मनोज 'आजिज़' की वासंती कविता - आओ ऋतुराज

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आओ ऋतुराज 

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             -- मनोज 'आजिज़'

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग 

भर दो प्रमोद जीवन में और मतवाली तरंग 

बहे समीर, सलिल आनंद का चारों ओर 

हो चेतन में नवसृजन का नव उमंग 

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग।

मन विह्वल, भाव प्रांजल मिल जाये गति स्नेह को 

स्नेहिल हो सब परस्पर अभिमान न हो देह को 

कंटक माल्य से स्वागत अगर हो जीवन पथ पर 

फिर भी सतता से कभी न हो मोह भंग 

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग।

अधीर भी धीर तुम संग जैसा कि पवन 

कर जाओ हृद-मस्तिष्क में नवगुण रोपण

नवाधार बने जीवन का यह संकल्प हो स्थिर 

जीवन पुष्प भी खिले लिए अशेष रंग 

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग।

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पता- जमशेदपुर  

       झारखण्ड 

 

मेल- mkp4ujsr@gmail.com

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2 टिप्पणियाँ "मनोज 'आजिज़' की वासंती कविता - आओ ऋतुराज"

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