शनिवार, 19 जनवरी 2013

सीताराम गुप्ता की कविता - लड़की की पीड़ा की अभिव्यक्ति

image

लड़की की पीड़ा की अभिव्यक्ति
सुनकर
पत्थर तक
द्रवीभूत हो गए
उस लड़की की पीड़ा
एक ने
रची एक कविता
उसकी पीड़ा को शब्द दिये
और दूसरे ने
ताना-बाना
बुना कथा का उस पर
उस कविता और कथा
दोनों पर
अदबी हल्क़ों में
ख़ूब हुईं चर्चाएँ
मिली प्रशंसाएँ और पुरस्कार
दोनों, दोनों को
और इससे होकर प्रभावित
होकर थोड़ा-सा उत्साहित
एक युवक ने
खोज-बीन कर
गले-सड़े इस सिस्टम को
केंद्र में लेकर
उस लड़की पर
फिल्म बनाई
और
फिल्म ने
दूर विदेशों तक में
ख्याति पाई
एक बुततराश ने
लड़की की पीड़ा को
पत्थर में हूबहू ख़ूब तराशा है
एक रंगकार
उसकी भी ख़्वाहिश है
इस लड़की के ज़रिये
कैनवास पर रंगों को आजमाए
अपनी पहचान बनाए
और ये लड़की भी
अब थोड़ा ख़ुद को
महसूस कर रही है महफूज़
क्योंकि
न जाने कितने और कलाकारों को
अब उसकी सख़्त ज़रूरत है
हर इक कलाकार ने
चुन रखा है
अपने हिस्से की
एक-एक उपेक्षित शोषित-पीड़ित को
अभिव्यक्ति के लिए उसकी पीड़ा की
शेष पर
सिलसिला शोषण का
पीड़ा का जारी है
आख़िर
हरेक की पीड़ा को
ध्वनि, रंग-रूप, प्रकाश
आकार-प्रकार दे दें जो
इतने शिल्पी, इतने कलाकार
कहाँ से आएँ?
मिट सकती है
शेष सभी की पीड़ा भी
कलाकार गर कोई
थोड़ा बड़ा हो जाए
एक-एक की नहीं
सभी की पीड़ा को
एक साथ दिखलाए
या फिर
हर पत्थर
इंसाँ हो जाए
और हर इंसाँ
इक कलाकार बन जाए

--

सीताराम गुप्ता
ए.डी.-106-सी, पीतमपुरा,
दिल्ली-110034
फोन नं. 011-27313679/9555622323
srgupta54@yahoo.co.in

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------