मंगलवार, 26 मार्च 2013

रंग बरसे : गिरिराज भंडारी की अपनी तो होली हो ली

अपनी तो होली हो ली
****************
महंगी मिठाई,महँगा है रंग 
है पिचकारी संग- संग
महंगी है भांग की गोली
अपनी तो होली हो ली

पानी की भी किल्लत है
केवल गुलाल में ज़िल्लत है
सब  आँखें रोना रो ली
अपनी तो होली हो ली

कुछ घटक दलों की टक्कर में 
हाथी-सायकल के चक्कर में
सरकार हमें है भूली
अपनी तो होली हो ली

सिर जनता सौ-सौ बार धुनें 
अब कौन पुकारे कौन सुने
मुंह से छीन गई बोली
अपनी तो होली हो ली

हैं नौकरियों में  मित्र  दूर
कुछ हम हैं,तो वो भी मजबूर 
हम खोज रहे हमजोली
अपनी तो होली हो ली

        गिरिराज भंडारी ,
       1  A /सड़क 3 5/सेक्टर 4 , भिलाई  

3 blogger-facebook:

  1. सुंदर अभिव्यक्ति है , वर्तमान समस्याओं का कविता पर रंग चढ़ा हुआ है, यही तो युग की सही अभिव्यक्ति है !!!! । इसी रंग ने होली के रंग को भंग कर दिया है ।
    डॉ . मोहसिन ख़ान
    अलीबाग (महाराष्ट्र)

    उत्तर देंहटाएं
  2. बस होली तो होली हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. मोह्सिन भाई और सावन भाई आपको कविता आई, आपको हौसला अफ्ज़ाई के लिये शुक्रिया ।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

और दिलचस्प, मनोरंजक रचनाएँ पढ़ें-

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------