संजय वर्मा "दृष्टि" की कविताएँ - बेटियाँ बचाओ

SHARE:

बेटियाँ बाबुल से आती चिट्ठी खुश होती रोती भी बाबुल की यादों को बाटती सुनाती सखी सहेलियों में । चिट्ठियों को संभाल कर रखती जाती बाबुल की जब ...

बेटियाँ
बाबुल से आती चिट्ठी
खुश होती रोती भी
बाबुल की यादों को बाटती
सुनाती सखी सहेलियों में ।
चिट्ठियों को संभाल कर रखती जाती
बाबुल की जब आती याद
तो पढ़ कर
संतोष कर लेती ।
डाकिया और चिट्ठी का होता था
हर पल इंतजार
वो भी एक जमाना था ।
अब ये भी एक जमाना है
जिनकी बेटियाँ है
बस उनके ही
बाबुल से आता है
फोन /मोबाईल पर लिखा
सन्देश ।
बाबुल भी क्या करे ?
बेटियां भ्रूण हत्याओं से हो गई
दुनिया में कम
इसलिए डाकिया /चिट्ठी और बाबुल
हो गए है अब गुमसुम ।
भ्रूण हत्याओं को
रोकना होगा ताकि बेटियां
डाकिया /चिट्ठी और बाबुल की
यादों को पा सके
और पा सके
हर बाबुल अपनी बिटियाँ का प्यार ।


=बिटियाँ बिना ..=

स्कूल की जब होती छुट्टी
ऐसा लगता मानों बगीचे में उड़ रही हो
रंग -बिरंगी तितलियां ।
तुतलाहट भरी मीठी बोली से
पुकारती अपने पापा को
पापा ...
इतनी सारी नन्ही रंग -बिरंगी तितलियों में
ढूंढने लग जाती पिता की आंखें ।
मिलने पर उठा लेते मुझको वे गोद में
तब ऐसा महसूस होता है
मानो दुनिया जीत ली हो
इस तरह रोज जीत लेते है मेरे पापा दुनिया ।
मेरी हर जिद को पूरी करते है पापा
मैं जिद्दी भी इतनी नहीं हूँ
किन्तु जब मैं रोती हूँ तो
पापा की आंखें रोती हैं ।
सच कहूँ ,यदि मैं नहीं होती तो
मेरे पापा क्या जी पाते मेरे बिना
सोचती हूँ बेटियाँ नहीं होती तो
उनके पापा कैसे जीते होंगे ?
बेटी के बिना ।

=बिटियाएँ ओझल  =
एक तारा टूटा
आसमां से
धरती पर आते ही
हो गया ओझल
ये वैसा ही लगा
जैसे गर्भ से
संसार में आने के पहले
हो जाती है
बिटियाँ ओझल ।
तारा स्वत:टूटता
इसमें किसी का दोष नहीं
मगर गर्भ में ही
कन्या भ्रूण तोड़ने पर
इन्सान होता ही है दोषी ।
भ्रूण हत्या होगी जब बंद
तो बिटियाएँ भी धरती पर से
हमें निहार पायेगी
चाँद -तारों सा नाम पाकर
संग जग को भी रोशन कर पायेगी ।
ये बात बाद में
समझ में आई
टूटा तारा
लाया था एक संदेशा -
भ्रूण हत्या रोकने का
उससे नहीं देखी गई
ऊपर से ये क्रूरता ।
वो अपने साथी तारों को भी
ये कह कर आया-
तुम भी एक -एक करके
मेरी तरह
भ्रूण हत्या रोकने का
संदेशा लेते आओ ।
कब तक नहीं रोकेंगे
क्रूर इन्सान भ्रूण हत्याएं
संदेशा पहुँचे या न पहुँचे
पर रोकने हेतु ये हमारा
आत्मदाह है
हमारा बलिदान है
देखना है हमें ये कब काम आयेगा ।

=सुनो बात हमारी=
भ्रूण हत्या करने वालों
सुनो जरा बात हमारी
देखो ऊपर नर्क है
होगी वही गति तुम्हारी ।
लालच करके स्नेह को
खो चुके हो तुम
लड़के के लिए लड़की
मांगने पर तब लगोगे भिखारी ।
पीढ़ियों की सीढियों को
लालच में यूँ न उखाड़ो
निर्दोष माएं भ्रूण हत्या से
हो जाएगी दुखियारी ।
याद रखना जरा
बेटियों को मारने वालों
देख रहे है तुम्हें
सजा देने के लिए उपर वाले ।
नर्क में मिलेगी जगह
जो है ये कृत्य करने वालों
होश में आकर संभल जाओ
बेटे की लालच में बहकने वालों ।
बहना न होगी तो
बहती रहेगी आँखें तुम्हारी
हाथ करेंगे अफ़सोस
कहेंगे सुनो वेदना हमारी ।
ये सही है बेटियां भी
वंश को चलाती
जिन्दगी में ये ही तो है
जो खुशियों झोलियां में भर जाती ।
भ्रूण हत्या पर रोक लगे
ये ही है गुहार अब हमारी
खिलखिलाती रहे बिटियाएं
ये ही अरज है अब हमारी ।

=बेटी बचाओ  =
बिदाई में भीगती है आँखें
बेटी हुई तब ख़ुशी से झरते आँसू
साँझ के पंछी की तरह लोट आते है आंसू
जब भ्रूण-हत्या हो तब फिर से गिरते आंसू ।
माँ किस -किस से करे गुहार
पीडायें मन की उभर के आई
मुस्कराहट भी डरने लगी क्रूर लोगों से
कब लगेगा अंकुश ये माँ सोचती आई ।
बिटियाँ आ सकेगी दुनिया में
बिछाए रखे थे माँ ने पलक -पाँवड़े ये सोच कर
रो -रो कर बताती रही आँखें दुनिया को
क्या दुनिया में बेटियों का जनना है दुष्कर।
अगर ऐसा ही है तो बेटियों के बिना
इन्सान दुनिया में महज पत्थर बन रह जायेगा
कोई नहीं होगा रिश्तों की दुनिया में
आँखों में बिन नमी के इन्सान किस से नेह पायेगा ।
अंगना सूने किस को ये पीर बताएँगे
गवाह होंगे बस आँखों के आंसू
माँ ओ की सुनी गोद बताएँगे
लेंगे संकल्प तब ही बेटियों को बचा पाएंगे ।

बेटी दोहरा रही है
=========================
माँ
अपनी आँखों से
काजल उतार कर
मेरे माथे पर
टिका लगाती|
मेरे होंठों पर लगे दूध को
अपने आँचल से पोंछती
होठों से प्यार की चुम्बन
देती माथे पर
शुभ आशीष की तरह |
फिर भी माँ के मन मे
नजर ना लग जाए कहीं
भय समय रहता |
भले ही माँ भूखी हो
मुझे आई तृप्ति की डकार से
माँ संतुष्ट हो जाती |
आईने में
संवारने लगी हूँ खुद को
क्योंकि मैं बड़ी जो हो गई |
पिया के घर
माँ की दी हुई पेटी
जब खोलकर देखती हूँ
उसमे रखे मेरे बचपन के अरमान
जिसे संजो के रखे थे मैंने गुड्डे -गुडिया
कनेर के पांचे और खाना बनाने के खिलौने |
इन्हें पाकर मन संतुष्ट
लेकिन आँखें नम
आज माँ नहीं है
इस दुनिया में |
अपनी बेटी के लिए
आज वही दोहरा रही हूँ
जो सीखा -संभाला था
अपनी माँ से मैंने कभी |

_दायित्व _

बकरी चराने गई बिटिया को
जरा सी देरी हो जाने पर
पढ़ने जाने की फिक्र को लिए
माँ पुकार रही बिटियाँ को ।
आवाज पहाड़ों से टकराकर
गुंजायमान हो रही
नदी भी ऐसे लग रही
मानो वो भी बिटियाँ को
ढूंढ़ने में  बहते हुए
अपना दायित्व निभा रही हो ।
शिक्षा से ही बिटियाँ ने पा लिया
एक दिन बड़ा ओहदा
माँ की याद आने पर
आज बिटियाँ ने पहाड़ों पर से
पुकारा  जब अपनी माँ को ।
तब पहाड़ हो चुके  थे मौन
नदी भी हो चुकी थी सूखी
बकरियां भी हो गई गुम ।
सूना लगने लगा घर ।
क्योंकि इस दुनिया में नहीं है माँ
बिटियाँ को शिक्षा का दायित्व
देते हुए देखा था
इसलिए ये सभी मौन होकर
दे रहे है माँ को श्रन्दांजलि ।

बेटी बचाओ
हंसने रोने के भाव को जग ने सीखा बेटियों से
घर को कैसे सजाया जाता सीखा बेटियों से
रंगोलियो के रंग कैसे सजाने सीखा बेटियों से
मिश्री से मीठे बोल कैसे बोलना सीखा बेटियों से
रिश्तों की परिभाषा को समाजों ने सीखा बेटियों से
पवित्र धागों के बंधन के महत्व को सीखा बेटियों से
हौसला धारण कर लक्ष्य को पाना सीखा बेटियों से
देश-विदेश में नाम कैसे रोशन करना सीखा बेटियों से
संस्कृति की पहचान कैसे करना सीखा बेटियों से
बड़ों का सम्मान कैसे करना सीखा बेटियों से
जब सब कुछ  हमने सीखा है लाडली बेटियों से
तो "बेटी बचाना" होगा तभी कुछ सीख पायेंगे बेटियों से ।

भ्रूण हत्या रोकें

****************

होता था बिटिया से

घर आँगन उजियारा

मौत पंख लगा के आई

कर गई सब जग अंधियारा

         *

मन ही मन बातें करते

मन ढाढस बंधाता है

ढूंढें कहाँ यादें उसकी

कोई नहीं याद दिलाता है

          *

लोग लिंग अनुपात

बिगाड़ने में लगे हैं

लड़की ढूंढने में वो

दुनिया के चक्कर लगाने लगे हैं

          *

क्रूर इन्सान भ्रूण हत्या

करने जब लगा है

रोकने हेतु  कानून भी

अब कुछ सोचने लगा है

         *

बेटियों के न होने की बातें

क्यों नहीं समझ पाते है

इसलिए तो भाइयों को

हम हर घर में उदास पाते हैं

         *

हक बेटी का भी होता है

क्यों करते है भ्रूण हत्याएं

रोकेंगे मिलकर जब इसे

तभी रोशन होगी रिश्तों की बगियाएं

 

******अनुशासन*******

कोहरे मे लिपटे

वृक्ष /पहाड़ कितने हसीं लगते हैं

जैसे प्रकृति ने

चादर ओढ़ली हो

सुबह की ठण्ड से |

इन पर पड़ी ओंस की बूंदों से

खुल जाती है इनकी नींद

साथ ही सूरज के उदय होते

ऐसा लगता है मानों

घर का कोई बड़ा बुजुर्ग

अपने बच्चों को जैसे उठा रहा हो |

तब ऐसा महसूस होता है की

प्रकृति भी सिखाती है

सही तरीके से जीने के लिये

प्यार भरा अनुशासन |

 

=जुगनू =
जुगनू ढूंढता

रोशनियों के घरौंदों में

जगमगाते गांव -शहर के दीपों में

अपने रिश्ते|

जुगनू जो खुद ही

रोशनी नहीं जानता

कितनी है |

रोशनियों की भीड़ में

उसकी क़द्र कौन करेगा

भीड़ भरी दुनिया में

अलग पहचान कैसे बनायेगा |

शायद वह जान गया

रोशनियों की चकाचौंध में

उसकी बखत नहीं |

अंधेरों को चीरते

उड़ान की हिम्मत ने

अंधेरों में हजारों

लोगों की आंखों को

दिखा दिया अपनी

रोशनी का रूप और

नन्हे हौसलों ने दिखाया

अपना दम |

तभी आवाजें आई

वो रहा जुगनू |

.....

संजय वर्मा "दृष्टि "
125 ,शहीद भगत सिंग मार्ग
मनावर जिला - धार (म प्र )  

COMMENTS

BLOGGER: 4
  1. आपकी रचनायें पढ़ते हुए दिल भर आया। मेरी बेटी इस समय स्कूल गयी है। आपने उसकी याद दिला दी।
    बहुत सुन्दर भाव!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. shri brajeshji namaskar, dhanaywad jinki beti hai vohi iska dard samjh sakta hai

      हटाएं
  2. betiyo par aapne jo anek rachnaye likhi hai bah kai drishya upsthit kari hai ,ab chithiyo ka chalan kaha raha

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. shri kamlesh kumar diwanji ,namaskar, dhanywad ye sahi hai ki chiththiyo ka chalan kam huva kintu patra lekhan se aksharo ki sundarta avm vicharo ki kalpana shakti bhi gum ho gai hai isliye "vyakaran" kya hota hai ye bhi ak din gum ho jayega.

      हटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4288,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3239,कहानी,2360,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,1,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: संजय वर्मा "दृष्टि" की कविताएँ - बेटियाँ बचाओ
संजय वर्मा "दृष्टि" की कविताएँ - बेटियाँ बचाओ
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/02/blog-post_2752.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/02/blog-post_2752.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content