मंगलवार, 26 मार्च 2013

रंग बरसे : सन्तोष कुमार सिंह की कविताएँ

होली है भाई होली है-------।

कुछ आप बीती होली की

आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।
याद ताजा हो गई है, ढोल-ढप औ' गान की।।

खेत में मटरें खिली हैं, आम भी बौरा गए।
दहकने टेसू लगे हैं, मन सभी हरषा गए।।
सब घरों से आ रही है, गंध भी पकवान की।
आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।।

गाल हो रहे लाल उनके, चुंदरी सतरंग की।
चोली-अँगिया भीगती और सखियाँ नाचें संग की।।
होठ सबके सुर्ख हैं अब, क्या जरूरत पान की।
आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।।

मेरी गली में सब खड़ी थीं, भाभियाँ औ' सालियाँ।
हाथ में पिचकारियाँ थीं और कुछ के लाठियाँ।।
भागने पर बात बिगड़े, चिन्ता हमें सम्मान की।
आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।।

उन रँगीली सालियों ने, दाग दी पिचकारियाँ।
ऐसे फँसे हम भाभियों ने,तन जड़ी थीं लाठियाँ।।
टाँग अब तक दुखती पर, बात अपनी शान की।
आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।।

हमने चढ़ाई भांग इतनी, बाद में पगला गए।
पेट फटने को हुआ था, हम असीमित खा गए।।
हम हँसे रोए कभी, चिन्ता लगी फिर प्रान की।
आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।।

नफरत की गाठें जो हृदय थीं, आज सबने खोल दीं।
हर बुराई त्याग करके, प्रीति रँग में घोल दी।।
स्वर्ग धरती को बनाए, प्रीति ही इंसान की।
आ गई है आज होली, फिर बड़े अरमान की।।
 
आग लगाना सीख गए
खुशी बाँटना भूल गए वे, आग लगाना सीख गए।
हँसते हैं विश्वास तोड़कर, जग में ऐसे मीत भए।।

झूठ, कपट, छलछंद भरे हैं, इस मानव की रग-रग में।
कलुषित करें खून के रिश्ते, दानव मिलते हर डग में।।
प्रेम दिलों से मिटा जा रहा, कहो बढ़ेगा अब कैसे?
मधुर वर्त्ता भूल गए जब, कड़ुवी बातें सीख गए।


भ्रष्टाचार के बने पुजारी, बने स्वार्थ के पोषक भी।
लगा मुखौटा जनसेवक का, घूमें असली शोषक भी।।
चरित गिरा अति इंसानों का, कहो उठेगा अब कैसे?
दया, धर्म और सदाचार के, लगता घट हैं रीत गए।


युवा मस्त हैं बालाओं की, शोख अदाओं में भइया।
फैल गया आतंकवाद-विष, सभी दिशाओं मे भइया।।
हत्या, लूट, फिरौती धन्धे, कहो रुकेंगे अब कैसे?
देश चलाने वालों में जब, चम्बल वाले दीख गए।
॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ सन्तोष कुमार सिंह

2 blogger-facebook:


  1. बहुत सराहनीय प्रस्तुति. आभार !

    ले के हाथ हाथों में, दिल से दिल मिला लो आज
    यारों कब मिले मौका अब छोड़ों ना कि होली है.

    मौसम आज रंगों का , छायी अब खुमारी है
    चलों सब एक रंग में हो कि आयी आज होली है

    उत्तर देंहटाएं
  2. वर्तमान सन्दर्भ मे बढिया कविता है भइया ,

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------