कोई भी चैनल खोलो तो उसी पे चार - पॉच लोग बैठे हैं बहस जारी है। बड़े बड़े बुद्धिजीवी चर्चा में गंभीरता से लगे हैं। चिल्‍ला रहें है, कि झगडे़ कर रहे, या नाटक कर रहे है कुछ पता नहीं। लेकिन सब नौकरी कर रहे हैं। बातें कर रहें है- कोई स्‍थाई कानून बनना चाहिए। देश में लड़कियों की इज्‍जत खतरे में। ये सरकार के लिए घिनौनी बात है। इसका सरकार को जबाब देना होगा। हमे अपराधियों की सजा चाहिए बस। वर्तमान मंत्रीगण भी जवाब तैयार तैनात रहते है- ये देश के सरकार की ही पूरी जिम्‍मेदारी नहीं है। इसमे हमारी आम जनता की जागरूकता को बढाना होगा। कोई भी कानून ऐसे आज के आज नहीं बन जाता। उसके कुछ नियम कायदे कानून होते है। हम उसका उल्लंघन नहीं कर सकते। ये जो कुछ भी हुआ उसमे हमे पूरी हमदर्दी है लेकिन हमारी कुछ मजबूरियॉ है। हमे केवल एक विषय पर ही नहीं सोचना है। देश की महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, भुखमरी, बिजली, पानी, सबकी जिम्‍मेदारी हमे देखनी पड़ती है। हम इस सबके लिए जल्‍दी ही कोई स्‍थाई कदम उठाऐगे। बस आपका हाथ हमारे साथ बना रहे। हम एक भयमुक्‍त समाज का निर्माण करेंगे।

10-15 दिन पूरे जोश का वातावरण बना रहा। लेकिन अपराधियों को कोई सजा न मिल सकी। और न ही किसी स्‍थायी कानून का निर्माण हो सका। हर कानून निमार्णकर्ता, अपने आप में उन्‍हीं अपराधियो की शक्‍ल देख रहा था। हर शिकंजे की साईज उनके अपने नाप में फिट बैठ रहे थे। जनता फांय-फांय करती हुई बैठ गई। मामला अदालत में गया चलता रहा। लोगो को दिलासे मिलते रहे। बहस चलती रही। जॉच कमेटी बैठी। उसमे नई भर्ती हुई। सजा के अधिनियम तैयार होते रहे।

कुछ ही दिन बाद फिर एक बलात्‍कार हुआ। अब न जनता चीखी न चिल्‍लाई। उसे अपनी भूल का एहसास हो चुका था। न मीडिया आई । न बहस हुई । ये आम बात हो गई। क्‍योंकि इस केश में किसी मंत्री के बेटे का नाम था। एक गरीब लड़की की अनसुनी सी चीख, जो गले से बाहर न निकल सकी। एक योजनाबद्ध तरीके से दाब दी गई। अगले दिन अखबार में छोटी सी लाईन में छपा कि - एक और बलात्‍कार । शहर के बाहर एक 18 साल के लड़की की अज्ञात व्‍यक्‍तियों द्वारा बलात्‍कार। लड़की को जिला अस्‍पताल पहुंचाया गया और बलात्‍कारियों की तलाश जारी है।

सरकार के यहाँ कानून बन रहें है। पुलिस में तलाश जारी है। टी0वी0 में चर्चा हो रही है। अब ये सब आम हो गया है। कौन किससे क्‍या कहे

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-उमेश मौर्य

कुवैत

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