सोमवार, 28 जनवरी 2013

नीरा सिन्हा की कविता - अबला न रहे हम

अबला न रहे हम

अबला न रहे हम

ऐसी हो हमारी सशक्‍तीकरण

हत्‍या न हो हमारी भ्रूण अवस्‍था में

बदलाव ऐसी आए सामाजिक व्‍यवस्‍था में

मॉ-बाप पालने में न बना दे हमें कुपोषित

लड़के की तरह हमें पालने की हो कोशिश

मिलने चाहिए हमें भी समान सुअवसर

देने में सरकार सुअवसर न रखे कोई कसर

कार्यालयों में न हो हमसे छेड़छाड़

बॉस करें त्‍वरित न्‍याय आरोपी हो तड़ीपार

दहेज के लिए न हम जलाएं जाएं

क्रांति हो औ' समाज में ऐसा बदलाव आए

घरेलू हिंसा से घर में हो हम स्‍वतंत्र

तभी भारत में होगा सत्‍य में गणतंत्र

 

नीरा सिन्‍हा

गिरिडीह 815301 झारखंड़

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