रंग बरसे : डॉक्टर चंद जैन 'अंकुर' की कविता - माँ संग होली

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माँ संग होली
माँ ने प्रकृति के  रंग सजाये हैं
रंगों से रास रचायें है
कृति से सात रंग के  मेल बनाये हैं
रास ह्रदय में कृष्ण रंग का
राधा उज्जवल भाव प्रेम का
इन नव रंगों के  विश्व  बनाये  हैं
माँ ने प्रकृति ..........................
रंगों से .......................


आम्र उम्र भर बौर आगमन
यॊवन रास रचाए
टेसू बन मलिका कान्हा की
प्रणय निवेदन गाये
प्रणय निवेदन
कण कण वसुधा में
कौन नहीं है गाता
माँ पुलकित हो सृजन गीत से
सारे विश्व सजाये
माँ ने प्रकृति के रंग ....................
रंगों से रास ..........................


कान्हा दर्शन बन जाते है
जब राधा संग मिल जाये
राधा गाये कान्हा कान्हा
कान्हा
मन्त्र मुग्ध हो जाये
मैय्या सोचे कहा गये हो
मेरे कृष्ण कन्हैय्या
वाह रे रास रचैय्या
माँ ने दी चुम्बन मस्तक पर
कृष्ण लाल बन जाये
राधे बन जाये हरयाली
कामदेव
नतमस्तक हो जाये
माँ ने प्रकृति के ......................
रंगों से रास ...........................


सूरज ,चंदा कृति है माँ का
पवित्र प्रेम की गाथा है
अनंत काल से प्रणय निवेदन
युगल गीत को गायें
ब्रम्ह्काल मे माँ के नभ में
रज सूरज हो जाये
उदित हुआ तब
भाग्य विश्व का
उषाकाल भी गाये
कण कण रक्तिम हो जाये
माँ ने प्रकृति के .....................
रंगों से रास .........................


नव दर्शन हरपल पाता हु
नव यौवन  हरपल गाता हू
हरपल हरक्षण रंग बदलता
संध्या की देहरी पर सूरज
थम जाये
नदियाँ ,
कलकल,कलकल  राग बनाये
चंदा प्रिय का करे स्वागतम
प्रियतम , अपनी आभा को
चन्दा पर बरसाए
ये कैसा आलिंगन है माँ
सूरज डूबे या मिल जाये
कामदेव भी शर्मायें
माँ ने प्रकृति के ....................
रंगों से रास .........................


मनुज विसर्जित रोज हुआ माँ
जो केवल अंगों  में झांके
मै केवल "अंकुर" ही अच्छा
सृजित अंक से  तुझे निहारु
ज्ञानवान  विज्ञान वान
सब अर्थहीन है
जो न  तुझको अब तक जानें
मै क्यों जानू
जब तू सब जाने
सहस्त्र काम भी फीके से है
जो केवल देहों तक पहुंचें
देह आत्म का  योग  करा दे
तुझ संग देखूं रास विश्व का
तू ही रास रचाये
माँ ने प्रकृति के ......................
रंगों से रास ...........................


अब मैं केवल काव्य लिखूं माँ
हरपल  तेरा भाव लिखूं माँ
कण कण राधे कृष्ण प्रेम का
अपना "अंकुर"र्भाव लिखू माँ
"प्रेम" मुख्य है रासरंग में
जो जड़ चेतन तक पहुंचें
सब रंगों के बीच बैठ कर
सबसे गहरा रंग लिखूं  माँ
मातृभूमि पर ssssss'
अपने
रक्तिम आभा से
विकसित,,,,,, चेतन ,
राष्ट्र लिखू माँ
माँ ने प्रकृति के……...................
रंगों से रास ........................


.डॉक्टर चंद जैन 'अंकुर
रायपुर  (mobile no. 98261-16946)

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