मंगलवार, 26 मार्च 2013

राजीव आनंद के हाइकु

हाइकु

कोयल कहां
ऋतुराज बसंत
के गीत गाए ?

बसंत आया
कोयल पुकारती
परंतु कहां ?

हिन्‍दुस्‍तान में
परिवारवाद है
या प्रजातंत्र ?

इंसान भूला
मशीन बिगडेगा
वह मरेगा

बीमार बुढ़ा
बन गया है बोझ
खूशी है मौत

माँ-पिता रहे
साथ-साथ हमेशा
मरे भी साथ

माँ पहनती
फूलों वाली साडी ज्‍यों
बाग लगती

घर-आंगन
मौन हो गया मन
सून क्रंदन

इंसानियत
अब नहीं बनती
कारखाना में

पहचान के
जुदा होते अंदाज
इंसानों के है

मेरे दिल में
है एक कमरा सा
जो सूना पड़ा

ये कैसी अदा
मुस्‍कुराना हो सजा
जिए बेमजा


ये कैसी वफा
कहां की मोहब्‍बत
मँजनू मरा

इंसान मै हॅूं
पत्‍थर नहीं हॅूं मैं
घबराउं न

जन्‍म दिन है
नजदीक मौत के
आने का दिन

टकराती है
महत्‍वाकांक्षाएं ही
सिद्धांत नहीं


राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्‍यू बरंगड़ा, गिरिडीह
झारखंड़ 815301

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------