रविवार, 10 फ़रवरी 2013

भावना तिवारी की 5 कविताएँ - अनुभूति, विद्रोह, अहंकार, संतुलन, विद्रोह

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1- अनुभूति ..

ईश्वर,

तुम्हारी अनुभूति 

होती तो है !

ये हवा,पहाड़,नदियाँ,
सागर गहरे ..
भोर चहकतीं चिड़ियाँ
ये चाँद ,सितारे ..
सूरज से हारे
अँधियारे ..
सब देते हैं
परिचय तेरा !!
न जाने क्यूँ
फिर भी मुझको
मेरी ही श्रद्धा
छलती है ..!
भक्ति खड़ी हो दूर
हाथ मलती है ..!!
अपाहिज हो गया
विश्वास ..
कैसे जुड़े आस .
इस धर्म ने तो
हर लिए हैं प्राण
आस्था के ..!

2-विद्रोह 

कोयल

अब ज़हर

उगलेंगीं ...

खूँटे से बँधी
गाय
तोड़ कर
बंधन भाग
निकलेंगीं !!
बंदिशें छोड़
उड़ने को हैं
आतुर ..ख्वाहिशें .. !
कारागार अब
नहीं स्वीकार !
अपने निजत्व ,
स्वच्छंद प्राणों पर ,
अपनी देह ,
अपने हाड़ों पर ..
आख़िर क़ब तक
सहूँ आधिकार
तुम्हारा ...!!
क्यूँ न तोड़ दूँ कारा ..!!

3-अहंकार

उसकी सत्ता से अभिमंत्रित 

निर्मित कण-कण
क्षण-क्षण,
दिवा-निशा के दोलन
सब विधिना के कारण .!!
दम्भी मन
क्यों नहीं मानता..
स्व के सम्मुख
कुछ नहीं जानता !!
त्रिकालदर्शी
लंकेश रावण..!
मिला धूल में,
अहंकार के कारण ..!!

4- संतुलन 

क्या हुआ जो ..
ज्ञान नहीं,
आरोहण-अवरोहण,स्वर का,
भान नहीं,
सांगीतिक घरानों का ../
राग-रागिनियों से
मैं अनजान हूँ ,
अस्तु गाता कंठ दुख
चुभते विधानों का /
आओ संतुलन साधें,
सुख-दुख के,
छंदों को गा लें ..//
बहुत थक गए पाँव,
ज़रा देर सुस्ता लें..//

5-विरोध-   

हम देख रहे हैं 

हम देखते रहेंगे ...

रोटियाँ ,सिंकतीं रहेंगीं ..!

वो खा रहे हैं ,

वो खाते रहेंगे .

जनता की 

बोटियाँ ,बंटती रहेंगीं ..!!

होशियार ..ख़बरदार   

आवाज़ मत बुलंद करो 

मुआवज़ा तैयार है ...!!

--

डॉ.भावना तिवारी कवि-सम्मेलनों की सुपरिचित सक्रिय कवयित्री हैं .!!

8 blogger-facebook:

  1. Bhawana ji sari kavitayen kafi achhi hain. 'virodh' kavita ki ye panktiyan kafi buland hain--
    '' aawaaz mat buland karo
    muwavza taiyaar hai.''
    Manoj 'Aajiz'

    उत्तर देंहटाएं
  2. अति सुन्दर रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  3. drishti aur chintan dono gahri lagi,kyabat hai.

    उत्तर देंहटाएं

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