रविवार, 31 मार्च 2013

विजय गुप्त की कविताएँ

1. एक बूंद एक बूंद में सागर के तूफान छिपे हैं , एक बीज में धारा के असंख्य उद्यान छिपे हैं । एक कण में अथाह शक्ति  है व्याप्त , एक स्वर में...

पूरन सरमा का व्यंग्य - मुझसे भला न कोय

व्‍यंग्‍य मुझसे भला न कोय पूरन सरमा हो सकता है दुनिया में और भी भले लोग हों, लेकिन मैंने इसे खोजने की आवश्‍यकता नहीं समझी। मुझे प्रारम्‍...

राजीव आनंद का आलेख - मनोरंजन व्‍यापारी : हिन्‍दी भाषियों द्वारा अवहेलना का शिकार

(मनोरंजन व्यापारी) म्‍नोरंजन व्‍यापारी एक रिक्‍शा चालक जो कोलकाता की सड़कों पर रिक्‍शा खिंचते हुए या फिर कहीं रिक्‍शे पर बैठे किसी साहित्‍य...

पुस्तक समीक्षा - ‘गुड़िया' को देखते हिंदी साहित्‍य का भविष्‍य

‘ गुड़िया ' को देखते हिंदी साहित्‍य का भविष्‍य डॉ. विजय शिंदे परिवर्तन जीवंतता का प्रतीक है। साहित्‍य की विभिन्‍न विधाओं में परिवर्तन ...

चंद्रेश कुमार छतलानी की कहानी - आत्मा का वस्त्र

  आत्मा का वस्त्र “अमोदा, तुमसे दूर नहीं रह सकता । ओ..... तुमने क्यों किया ऐसा? मेरे लिए जीने से आवश्यक तुम हो । और अगर तुम मेरे जीवन में...

सुरेन्‍द्र अग्‍निहोत्री, मुरसलीन साकी, नीरा सिन्‍हा, सुधीर कुमार सोनी, उमेश मौर्य, विजय वर्मा की रचनाएँ

  सुरेन्द्र अग्निहोत्री सब्र खोने का वक्‍त आ गया है कुल जमा तस्‍वीर धुंधली है कहने का लब्‍बोलुबाब यही है देश फेल हो रहा है? देश के अन्‍दर...

नन्दलाल भारती की कहानी - श्रमवीर

डाँ.नन्दलाल भारती एम.ए. । समाजशास्त्र। एल.एल.बी. । आनर्स । पी.जी.डिप्लोमा-एच.आर.डी. । । श्रमवीर। । खेवसीपुर वाली महन्थ नानी कहने को तो अन...

प्रभुदयाल श्रीवास्तव के दो बाल गीत - सूरज भैया, सात रोजाना

सूरज भैया               अम्मा बोली सूरज भैया जल्दी से उठ जाओ।               धरती के सब लोग सो रहे जाकर उन्हें उठाओ।।                  मुर्...

शनिवार, 30 मार्च 2013

अली सरदार जाफ़री के ड्रामाई नज़्मों की किताब 'नयी दुनिया को सलाम' से मुहब्बत भरे कुछ नज़्में

धुंधली तस्वीर (अँधेरे से दो शक्लें उभरती हैं- जावेद दूल्हा बना हुआ और मरियम दुल्हन) । निहाँ अब्र में १ चाँद कब तक रहेगा भला इश्क से हुस्न क...

शुक्रवार, 29 मार्च 2013

भीष्‍म साहनी की कहानी : गंगो का जाया

भीष्‍म साहनी गंगो का जाया गंगो की जब नौकरी छूटी तो बरसात का पहला छींटा पड़ रहा था। पिछले तीन दिन से गहरे नीले बादलों के पुन्‍ज आकाश में करव...

मन्‍नू भण्‍डारी से ज्‍योति चावला की बातचीत : हिन्‍दी साहित्‍य में स्‍त्री-विमर्श का श्रेय राजेन्‍द्र को मिलने का तो प्रश्‍न ही नहीं उठता।

मन्‍नू भण्‍डारी से ज्‍योति चावला की बातचीत हिन्‍दी साहित्‍य में स्‍त्री-विमर्श का श्रेय राजेन्‍द्र को मिलने का तो प्रश्‍न ही नहीं उठता। इस स...

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