मंगलवार, 15 जनवरी 2013

एस के पाण्डेय का व्यंग्य - सपने में सिलेंडर

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सपने में सिलेंडर

हिंदुस्तान में कई लोग हैं जो विदेश का भी सैर करते रहते हैं। विदेश में सैर करना सबके वश की बात तो है नहीं क्योंकि इसके लिए काफी पैसा होना चाहिए। जो सबके पास नहीं होता। कम से कम आम हिंदुस्तानी के पास नहीं होता। शायद इसलिए हमारे मन में विदेश भ्रमण की बात कभी नहीं आती। फिर भी हम एक दिन विदेश भ्रमण के लिए निकल पड़े। भले ही सपने में ही सही।

सैर के दौरान एक अमेरिकी से हमारी जान-पहचान या आज की भाषा में कहें तो दोस्ती हो गई। हम दोनों एक देश में पहुँचे। वहाँ एक आदमी ने उससे उसकी नागरिकता पूछी। अमेरिकन सुनकर उसे बड़े अदब से आगे का रास्ता दिखा दिया। जब हमारी बारी आई तो उसने जोर से एक चाटा जड़ दिया। विदेश में वो भी अकेले क्या करता ? वहाँ के एक अन्य व्यक्ति ने उससे कहा कि ये क्या किया। विदेशी है। वह बोला मालूम है। हिंदुस्तानी है जनाब। क्या करेगा ? दोस्ती का ही हाथ बढ़ाएगा। हम आगे बढ़े। अमेरिकी आगे खड़ा हँस रहा था। बोला डोंट माइंड। शांति बनाये रखना चाहिए।

अमेरिकी आगे बोला कि हम हिंदुस्तान के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। हम वहाँ के बारे में पढ़ते रहते हैं। हम पूरा हिंदुस्तान घूम चुके हैं। जो तुम्हारे नेता भी पूरे जीवन में नहीं कर पाते। जितना तुम लोग अपने नेता के बारे में नहीं जानते उससे अधिक हम जानते हैं। वे क्या कर रहे हैं। आगे क्या करेंगे हमें सब मालूम है। हमें मालूम है कि हिंदुस्तान बहुत ही शांति प्रिय देश है। तुम्हें सिर्फ शांति चाहिए। मरने के बाद भी तुम लोग शांति ही चाहते हो और आत्मा की शांति के लिए दुआ करते हो। जिसे आजीवन शांति से रहने नहीं देते मरने पर उसके लिए भी मौन रखकर शांति की कामना जरूर करते हो। तुम लोग पूजा-पाठ में भी ओम शांति: शांति: करते हो।

अमेरिका और हिंदुस्तान में अनेकानेक अंतर हैं। एक अंतर तो यही है कि हम लोग चाहते हैं कि दूसरे शांत रहे और तुम लोग सिर्फ शांति चाहते हो। दूसरे शांत हों या न हों। हमारे किसी नागरिक को कोई देश टेढ़ी नजर देख ले तो हम उस पर अटैक तक कर देते हैं। और तुम्हारे यहाँ तो सिर कलम करने पर भी शांति रहती है। जबकि क्रान्ति चाहिए। तुम लोग बाहर वालों का क्या करोगे। तुम्हारे देश में ही देश को तोड़ने वाले पल रहें हैं। पाले जा रहे हैं। जो देश तोड़ना चाहते हैं। बंटवारे की बात करते हैं। मार-काट की बात करते हैं। लेकिन तुम्हारी सरकार शांत रहती है। क्योंकि उन्हें सिर्फ शांति चाहिए।

हमारे यहाँ देश की सुरक्षा और अखंडता से कोई समझौता नहीं होता। हमारा रक्षा बजट सबसे अधिक होता है। हमारे यहाँ सेना प्रथम है। और तुम्हारे यहाँ नेता प्रथम है। हमारे यहाँ रक्षा बजट में कटौती नहीं की जाती। सेना की आवश्यक आवश्यकताओं से मुँह नहीं मोड़ा जाता। बजट की कमी की दुहाई नहीं दी जाती। तुम्हारे पड़ोसी दिनों-दिन सशक्त होते जा रहे हैं। और तुम्हारे नेताओं के कान में जूँ तक नहीं रेंगती। क्यों ? कहीं इनकी उनसे कोई साठ-गाँठ तो नहीं है ? नेता अपनी सुख-सुविधा बढ़ाते जाते हैं। बजट कम नहीं पड़ता। घोटाले के लिए बजट कम नहीं होगा। देश की सुरक्षा के लिए बजट कम पड़ जाएगा तो क्या होगा ? तुम्हारे यहाँ जो घोटाले हुए हैं उन पैसो को जब्त करके रक्षा मद में खर्च कर दिया जाय तो तुम्हारी सुरक्षा और मजबूत हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं होगा। कभी नहीं होगा। क्योंकि तुम लोगों को सिर्फ शांति चाहिए। कोई सीने पर चढ़ जाएगा तो भी कहना भाई हम तो शांति चाहते हैं।

हम अपने देश पर अटैक करने वाले आतंकियों को दूसरे देश में घुसकर मार गिराते हैं। और तुम लोग अपने देश में अटैक करने वाले आतंकियों को पकड़ पाने पर भी बड़े आराम से रखते हो। इससे हमारे देश पर दुबारा अटैक करने के लिए उन्हें सोचना पड़ता है। और तुम्हारे देश पर अटैक करने के लिए वे सोचते रहते हैं। क्योंकि उनके स्वागत-सत्कार में तुम लोग उन पर करोड़ो खर्च कर देते हो। भले ही उन्हें पकड़ने के अभियान में शहीद होने वाले परिवारों को तुम लोग फूटी-कौड़ी न दे सको।

हमने पढ़ा है कि हिंदुस्तान पहले सोने की चिड़ियाँ थी। लोग पहले कहकर बड़ी भूल करते हैं क्योंकि हिंदुस्तान आज भी सोने की चिड़ियाँ है। क्योंकि तुम लोग और तुम्हारे नेता सोते ही तो रहते हैं। क्या बता सकते हो कि पिछले पाँच सालों में तुम्हारे देश की सरकार ने देश हित में क्या-क्या किया है ? तुम लोग तो सोते रहते हो तुम्हें पता नहीं चलता कि सरकार क्या करती है या क्या कर रही है ? दरअसल वह कुछ नहीं करती क्योंकि वह भी सोती रहती है। इसलिए चाहे देश के अंदर कुछ हो या बाहर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सोया मोया एक होता है।

थोड़े समय के लिए सरकार जगती भी है तो उसे सिर्फ तीन चीज याद रहती है- डीजल, पेट्रोल और सिलेंडर। नेता आँख मींजते हुए जगे। बोले इनका दाम बढ़ाये हुए ज्यादा वक्त हो गया। चलो कुछ न कुछ बढ़ा देते हैं। नहीं तो जनता सोचेगी कि सरकार कुछ कर ही नहीं रही है। आखिर जनता को लगना चाहिए कि देश में सरकार है और वह कुछ कर रही है।

तब सहयोगी दल कहते हैं कि दो रूपये की जगह चार बढ़ा दो हमें कोई गम नहीं है। लेकिन हम विरोध प्रदर्शन जरूर करेंगे। कहेंगे रोल बैक करो। बुरा मत मानना। चाहे दो रुपया और बढ़ा देना।

तुम्हारे देश की जनता को तो इतना भी याद नहीं होगा कि पिछले पाँच वर्षों में इनके दाम कितने बार बढ़े हैं। यदि तुम लोगों को यही भूलने की बीमारी नहीं होती तो तुम्हारा देश भी आज एक सशक्त देश होता। क्योंकि तब तुम भी अपने नेताओं से पाँच साल का सही हिसाब लेते। अभी जग जाओ नहीं तो तुम्हारा देश नहीं बचेगा। क्योंकि तुम्हारे नेता अब सपने में भी डीजल, पेट्रोल और सिलेंडर के मूल्य बृद्धि पर ही मीटिंग करते रहते हैं। सोते-जागते बस मूल्य बृद्धि के बारे में ही सोचते हैं।

वह आगे बोला जानते नहीं हो आज क्या हुआ ? तुम्हारे प्रधानमंत्री आज रात में सपने में बड़बड़ा रहे थे-नहीं देंगे। नहीं देंगे। इतने में उनकी पत्नी दौड़ी हुई आईं और जगाकर बोलीं कि किसे क्या नहीं दोगे ? वे हड़बड़ा कर उठे। और बोले सपना देख रहा था कि देश की जनता आवास के बाहर प्रदर्शन कर रही है। और साल में बारह सिलेंडर माँग रही है। उसी के जवाब में मैं बोल रहा था- नहीं देंगे। नहीं देंगे।

इतने में हम भी जग गए। रसोई में गैस खत्म हो चुकी थी। सिलेंडर के इंतजाम का आदेश मिल रहा था।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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