रंग बरसे : ज्योतिर्मयी पन्त के होलियाना हाइकु

रंग के पर्व होली पर रचनाकार पर भी रंग का बुखार चढ़ गया है. यह पूरा सप्ताह होलियाना मूड की रचनाओं से रंगीन बना रहेगा. आप सभी  अपनी रंगीन रचनाओं के साथ इस रंग पर्व में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित हैं.

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फागुन के रंग


१  आया फागुन
आम्रवन   झूमर
गाए  कोयल


२  रंगों  से  बनें
घर आँगन  लोग
`मॉडर्न आर्ट `.


३  सभी को रंग
अबीर औ  गुलाल
ख़ुशी के संग .


५ .फागुनी हवा
रंगों भरी  सौगात
दे  जोश नया .


६ .होलिका जले
दुःख दर्द ले चले
खुशियाँ फले .


७ होली खुमार
रंगों की  महफ़िल
बाँट लें प्यार .


८. रंग बहार
मिले  ख़ुशी औ प्यार
जो हैं बे रंग  .


९ पलाश फूले
नव- पल्लव झूलें
फाग-बयार .


१० होली सन्देश
हम सब हैं एक
न राग- द्वेष .


११  जादू पुड़िया
चुटकी रंग भरी
गिले भुला दे .


१२ .भंग- ठंडाई
गुजियाँ  मीठी भाई
होली जो आई .
.                             ज्योतिर्मयी पन्त

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