रंग बरसे : मीनाक्षी भालेराव के होली के गीत

रंग के पर्व होली पर रचनाकार पर भी रंग का बुखार चढ़ गया है. यह पूरा सप्ताह होलियाना मूड की रचनाओं से रंगीन बना रहेगा. आप सभी  अपनी रंगीन रचनाओं के साथ इस रंग पर्व में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित हैं.

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होली के गीत

रंग डाला

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ओ री सखी री मोहे रंग डाला

नन्द के लाला ने मोपे रंग डाला

मैं तो चली थी अपनी राहें

यशोदा के लाला ने उस ग्वाला ने

मोहे रंग डाला

लाल ना पिला हरा ना गुलाबी

उस ने तो मोपे

प्रेम रंग डाला

माखन चोर ने नन्द किशोर ने

चोरी नहीं की डाका डाला

मनवा मोरा

चुरा ले भागा

पनिया भरन में कैसे जाऊं

लाज का घूंघट कैसे हटाऊँ

देखूं ना उसकी मोहनी सुरत

नींद ना आये

मोहे चैन न आये

प्रीत के रंग मैं

मोहे रंग डाला

ओ री सखी री मोहे रंग डाला

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सैंया

होरी पर घर आजा रे सैयां

फीकी पड़ी है मोरी चुनरिया

सतरंगी रंग बरसा जा रे

बाली उमरिया में ब्याह रचाया

जोबन की अब आई है छाया

गौना कराने आजा रे

फागुन के दिन और फागुन की रातें

कैसी अनोखी है ये बातें

सेज सजाने आजा रे

कोरी मोरी कंचन काया

कैसे संवारूं जानूं ना मैं

मोहे सजाने आजा रे सैंया

कच्ची उम्र के बन गये पक्के सपने

सज गये उमंगों खुशियों के मेले

झुला झुलाने आजा रे

होरी पर घर आजा रे सैयां

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2 टिप्पणियाँ "रंग बरसे : मीनाक्षी भालेराव के होली के गीत"

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