गुरुवार, 17 जनवरी 2013

हेमंत शर्मा की कविताएँ

image

(1)

अब तो नहीं आती तू बस स्टैंड पर भी

जहाँ तेरा दीदार कर लिया करते थे।

तेरी यादें भी कुछ फीकी पड़ गयी

जिनमे तुझे प्यार कर लिया करते थे।

एक फोटो थी पुरानी सी, वो भी खो गयी कहीं

जिसे देख तुझसे बात कर लिया करते थे।

घर वालो ने बंद कर दिया बाहर निकलना भी

जिस बहाने तुझसे मुलाकात कर लिया करते थे।

अब तो रोज गुजरना पड़ता है इस दर्द से

पहले तो कभी कभी गुजर लिया करते थे।

किताबे भी बन गयी दुश्मन अब हमारी

जिनमे अक्सर तेरा चेहरा निहार लिया करते थे।

दिन नहीं कटता अब काटने से

पहले तो तेरे पहलुओं में दिन गुजार लिया करते थे।

वक्त बदला कि सब कुछ बदल गया

पहले वक्त भी हमारे पास ठहराव लिया करते थे।

क्या दोष दे हम वक्त किस्मत ही ऐसी थी

वर्ना वक्त को हम यूं ही बिसार लिया करते थे।

जुदा तो हर कोई होता है प्यार में

कभी हम भी हीर रांझे सी बहार लिया करते थे।

--

(2)

माँ

प्यासी रुखी सी जमीं पर,

बारिश की पहली,

बूँद पड़ती है जैसे |

ममता किसी माँ की,

हर बार ही अपने बच्चों पर,

बरसती है ऐसे ||

आँचल की छांव से अपने,

हर दुःख से हमारी रक्षा करती |

हमारी  एक ख़ुशी की खातिर,

अपने हजार दुःख परे धरती ||

मिलकर बच्चों में बच्चों सी बन जाती

गलती पर अध्यापक बन जाती

कैसे चला जाये जीवन की कठिन डगर पर

अनेकों कहानी के जरिये हमे बताती

कैसे भूल जाते है बच्चे ?

उस निस्वार्थी सेविका को |

या फिर कहूं मनु रूप में,

मिली देविका को ||

--

(3)

मेरी बेटी ! आ तो गयी तू दुनिया में

पर मैं तुझे पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाउँगा।

तू चल सके आजादी से सडकों पर

तुझे मैं ऐसा स्वतंत्रता का अहसास नहीं दे पाउँगा।

पहन सके स्वेच्छा से कोई वस्त्र भी,

तुझे मैं ऐसा सभ्य समाज नहीं दे पाउँगा।

क्या होगा तेरे साथ भविष्य में,

शायद मैं तुझे कभी आवाज नहीं दे पाउँगा।

भाई मुश्किलों में तेरे साथ खड़े होंगे भी,या नहीं,

तुझे ऐसा मैं दर्द विस्वास नहीं दे पाउँगा।

मेरी बेटी आ तो गयी तू दुनिया में

पर मैं तुझे पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाउँगा।

---.

(4)

हर दुःख दर्द की है साथी तू

हर वक्त मेरे साथ है

ठोकरों में भी संभल जाता हूं

क्यूंकि तेरे हाथो में मेरा हाथ है।

नहीं है तू कोई साधारण औरत

तुझमें निराली कोई बात है

ममता भरी है तेरे हर लब्ज में

तू तो जगत कल्याणी साक्षात् है।

तेरे आँचल में सिमट जाता है

मेरे दर्द का हर कतरा

और तू अपने हर दर्द पे मुस्कुराती है

ये तो बता तू इतनी शक्ति कहाँ से लाती है।

तुझमें क्षमा है दया है

ये तो बता इतनी दरिया दिली तू कहाँ से लाती है

तेरी खूबियाँ बच्चों को सौगात है

तू नहीं कोई साधारण औरत

तुझमें निराली कोई बात है

हर दुःख दर्द की है साथी तू

हर वक्त मेरे साथ है।

तेरे लिया प्रयुक्त होता है

एक छोटा शब्द केवल - माँ

मगर इस शब्द में ही सिमट आता है

ममता से ओत -प्रोत बड़ा सा जहाँ ,

तेरी तारीफें कर सके ऐसी कहाँ औकात है

--

(5)

वो औरत

किसी राह पर ,

अक्सर देखी होगी

ईंट चुना पत्थर मिट्टी

ढोती कोई औरत,

वो फटी सी धोती,

में लिपटा मुश्किल से चार हड्डियों

का बेजान सा शरीर,

मगर बेजान कहाँ,

वो बड़ी ही ताकतवर है

उसमे ताकत है ,सहन करने की

काम करने की, बच्चे पालने की

पति संग घर संवारने की

बमुश्किल से उसका वो डेढ़ साल

का बच्चा

जिसे वह यूं ही जमीं पर

छोड़ देती है

शायद उसी के लिए ही

हर पत्थर को तोड़ देती है

वो निर्मात्री नहीं केवल

एक मकान सड़क की

वो निर्मात्री है

स्वयं में नारी के प्रति

बदलती सोच की

उसे नहीं है जरुरत

किसी आलीशान मकान की

या लजीज व्यंजन की

वो तो गाड़ी है बिन इंजन की

जो स्वयम की धकापेल में

चलती रहती है

जो बहुत कुछ सहती है

सहकर भी कुछ न कहती है

वो मूर्ति नहीं है

वो भी बोल सकती है

लड़ सकती है अपने अधिकारों के लिए

मगर

ये दुनिया उसे कब कहने देती है,

उस पर अत्याचारों ने

उसे भी बदल दिया लोगो के

व्यवहारों ने,

अब वो सतर्क हो गयी है

देखकर ढंग दुनिया का

उसने भी ओड लिया है

अब रंग दुनिया का,

जब काम के बाद वो पैसे

मांगती है

तो अखरता है लोगो

को उसका मिजाज

कुछ तो गलत कहने लगे उसका

अंदाज

लेकिन अब वो सही है,

जो अपना हक़ मांगती है

उसे भी तो भूख लगती है

वो भी तो बच्चे पलती है||

--.

hemant Sharma 04/12/2012

patti- chakrasainpur, khekra

distt. Baghpat. uttarpradesh

09536002070

3 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------