रंग बरसे : रामदीन के हास्य-व्यंग्य दोहे - पाठशाला

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अर्धसत्‍य

पाठशाला

ब्‍लैक बोर्ड को छोड़,किचन में आँख गड़ाई टीचर ने,

बिना कटोरा बच्‍चा आया धर के डाटा टीचर ने।

 

बच्‍चा बोला घर में कापी, हॅस कर टाला टीचर ने,

फूंका चूल्‍हा लेकर फुंकनी धुआँ उड़ाया टीचर ने।

 

हुई पढ़ाई अब सौतेली, सगी है दलिया शाला में,

कब तक कैसा मिले नाश्‍ता बच्‍चे ताकें शाला में।

 

करे मुआइना अधिकारी भी पहले जाकर चौके में,

खा, पीकर कब भागें घर को बच्‍चे रहते मौके में।

 

कितना आज पढ़ा है, तुमने कोई न पूछे बच्‍चों से,

क्‍या खाया और कैसा खाया पूछ रहे सब बच्‍चों से,

 

करे शिकायत सभी विरोधी जॉच करायें घपलों की,

कच्‍चा पक्‍का किसने खाया, हुई जाँच फिर घपलों की।

 

छोटे छोटे प्‍यारे बच्‍चे होते दिल के सच्‍चे,

सुबह कटोरे के चक्‍कर में रह ना जायें छुच्‍छे।

 

गिनती पहाड़ा पढ़ लो बच्‍चों ज्ञान बटोरो शाला में,

वरना आगे पछताओगे, चूक गये यदि शाला में

image

-रामदीन,

जे-431, इन्‍द्रलोक कालोनी,

कृष्‍णानगर, लखनऊ-23

मो0नं0-9412530473

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2 टिप्पणियाँ "रंग बरसे : रामदीन के हास्य-व्यंग्य दोहे - पाठशाला"

  1. बेनामी6:21 pm

    बहुत अच्छी कविता है - अजय कुमार सोनकर,वरिष्ट वित्त अधिकारी

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