बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

मनोज 'आजिज़' की वासंती कविता - आओ ऋतुराज

आओ ऋतुराज 

--------------------

             -- मनोज 'आजिज़'

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग 

भर दो प्रमोद जीवन में और मतवाली तरंग 

बहे समीर, सलिल आनंद का चारों ओर 

हो चेतन में नवसृजन का नव उमंग 

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग।

मन विह्वल, भाव प्रांजल मिल जाये गति स्नेह को 

स्नेहिल हो सब परस्पर अभिमान न हो देह को 

कंटक माल्य से स्वागत अगर हो जीवन पथ पर 

फिर भी सतता से कभी न हो मोह भंग 

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग।

अधीर भी धीर तुम संग जैसा कि पवन 

कर जाओ हृद-मस्तिष्क में नवगुण रोपण

नवाधार बने जीवन का यह संकल्प हो स्थिर 

जीवन पुष्प भी खिले लिए अशेष रंग 

आओ ऋतुराज बसंत लिए हरियाली संग।

--

पता- जमशेदपुर  

       झारखण्ड 

 

मेल- mkp4ujsr@gmail.com

2 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------