राजीव आनंद के हाइकु

हाइकु

कोयल कहां
ऋतुराज बसंत
के गीत गाए ?

बसंत आया
कोयल पुकारती
परंतु कहां ?

हिन्‍दुस्‍तान में
परिवारवाद है
या प्रजातंत्र ?

इंसान भूला
मशीन बिगडेगा
वह मरेगा

बीमार बुढ़ा
बन गया है बोझ
खूशी है मौत

माँ-पिता रहे
साथ-साथ हमेशा
मरे भी साथ

माँ पहनती
फूलों वाली साडी ज्‍यों
बाग लगती

घर-आंगन
मौन हो गया मन
सून क्रंदन

इंसानियत
अब नहीं बनती
कारखाना में

पहचान के
जुदा होते अंदाज
इंसानों के है

मेरे दिल में
है एक कमरा सा
जो सूना पड़ा

ये कैसी अदा
मुस्‍कुराना हो सजा
जिए बेमजा


ये कैसी वफा
कहां की मोहब्‍बत
मँजनू मरा

इंसान मै हॅूं
पत्‍थर नहीं हॅूं मैं
घबराउं न

जन्‍म दिन है
नजदीक मौत के
आने का दिन

टकराती है
महत्‍वाकांक्षाएं ही
सिद्धांत नहीं


राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्‍यू बरंगड़ा, गिरिडीह
झारखंड़ 815301

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