मंगलवार, 19 मार्च 2013

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - रिकॉर्ड

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रिकॉर्ड

रामदयालजी महाराज के यहाँ दूर-दूर से लोग अपनी समस्याओं के निदान तथा अपने भविष्य के बारे में जानने के लिए आते थे। वे बिल्कुल मुफ्त सेवा देते थे। किसी से कुछ भी स्वीकार नहीं करते थे। कोई कमाने वाला होता तो हजारों की भीड़ से रोज लाखों कमा सकता था। लेकिन महाराज जी ऐसा नहीं करते थे। दीन-दुखी अथवा परेशान व्यक्ति की कुछ समस्यों का निदान करके पैसा ऐठना शायद वे गलत समझते थे।

एक दिन रामू भी महाराजजी की चर्चा सुनकर उनके यहाँ गया। इसमें उसकी पत्नी की प्रेरणा अधिक थी। भीड़ देखते ही बनती थी। सब अपनी-अपनी समस्याओं के निदान हेतु अथवा भविष्य के सम्बन्ध में पूछ रहे थे। और महाराजजी सबका समाधान कर रहे थे। बड़ी देर बाद रामू का नम्बर आया।

महाराज जी ने पूछा बेटा बोलो तुम्हें क्या पूछना है ? रामू बोला कुछ नहीं। महाराज जी बोले इतनी दूर से आये हो मन में कुछ जिज्ञासा तो रही ही होगी। जो भी हो पूछ लीजिए। रामू बोला मुझे कुछ पूछना नहीं है। महाराजजी बोले लोग कुछ न कुछ पूछने के लिए ही आते हैं। कोई अनायास ही यहाँ नहीं आता। तुम भी पूछ लो। रामू बोला मैं सिर्फ आपके दर्शन हेतु आया था और दर्शन हो गया। मुझे कुछ पूछना नहीं है।

रामू घर वापस आ गया। पत्नी राह देख रही थी। महाराजजी का बहुत नाम सुन चुकी थी। कई लोगों का उनसे कल्याण हुआ था। उसे आशा थी कि उसका पति शादी के कई साल बाद भी संतान न होने और कोई भी दवा काम न आने की बात महाराजजी को बताकर संतान होने की उपाय तथा कब होगी इसके बारे में जरूर कुछ न कुछ पूछ कर आया होगा। इधर रामू बहुत खुश था। क्योंकि उसे लग रहा था कि महाराजजी के पास जाने वाला वह एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जो उनसे कुछ भी पूछे बिना वापस आ गया है। पत्नी भले ही आसूँ बहा रही थी लेकिन अपनी समझ से रामू एक रिकॉर्ड बना चुका था।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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