मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

कामिनी कामायनी की चार कविताएँ

1


कुछ तो बताना होगा ।
वो  फरिश्ता ही नहीं था, जान  कर हैरान थी ,
 क्यों मैंने जिंदगी का डोर उसको दे दिया ।
ऐसे किस्से से भरे हैं डायरी के पेज सब
वक्त ने गुमराह करने का बहाना था किया  ।
उसकी बातों मे थी जादू ,तेज थी नजरों मे कुछ ,
 वो था आपर  कमजोर बंदा ,वीर किसने कह दिया ।
खींचनी है जब लकीरें आसमान धरती के बीच
कुछ नहीं आता नजर है वक्त क्यों जाया  किया ।
उलफतों से है भरी अब आंधियाँ संसार की ,
जी मे जिसके जो भी आया ,रास्ता कहता गया ।
कौन अब परदेश मेँ बाँहों मेँ उसको थाम ले   ,
जो भी उसके पास था वो दर्द देकर ही गया ।
सर्द रातों को हमने   देखा जो  इतने  करीब
बर्फ की खूंखार दांते ,दिल हमारा दहला गया ।

   2
ये भी क्या अहदे  वफा है , नुक्स पर रखते नजर ,
खुद मुकम्मल वे भी नहीं पर बदगुमानी देखिए ।
हैं बड़े मख़मूर वो ,आरजू है उनकी  जीस्त की ,
राजदा पर किस कदर ,ढाते कहर वो देखिए ।
आबोदाना छीन सबसे ,हैं जफा ढाने को अब
खैरात मेँ बंदूक देते ,मेहरबानी देखिए ।
मुफ़लिसों को बंद कर  कफ़स की  चाबी फेंक दी
आखिरी शब रोज रोते , कारदानी देखिए ।
इमदाद को उठी न हाथे,रे  दिल हमेशा बंदथा
जो रहा था कल का मालिक आज क्या है देखिए ।
तब तकाजा भी न सुनते चलते थे संगीन चाल ,
पैराहन असीर जैसा ,आज कैसा देखिए ।
कुदरती चालों का उनको कुछ नहीं कोई इल्म था
ख़ार मे कैसे उलझ कर,दिलशिकन गम देखिए ।

 3
इन बहारों से कहेंगे चल बसें किसी और देश ,
इश्क के दरिया में डूबें ,प्यार के गीत गाएँगे ।
अब तसव्वर में ही अपना मंज़िले मकसूद है ,
आओ माझी पास मेरे ,हम तुझे अपनाएँगे ।
शेखे वाइज़ से कहे कोई छोड़ दे रस्ता मेरा ,
खैरियत की अपनी दुनिया आप ही हम पाएंगे ।
बेमुरब्बत लोग सब मशरुफ़ अपने आप में ,
या इलाही क्या पता ,ये कहाँ तक जाएंगे ।

     4
खुद के सीने पर गोली  लगी  तो लगी   कैसे
 तुमको हर हाल मे ये हाल  बताना  होगा ।
चंदरोजा क्यों बहारों मे जर्द सा छाया
फिजाँ को इसका सबब कुछ तो बताना होगा ।
गमे उलफत से भरी है दुनिया अपनी
फिर भी हर रस्म को इक रस्म सा निभाना होगा ।
कश्ती डूबी थी जहां आब का निशान नहीं ,
शिकश्ता ना व को साहिल पर तो लाना होगा ।
तरक्की करने वाले हर बात पर कहते है यही
मसर्रत चाहते हो तो खुद को मिटाना होगा ।
नाशाद अब न रहो लोग हसेंगे तुम पर
ख़िज़ाँ के पेड़ को राजदा से छिपाना होगा ।
     

कामिनी कामायनी



















































6 blogger-facebook:

  1. कामिनी कामायनी ji Bahut Bahut Achhi Rachana lagi,
    kuch ye Pnktiya to ....

    ये भी क्या अहदे वफा है , नुक्स पर रखते नजर ,

    खुद मुकम्मल वे भी नहीं पर बदगुमानी देखिए ।

    ----
    कौन अब परदेश मेँ बाँहों मेँ उसको थामे ,

    जो भी उसके पास था वो दर्द देकर ही गया ।


    Umesh Maurya

    उत्तर देंहटाएं
  2. कामिनी कामायनी ji, AApki Rachna Bahut acchi lagi viseshkar ye panktiya ......

    ये भी क्या अहदे वफा है , नुक्स पर रखते नजर ,

    खुद मुकम्मल वे भी नहीं पर बदगुमानी देखिए ।
    ........
    कौन अब परदेश मेँ बाँहों मेँ उसको थामे ,

    जो भी उसके पास था वो दर्द देकर ही गया ।
    umesh maurya

    उत्तर देंहटाएं

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