रविवार, 31 मार्च 2013

राजीव आनंद का आलेख - मनोरंजन व्‍यापारी : हिन्‍दी भाषियों द्वारा अवहेलना का शिकार

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(मनोरंजन व्यापारी)

म्‍नोरंजन व्‍यापारी एक रिक्‍शा चालक जो कोलकाता की सड़कों पर रिक्‍शा खिंचते हुए या फिर कहीं रिक्‍शे पर बैठे किसी साहित्‍यिक पुस्‍तक या पत्रिका को पढ़ते मिल जायेंगे. उनके रिक्‍शे में एक दिन एक शिक्षिका टाइप की महिला कहीं जाने के लिए बैठी, चलते-चलते मनोरंजन व्‍यापारी ने उक्‍त महिला से ‘जिजीविषा' शब्‍द का अर्थ पूछा क्‍योंकि किसी पुस्‍तक में इस शब्‍द को पढ़ने के बाद उसका अर्थ उन्‍हें समझ में नही आ रहा था. उस महिला ने शब्‍द का अर्थ ‘जीने की इच्‍छा' बता तो दिया लेकिन जब उस महिला ने अपना परिचय दिया तो मनोरंजन व्‍यापारी के खुशी की सीमा नहीं थी क्‍योंकि वह महिला कोई और नहीं बल्‍कि स्‍वंय प्रसिद्ध लेखिका महाश्‍वेता देवी थी. उन्‍होंने मनोरजन व्‍यापारी को अपनी पत्रिका ‘वर्तिका' में रिक्‍शा चालकों के जीवन पर कुछ लिखने को आमंत्रित कर दिया. मनोरंजन व्‍यापारी की इस तरह शुरू हुयी साहित्‍य साधना, वे लिखते जाते और महाश्‍वेता देवी उसे संपादित कर अपनी पत्रिका वर्तिका में छापती जाती.

24 मार्च को पटना में लिटरेचर फेस्‍टिवल के मंच से मनोरंजन व्‍यापारी ने अपनी कहानी का पाठ किया. उन्‍होंने बताया कि उनके पिता बतौर रिफयूजी कलकता आए थे, उनका बचपन चाय दूकान चलाते, फिर गाय, बकरी चराते हुए बीता, नक्‍सलियों के प्रति सहानुभूति रखने के कारण जेल भी जाना पड़ा. जेल में ही उन्‍होंने बंगला अक्षरों को अपने जेल सहपाठियों की मदद से सीखा और जब वे जेल से बाहर आए तो उन्‍हें पुस्‍तकें और पत्रिकाएं पढ़ना आ चुका था. रोजी-रोटी के जुगाड़ में उन्‍होंने रिक्‍शा चलाना शुरू किया और साथ में साहित्‍य साधना भी. उनकी लगन और मेहनत को देखते हुए उपरवाले ने स्‍वयं महाश्‍वेता देवी जैसी प्रसिद्ध साहित्‍यकार को उनके रिक्‍शा में बतौर सवारी एक दिन भेज दिया और इस तरह उनका साहित्‍यिक सफर शुरू हुआ.

महाश्‍वेता देवी जैसी संवेदनशील साहित्‍यकार की मदद से मनोरंजन व्‍यापारी आज बंगला साहित्‍य के जाने माने साहित्‍यकार बन चुके है. उन्‍होंने अपनी आत्‍मकथा ‘इतिवृति चांडाल जीवन' के नाम से लिखा है जो प्रकाशित होकर देश-दुनिया में धूम मचा रहा है लेकिन हिन्‍दी क्षेत्र की उदासीनता बरकरार है. ध्‍यान देने की बात यह है कि पटना लिटरेचर फेस्‍टिवल के आयोजकों ने जिस तरह मनोरंजन व्‍यापारी को मंच पर जगह दिया वैसे किसी भी साहित्‍यिक मंच ने आजतक मनोरंजन व्‍यापारी को तर्जी नहीं दिया. अंग्रेजी अखबार हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स ने प्रथम पृष्‍ठ पर मनोरंजन व्‍यापारी को छापा परंतु हिन्‍दी के किसी भी अखबार ने मनोरंजन व्‍यापारी को दूसरे या तीसरे पन्‍ने पर भी जगह नहीं दी.

क्‍या मनोरंजन व्‍यापारी द्वारा रिक्‍शा खींचते-खींचते जिजीविषा शब्‍द के अर्थ ढूढ़ते-ढूढ़ते साहित्‍यकार बन जाना अपने आप में एक कहानी नहीं है अगर है तो उनकी अवहेलना क्‍यों ? मुझे श्री बिष्‍णु प्रभाकर लिखित ‘आवारा मसीहा' की याद आ रही है जिसे लिखने में उन्‍हें 14 वर्ष के कड़े तपस्‍या से गुजरना पड़ा था क्‍योंकि शरतचंद्र जैसे महान साहित्‍कार के जीवन काल में कुछ ऐसी ही अवहेलना हुयी थी. कही ऐसा नहीं हो कि मनोरंजन व्‍यापारी को उनके जीतेजी हिन्‍दी साहित्‍य के पुरोधाओं व मठाधीशों द्वारा की जा रही अवहेलना भी शरतचंदीय रूप ले ले. मनोरजन व्‍यापारी द्वारा अब तक लिखित कहानियों में से मात्र एक कहानी का अनुवाद हिन्‍दी भाषा में हो पाया है. श्री व्‍यापारी की लिखी हुई कहानियां भोगी हुयी कहानियां है कल्‍पना का प्रयोग उनमें करने की जरूरत ही नहीं पड़ी. इसलिए भी मनोरजन व्‍यापारी के साहित्‍य को हिन्‍दी साहित्‍य में उचित स्‍थान मिलनी चाहिए इससे हिन्‍दी साहित्‍य समृद्ध ही होगा.

राजीव आनंद

मो. 9471765417

2 blogger-facebook:

  1. Manoranjan ji pranam! aapke is lekh se kai logon ko Vyapari ji ke sambandh me pata chalega. Main vyaktigat kafi prasann hun ki aapne unke sambandh me likha. Maine bhi apne angreji sahityik patrika THE CHALLENGE ke Jan- June 2013 ank me unki atmkatha '' itibritte chandal jivan'' ki samiksha chhapi hai. Badhai
    Manoj 'Aajiz'

    उत्तर देंहटाएं
  2. Manoj ji sadhubad kee apne bhi apne Jan-June 2013 ank me Manoranjan Byapari kee atmakatha kee samiksha chapi hai. Agar ho sake to apne angreji sahityik patrika The Challenge kee ek prati mujhe nimn pate par bhejnaye kee kripa kare. Dhanyabad
    Mera pata
    Rajiv Aanand
    Professors' Colony, New Barganda
    Giridih (Jharkhand) 815301

    उत्तर देंहटाएं

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