पुस्‍तक समीक्षा : जड़ी-बूटी चिकित्‍सा शतक

पुस्‍तक समीक्षा

जड़ी-बूटी चिकित्‍सा शतक

लेखक- सन्‍तोष कुमार सिंह, मथुरा।

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श्री सन्‍तोष कुमार सिंह एक ऐसे साहित्‍यकार हैं जो साहित्‍य लेखन में नए-नए प्रयोग करते हैं। बाल साहित्‍य के साथ-साथ, ये प्रौढ़ साहित्‍य लेखन में भी सिद्धहस्‍त हैं। पूर्व में लिखी - ‘औद्योगिक सुरक्षा शतक', पर्यावरण शिक्षा पर ‘पेड़ का दर्द', भौतिक विज्ञान की परिभाषाओं पर ‘कवितायें विज्ञान की' आदि पुस्‍तकें इनके अनूठे लेखन की साक्षी हैं। ऐसी ही एक और नई पुस्‍तक प्रकाशित हुई है - ‘जडी़-बूटी चिकित्‍सा शतक'। आयुर्वेद चिकित्‍सा पर लिखी यह पुस्‍तक भी अनूठी है।

यूँ तो लोगों के मुँह से चिकित्‍सा सम्‍बन्‍धी इक्‍का-दुक्‍का दोहे सुनने को मिल जाते हैं परन्‍तु 501 दोहों की पूरी पुस्‍तक पहली बार चिकित्‍सा साहित्‍य में देखने को मिली है। 63 जड़ी-बूटियों पर और कुछ मिश्रित दोहे इस पुस्‍तक में संग्रहीत हैं। श्री सिंह के पिताश्री ख्‍याति प्राप्‍त आयुर्वेदिक चिकित्‍सक थे। अतः कुछ पैत्रिक, कुछ अनुभव और कुछ अध्‍ययन के आधार पर यह पुस्‍तक जनसामान्‍य की भलाई के लिए इन्‍होंने बड़ी ही सरल और सरस भाषा में लिखी है।

कुछ पैत्रिक, कुछ अध्‍ययन, तो कुछ अनुभव जन्‍य।

ज्ञान समन्‍वित कर रची, रचना रुचिर अनन्‍य॥

सरल जड़-बूटी विपुल, विरल रोग बहु दोष।

समाधान अति सुगम रच, मिला इन्‍हें मिला सन्‍तोष॥

आयुर्वेद की अनेक पुस्‍तकें हैं जो अधिकतर जनसामान्‍य की समझ और पहुँच से परे हैं। प्रकाशन पूर्व कई चिकित्‍सकों ने इसे पढ़ा और पाया कि पुस्‍तक में दिए नुस्‍खे सही और उपयोगी हैं। लेखक ने कुछ बूटियों के उपयोग से सतर्क रहने को भी इंगित किया है जैसे -

विष धतूरा जानिए, इसे न ज्‍यादा खाय।

सुन्‍न होय, पागल बने या कि स्‍वर्ग को जाय॥

दालचीनी गर्म अति, कोठा गर्म न खाय।

गर्भवती खा ले इसे, गर्भपात हो जाय॥

लेखक ने जड़ी-बूटियों के विविध नामों और मिलने के स्‍थानो का उल्‍लेख करके पुस्‍तक की उपयोगिता को बढ़ा दिया है-

गोकर्णी, अपराजिता, विष्‍णुकान्‍त भी नाम।

वृक्ष आश्रिता बल्‍लरी, गृहशोभा भी काम॥

दादी-नानी के नुस्‍खे अकाट्‌य हुआ करते थे। इसी प्रकार के नुस्‍खे इस पुस्‍तक की विश्‍ोषता है। सरल प्रसव के लिए दोहा देखिए -

अगर कसौंदी-पात के, रस को देय पिलाय।

इन्‍तजार मिट जायगा, प्रसव जल्‍द हो जाय॥

पौधे के पाँच अंगों - पत्र, पुष्‍प, फल, जड़, छाल की उपयोगिता भी कहीं-कहीं परिलक्षित हुई है -

पाँच अंग असगंध के, कुट छान कर चूर।

बीस ग्राम ले नीर सँग, गठिया भागे दूर॥

पुस्‍तक में जड़ी-बूटियों की चित्रात्‍मक जानकारी पाठकों के लिए अत्‍यन्‍त लाभकारी सिद्ध होगी क्‍यों कि बूटी का तो नाम जानते हैं, घर के पास भी उपलब्‍ध है पर पहचान के बिना उपयोग नहीं कर पाते हैं। पुस्‍तक में इसका समाधन उपलब्‍ध है।

असगंध, आक, धतूरा, अमलतास, अर्जुन, बेल, आँवला, अपामार्ग, ब्राह्‌मी, गिलोय, गोखुरू, ग्‍वारपाठा, गूलर, कसोंदी, आयापान, शतावर, सत्‍यानाशी, अजमोद दूब तथा तगर जैसे पौधों की उपयोगिता बड़े ही सरल दोहों में वर्णित हैं। श्‍वेत प्रदर, अफारा, वात रोग, चर्मरोग, दाद-छाजन, बबासीर, नक्‍सीर, कर्ण शूल, मस्‍तक शूल, दन्‍त शूल और हृदय रोगों के उपचार के अनेक अकाट्‌य नुस्‍खे इस पुस्‍तक में उपलब्‍ध हैं। उपयोगिता को देखते हुए 80 पृष्‍ठीय पुस्‍तक का मूल्‍य 150/- बहुत ही कम है। मुझे विश्‍वास है कि ‘जड़ी-बूटी चिकित्‍सा शतक' पाठकों के अतिरिक्‍त आयुर्वेदिक चिकित्‍सकों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। हिन्‍दी साहित्‍य जगत में भी इस पुस्‍तक का विश्‍ोष स्‍वागत होगा।

समीक्षक -

डा0 रामनिवास शर्मा ‘अधीर'

कवि एवं समीक्षक

महोली रोड, मथुरा।

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2 टिप्पणियाँ "पुस्‍तक समीक्षा : जड़ी-बूटी चिकित्‍सा शतक"

  1. Shri santosh kumar singh ki pustak ki samiksha padi.Is mahatva purn pustak k lekhan k liye singh sahab ko badhai evm uttam samiksha k liye Dr. Adhir ji ko sadhuvad.
    Dr.Dinesh pathak shashi.

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  2. Shri santosh kumar singh ki pustak ki samiksha padi.Is mahatva purn pustak k lekhan k liye singh sahab ko badhai evm uttam samiksha k liye Dr. Adhir ji ko sadhuvad.
    Dr.Dinesh pathak shashi.

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