गुरुवार, 24 जनवरी 2013

सोनाली यादव की बाल कहानी - खट्टी-मीठी

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खट्टी-मिठ्ठी

सोनाली यादव

एक गांव में एक परिवार रहता था. उसमें दो बहने थी. एक का नाम खट्टी और दूसरी का नाम मिठ्ठी था. खट्टी को नृत्य करना अच्छा लगता था,जबकि मिठ्ठी को गाना गाना और तरह-तरह के वाद्य-यंत्र बजाना. दोनों ही कक्षा चौथी में पढती थीं. संग—संग स्कूल जातीं. संग-संग खेलती-कूदती.

एक छोटी सी बात पर दोनों में झगडा हो गया. खट्टी ने कहा कि मैं नयी पेन्सिल मैं लूंगी. मिठ्ठी कहती मैं लूंगी. दोनों के बीच तू-तू-मैं-मैं चल रही थी, तभी उनके पिता आ पहुँचे. दोनों के झगडने का कारण जानने के बाद, उन्होंने पेन्सिल के दो टुकडॆ करते हुए दोनों के बीच बांट दी. इस तरह झगडा शांत हुआ.

एक बार दोनों ने अपनी माँ से प्रश्न किया कि उनका नाम मिठ्ठी और खट्टी क्यों रखा गया..तब माँ ने समझाते हुए कहा- मिठ्ठी को मीठा खाने का शौक था,जबकि खठ्ठी को तीखा. इसलिए दोनों के नाम खट्टी-मिठ्ठी रख दिए गए.

जैसे-जैसे वे बडी होती गईं, अपनी-अपनी कलाओं में पारंगत होती चली गईं. खट्टी नृत्य करती और मिठ्ठी गाने गाती और संगीत में अनूठी प्रस्तुति देती. देखते ही देखते वे सितारा आर्टिस्ट बन गई खट्टी को इस बात पर गर्व होता कि उसके मुकाबले कोई नहीं. एक बार तो उसने अपनी छोटी बहन का उपहास उडाते हुए कहा;-“मेरे समान नर्तकी दुनिया में नहीं है.”

अपनी बहन की बातें सुनकर मिठ्ठी को बहुत बुरा लगा. उसने समझाते हुए कहा :-“घमंड करना ठीक नहीं है. नृत्य हो अथवा गायिकी, ये सब ईश्वर की देन होती है. अतः हमें अपनी कला को, भगवान को समर्पित करते हुए, उन्हें धन्यवाद देना चाहिए. किसी भी बात्त पर घमंड करना अनुचित है. अपनी बहन की बातें सुनकर खट्टी को बहुत बुरा लगा. बात यहाँ तक आगे बढ गई कि वे अबोला रहने लगीं.

मिठ्ठी प्रतिदिन अपना रियाज करती.और बुलावा आने पर वह अपना कार्यक्रम देने पहुँच जाती. जबकि खट्टी ने नृत्य का अभ्यास करना तक छोड़ दिया था. वह दिन भर अपने कमरे में पडी रहती. एक दिन ऎसा भी आया कि वह बीमार रहने लगी.

अपनी बहन की दुर्दशा देखकर मिठ्ठी को दुख होता,लेकिन वह कर भी क्या सकती थी. एक दिन उचित अवसर जानकर, अपनी बहन से कहा-“देखो, तुम एक श्रेष्ठ नर्तकी हो, और तुम्हें चाहिए कि तुम अपना अभ्यास शुरु करो. मैं तुम्हारे साथ हूँ. तुम्हारे लिए नया संगीत रचूगीं और तुम फ़िर से अपना खोया हुआ सम्मान पा सकोगी.” खट्टी ने क्षमा मांगते हुए अपनी बहन से कहा-“बहन तुम सच कह रही हो. मुझे अपने किए पर पछतावा हो रहा है. भविष्य में ऎसा कभी नहीं होगा.”

मिठ्ठी ने अपनी प्यारी बहन को गले से लगाते हुए कहा-“मुझे इस बात पर खुशी हुई कि तुमने अपनी गलती स्वीकार कर ली है.

3 blogger-facebook:

  1. सरहनीय प्रयास है तब जब हिन्दी में बाल साहित्य ना के बराबर है। एक सुझाव है।

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  2. किसी ने सही कहा है जो व्यक्ति जीवन में घमंड करता है उसे समय स्वम शिक्षा देता है .... शिक्षा प्रद कहानी ...

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