सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

घनश्याम दोशी की कविता - माँ

मेरा जीवन है माँ ,मेरा अस्तित्व है माँ,मेरा भविष्य है माँ,

मेरा सपना है माँ,मेरी ममता है माँ ,मेरा प्यार है माँ। 

मेरा दुलार है माँ,मेरा लाड है माँ,मेरा विश्वास है माँ,

मेरी आबरु है माँ , मेरी शान है माँ मेरी वाणी है माँ।  

मेरी संजीवनी है माँ, मेरी कविता है माँ, मेरी गीतिका है माँ, 

मेरी जन्मदात्री है माँ, मेरी संसकारदात्री है माँ, मेरा लावण्य है माँ।  

मेरा गौरव है माँ, मानवता का अस्तित्व है माँ, मेरी मुस्कान है माँ, 

मेरी पहचान है माँ, धीर गंभीर है माँ, मेरा धैर्य है माँ। 

सहिष्णुता की मिसाल है माँ,मेरी तकदीर है माँ, मेरा आत्मविश्वास है माँ, 

मेरी इज्जत है माँ, मेरा उत्साह है माँ, मेरा अनुशासन है माँ, 

मेरा नियम है माँ, मेरा प्रयास है माँ, पहला आभास है माँ, 

मेरी ईमानदारी है माँ, मेरा वैभव है माँ, मेरी प्रेरणा है माँ, 

मेरा तीर्थ है माँ,  मेरा धर्म है माँ, मेरा कर्म है माँ। 

मेरी तारनहार है माँ,मेरी गुरु है माँ, मेरी पाठशाला है माँ, 

मेरा अभिनंदन है माँ, मेरा आभार है माँ। 

संकटमोचन है माँ, मेरी भगवान है माँ, 

मेरी आस्था है माँ, मेरा वास्ता है माँ। 

मेरी विद्या है माँ, मेरा अभ्यास है माँ, मेरी राह है माँ

मेरी करुणा है माँ, मेरा गुलशन है माँ, मानवता की मसीहा है माँ।  

मेरी जीवनयात्रा है माँ, मेरा वक्त है माँ, मेरा विकास है माँ, 

मेरी प्रगति है माँ, मेरा आधार है माँ, मेरा सहारा है माँ, 

मेरी गणित है माँ, मेरा इतिहास है माँ, मेरा भविष्य है माँ। 

मानवता की देवी है माँ, मेरी दास्तां है माँ, 

मेरी दोस्त है माँ, मेरी हमदम है माँ, मेरी शिक्षक है माँ, 

मेरी मंज़िल है माँ, मेरा लक्ष्य है माँ, मेरी किस्मत है माँ। 

मेरी भावना है माँ, मेरी मीत है माँ,मेरी शुभचिंतक है माँ, 

मेरी पथप्रदर्शक है माँ,मेरा जोश है माँ, मेरा होश है माँ, 

मेरा सम्मान है माँ, मेरी वीरता है माँ, मेरा स्वाभिमान है माँ। 

मेरा सर्वस्व है माँ, मेरा सर्वस्व है माँ। 

अपनी माँ के सपूतों सुन लेना- माँ से बढ़कर दुनिया में कोई नहीं है।

कुछ भी कर लो सब व्यर्थ है- माँ और सिर्फ माँ सही है। 

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------