मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

मीनाक्षी भालेराव का फ़िल्मी आइटम सांग

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आईटम सांग

दुनाली

दुनाली में नाल डाल ले और

मेरा शिकार कर ले

तू मुझे लाल-लाल कर दे

दिखादे तू दुनाली का कमाल

मुझ को हलाल कर दे

दू-------------------------------

लगाले तू अपना निशाना

देखेगा सारा जमाना

शिकारी ने कैसा शिकार मारा

धोस तू सब पर जमाना

दू------------------------------

हाथों मे जकड़ ले बंदूक को पकड़ ले

सीधी-सधी रखना

ना घुमाना, झुकाना न करना टेडी-मेढ़ी

धीरे-धीरे चलाना \

दू-----------------------------------

--

 

कमरा

कमरा सूं फोटो खिंचली

में छोरी भोली भाली

ओ दरी ओ दारी

लुगड़ा रो पल्लो उड़ गयो

कांचली रो फ़ितो खूल ग्यो

ओ दारी ओदारि

के---------------------------

घूरन लाग्या छोरा-छापरा

देखन लाग्यो जग सारो

में सीधी-सीधी सोगी

लाज के मारे रे

ओ दारी ओदारि

के---------------------------

चालन लाग्यो बायरो

उडन लाग्यो घाघरो

हाथा में म्हार

भर ले ली घाघर

ओ दारी ओदारि

के------------------------

9 blogger-facebook:

  1. क्या कहूँ ? बस कह नहीं रहा हूँ, आप स्वयं समझ लें । आप क्या सिद्ध करना चाहती है ? यह क्या साहित्यिक है ???

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    1. dr.mohsin khan10:21 am




      आज भी पुरुष जो करता है वाही सही है मुझे लगता है आप उसी मानसिकता को मानते हैं

      और अगर महिला ने कुछ ईसा लिख दिया तो खराब है जब फिल्मों में आत्म सोंग चलते हैं

      तो आप लोग ही सीटियाँ बजाते है और आनन्द लेते हैं महिलाएं नही सीटियाँ बजाती और अगर आप शाहित्य की बात

      करते हैं तो रचनाकार मेन छपे बाकी साहित्य को तो आप ने कभी नहीं सराहा आप जो मुझ पर अंगुली उठा रहे हैं

      ये आप की छोटी सोच है और में आप से कोई बहस मे नही पड़ना चाहती

      हटाएं
    2. dr.mohsin khan10:33 am

      आप से कमेन्ट माँगा किस ने ?

      आज भी पुरुष जो करता है वाही सही है मुझे लगता है आप उसी मानसिकता को मानते हैं

      और अगर महिला ने कुछ ऎसा लिख दिया तो खराब है जब फिल्मों में आईटम सोंग चलते हैं

      तो आप लोग ही सीटियाँ बजाते है और आनन्द लेते हैं महिलाएं नही सीटियाँ बजाती और अगर आप साहित्य की बात

      करते हैं तो रचनाकार में छपे बाकी साहित्य को तो आप ने कभी नहीं सराहा आप जो मुझ पर अंगुली उठा रहे हैं

      ये आप की छोटी सोच है और में आप से कोई बहस मे नही पड़ना चाहती

      मैंने यह भी लिखा है के सरहदों को तोपों से बाटने वालों

      उन से कुछ सीखो जो शब्दों कसे सरहदों को जोड़ते हैं

      हटाएं
    3. बेनामी10:03 am

      I think issue is not of the article written by man or woman, but is should have ethical values of our culture. You may right saying that such song (or even I would like to say worser this) are using in films but those do not have good values. We being a citizen of India should take care of our ethics. You are right that everything happening in our life/ or surrounding world, but we do not speak or write as it is. The presentation should by proper to avoid the evilness. It could be opinion difference but we should always accept the critics before appreciation. Appreciations tell us, our present potential but critics show new ways for improvement in future. All these are my personal views you need not to accept.

      हटाएं
    4. meenakshibhalerao1:23 pm

      बेनाम जी मेँ यहाँ आप से कुछ पूछना चाहूंगी क्या आप को पता है दुनाली किसे कहते हैं

      दुनाली बंदूक को कहते हैं और नाल जिस से बंदूक साफ़ कर के चलाई जाती है और जोभी

      गीत मे है वह अगर दोहरा अर्थ निकलता है तो यह सब की अपनी अपनी मानसिकता है

      और दुसरा गीत केमरे से मेरी फोटो खीच ली क्या बुरा है जब चोली के निचे क्या है चोली के

      अंदर क्या हैदुनिया सरा सकती है तो इतनी सी बात पर इतना बबला क्यों

      आप लोगो को अजीस बात पर विरोध करना चाहिए उस पर तो नजर नही जाती आसाराम जैसे

      सन्यासी बनाम शेतानी मानसिकता के व्यक्ति ने जब दामनी के रेप को लेकर

      ब्यान वाजी दी थी ऎसि घटनाओं पर तुम्हारा ध्यान नहीं जाता क्यों की वो कमेन्ट एक पुरुष ने दिया था

      इस लिए आप सोचिये जरा !

      हटाएं
    5. बेनामी9:55 am

      धन्यवाद, तथा सॉरी , लेकिन आप अभी भी मै ओर दूसरे कमेन्ट करने वाले क्या कहना चाहते है नहीं समझ पायी| अब मै इसको आपकी मानसिकता कहू तो क्या यह विषय वस्तु बदल जायेगी| आपने जिस गाने का जिक्र किया अगर में उसको सही साबित करने के किये कहूँ की गाने की अगली लाईन “चोली के पीछे दिल है मेरा...” तो इसमें क्या बुरा है ? क्या ये तर्क सही है ?, आपने ये कैसे मान लिया की मैंने ओर दूसरे लोगो ने पुरूषों के द्वारा दिये गये गलत बयानों की निंदा नहीं की ? क्या सब आपको बता कर निंदा या सराहना करेगे ? और आपने ये कैसे तय किया की मै एक पुरूष हूँ या महिला ? क्या एक महिला इसको सही ठहराती ? रही बात कविता में इस्तेमाल किये हुए शब्दों (बन्दुक, दुन्नाली, नाल, लुगडो, घाघरो इति आदि) की तो में कोई बुराई नहीं है तथा मै समझता हूँ की आप की तरह बाकी सभी लोग भी इनका अर्थ समझते है लेकिन उन्होंने ऐसी टिपण्णी क्यों की और आपको सफाई क्यों देनी पड़ रही है ये आप भी जानती है | मैने आपकी दूसरी रचनाये भी पढ़ी है और सराहा भी है लेकिन इसको नहीं सराहा जा सकता है| रही बात सोचने की तो क्या दूसरों ने गलत किया कहकर मै अपनी गलती को सही साबित कर सकता हूँ ? अब आप सोचिये और बताइए मै आपके विचार जानना चाहूँगा |

      हटाएं
  2. To give any comment will be an insult the comments.

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  3. dr.mohsin khan10:33 am

    आप से कमेन्ट माँगा किस ने ?

    आज भी पुरुष जो करता है वाही सही है मुझे लगता है आप उसी मानसिकता को मानते हैं

    और अगर महिला ने कुछ ऎसा लिख दिया तो खराब है जब फिल्मों में आईटम सोंग चलते हैं

    तो आप लोग ही सीटियाँ बजाते है और आनन्द लेते हैं महिलाएं नही सीटियाँ बजाती और अगर आप साहित्य की बात

    करते हैं तो रचनाकार में छपे बाकी साहित्य को तो आप ने कभी नहीं सराहा आप जो मुझ पर अंगुली उठा रहे हैं

    ये आप की छोटी सोच है और में आप से कोई बहस मे नही पड़ना चाहती

    मैंने यह भी लिखा है के सरहदों को तोपों से बाटने वालों

    उन से कुछ सीखो जो शब्दों कसे सरहदों को जोड़ते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बडा चुतियापा है ये गीत। पता नहीं लेखिका क्या साबित करना चाहती है। लिखने से पहले सोच लिया होता तो शायद यह सब वाहियात नहीं लिखती। मस्तराम का असर लेखिका पर लगता है ।

    उत्तर देंहटाएं

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