शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

कामिनी कामायनी की कविता - जोर की आँधी


ज़ोर की आँधी ।
     आवाज उठी थी तो बहुत ज़ोर से /
       मगर क्यों ?पूछने पर बहुतों ने /
      बहुतों को /बहुत सी बातें बताई /
      मगर वो नहीं बताया /जिसके वजह से/
      इतनी तेजी से /वह बात उठी थी /
      पहले लगा था /मामला कुछ नहीं/बहुत   गंभीर है /
      लोगों के मस्तिष्क से घने वाष्प की तरह/
      निकलते हुए विचार /स्पष्ट दे खा गया था /
      ये घने वाष्प भीषण बादल बनाने वाले भी थे /
      मगर उसी वक्त /तीव्र हवा चल गई थी /
     और वे बातें इधर उधर खो कर /
      अपना वजूद ही खो बैठे । 

        2
    बड़े दर्द सहे /
   हवा /पालों के /
  मार सहे /
  चुपचाप /पड़े/ मंद मंद डोलने वाले /
  हरे भरे / स्वस्थ वे/
  उन आतंकियो के भय से/
  पीले पड़ते चले गए थे /
  और एक दिन /
शरद ने जब /
अपना दामन समेटा /
सबने देखा/
पेड़/
नंगे खड़े थे । 

3
तुम्हारा कुछ /
था उधार मुझ पर /
आई थी लौटने वही /
चौखट  तक तुम्हारे /
दरवाजा खुला था /
मौसम बेखौफ /
चली गई थी /
खुले दरवाजों से बहुत अंदर तक/
सब कुछ तो सहज था/
सुखद भी /
भूल गई मै/
क्या करने आई थी यहाँ ?
जा रही हूँ मैं /
बहुत चीज तुम्हारा /
फिर से उधार लेकर । 

   4
कहानिया फिर से /
गढ़ने लगा है मौसम /
रंगोली रची है चारों ओर /
हवा मे भी गर्माहट सी /
है थोड़ी /परिंदे एकदम आजाद /
तितलिओ के तो /
नए नए पर लग गए मानो /
सूरज को /
बहुत मान /दुलार करके /
बुलाया है /धरती ने अपने करीब /
जानती है खूब /
स्वभाव को वह उसके  /
कितने  दिन /रहेगा खुश ?
कितने दिन /
देगा सुकून /
तड़पाएगा तो फिर /
कभी दूर जाकर /
कभी/
बहुत पास आकर /
क्या करे मगर /
जी भी तो नहीं सकती /
वगैर उसके /
कौन देगा भास्कर को /
उसकी ज्यादती की सजा ?

5
ग्रहों का अद्भुत संयोग था /
या उनकी छापामारी /
निकल आए थे /
एक से एक /
दुर्लभ नगीने /
देश के विविध कोने /
कन्दराओं से /
आश्चर्य जनक  जटाजूट /
अभूत् पूर्व भाव लिए /
सज गया था पवित्र नदी का /
वह विस्तृत पैतालीस किलो मीटर का क्षेत्र /
ठंढ को ठंढ ने फटकारा /
जय घोष करता मानवीय उत्साह /
नृत्य करती आस्थाएँ / मदमाती  भक्ति /
धूप मे सूखते /
 रंग बिरंगे परिधान /
   धूप /अगरबत्ती के  धुएँ /
शंखों /घंटियो की ध्वनि /
मंत्रोच्चारण /उँगलियों पर गिनते हरीनाम /
जगह जगह भंडारे /
भाति भाति के पुण्य कमाने के बहाने /
सचमुच निहाल है माता /
उसके करोड़ो करोड़ पुत्र /
काश/ हर लेते वे भी /
उसकी गहराती दुख /
सुख गई अगर वह /
कहाँ लगेगा फिर कुम्भ ?

7 blogger-facebook:

  1. बहुत सुन्दर!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut achchhi kavitayen hai, vishesh kar KUMBH,कहाँ लगेगा फिर कुम्भ ?sach me sochniiy hai.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्‍दर...दीपा श्रीया भटनागर

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्‍दर कामिनी

    उत्तर देंहटाएं

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