सोमवार, 8 अप्रैल 2013

साताप्पा लहू चव्हाण का आलेख - हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यमों की भूमिका

हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यमों की भूमिका

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डॉ. साताप्पा लहू चव्हाण

हिंदी भाषा विकास को केंद्र में रखकर भारत सरकार की ओर से अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. भारत सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रमों को आम जनता तक पहुँचाने में नए जनसंचार माध्यमों ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अपने उद्भवकाल से ही जनसंचार माध्यमों ने लोकशिक्षक की भूमिका में ही अपना कार्य जारी रखा है. इसे मानना होगा. “इक्कीसवीं सदी का जनसंचार(Mass Media) हमारे जीवन तथा राष्ट्रीय विकास और उस की दिशा निर्धारण का एक अभिन्न अंग बन चुका है. प्रातः होते ही अधिकतर लोग समाचार पत्र पढ़ने में व्यस्त हो जाते हैं.तो सुदूर गाँवों के कुछ लोग रेडियो खोल लेते हैं.कुछ अन्य लोग दूरदर्शन पर आँख−कान लगाए बैठ जाते हैं.इन विविध माध्यमों से हम राजनैतिक‚ आर्थिक‚ सामाजिक‚ खेलकूद आदि से सम्बन्धित गतिविधियों के समाचारों के अतिरिक्त विविध प्रकार के मनोरंजन का लाभ उठाते हैं. इन माध्यमों से प्रसारित विभिन्न विज्ञापन हमें उपभोक्ता संस्कृति से अनायास ही जोड़े रखते हैं. सच तो यह है कि जनसंचार के इन विभिन्न माध्यमों ने व्यक्ति से लेकर जन−समूह तक तथा एक देश से लेकर विश्व के विभिन्न देशों को एक सूत्र में बाँध दिया है.इस बंधन के परिणामस्वरूप जनसंचार माध्यम राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर चिंतन‚ विचार‚ राजनीति‚ अर्थ‚ संस्कृति आदि के क्षेत्र में सम्मिलित प्रभाव डालने लगे हैं और उन में विश्व का मानचित्र बदलने की क्षमता विकसित हो चुकी है...जनसंचार का उद्देश्य है विविध प्रकार के भावों‚ विचारों तथा जानकारियों को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाना.”1 कहना आवश्यक नहीं कि नए जनसंचार माध्यमों ने विविध प्रकार के भावों‚ विचारों और जानकारियों का आदान−प्रदान सफलता पूर्वक किया है.

अबतक जनसंचार माध्यमों को हम हम दृश्य‚ श्रव्य‚ और दृश्य−श्रव्य इन प्रमुख तीन वर्गों में रखकर देख रहें थे. अब दृश्य−श्रव्य माध्यमों के अंतर्गत नए जनसंचार माध्यमों का विकास हो रहा है.“दृश्य या लिखित जनसंचार माध्यम जिस में समाचार पत्र‚ पत्रिकाएँ‚ पोस्टर‚ पैम्पलेट‚ होर्डिंग आदि की गणना की जाती है.श्रव्य जनसंचार माध्यम जिस में रेडियो‚ ट्रांजिस्टर‚ ऑडियो कैसेट‚ टेलिफोन‚ मोबाइल फोन आदि. दृश्य− श्रव्य जनसंचार माध्यम जिस में सिनेमा‚ टेलिविजन‚ वीडियो कैसेट आदि.”2 उपर्युक्त आधुनिक जनसंचार माध्यमों के अतिरिक्त वर्तमान में हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यम अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आते है.

कम्प्यूटर‚ इंटरनेट‚ उपग्रह संचार प्रणाली‚ केबल‚ मल्टी−मीडिया‚ क्षेत्रिय चैनल‚ डीटीएच-सेवा‚ विदेशी सेवा प्रभाग(ईएसडी)‚ ब्लॉग‚ हिंदी वेबसाइटस्‚ ई−मेल‚ पॉड कास्ट‚ वेबकास्ट‚ सोशल नेटवर्किंग साइट्स−फेसबुक‚ आरकुट‚ गुगल प्लस आदि नए जनसंचार माध्यमों ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संक्रमण को बढाने के साथ−साथ हिंदी भाषा विकास के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किया है. इसे नकारा नहीं जा सकता. जागरण डॉट कॉम‚ अमरउजाला डॉट कॉम‚ भास्कर डॉट कॉम‚ वेबदुनिया डॉट कॉम‚ प्रभात खबर डॉट कॉम‚ तहलका डॉट कॉम का विचार करेंगे तो 1997से आजतक ऐसे अनेक वेब पेज मिलते है.जिनके कारण हिंदी दैनिकों का स्तर ऊँचा होता गया.हिंदी वेब पत्रकारिता नए जनसंचार माध्यमों में अपना अलग स्थान बना चुकी है. आज विश्व मीडिया की नजर हिंदी वेब पत्रकारिता पर है‚ इस में संदेह नहीं.“ वेब पत्रकारिता को हम इंटरनेट पत्रकारिता‚ ऑनलाइन पत्रकारिता‚ सायबर पत्रकारिता आदि नाम से जानते हैं‚ जैसा कि वेब पत्रकारिता नाम से स्पष्ट है यह कंप्यूटर और इंटरनेट के सहारे संचालित ऐसी पत्रकारिता है जिसकी पहुँच किसी एक पाठक‚ एक गांव‚ एक प्रखंड‚ एक प्रदेश‚ एक देश तक नहीं‚ बल्कि समूचे विश्व तक है और जो डिजिटल तरंगों के माध्यम से प्रदर्शित होती है. ... वेब मीडिया सर्वव्यापकता को भी चरितार्थ करती है‚ जिसमें खबरें दिन के चौबीस घंटे और हफ्ते के सातों दिन उपलब्ध रह्ती है.”3

हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यमों में वेब मीडिया का योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है. हिंदी भाषा शिक्षण का प्रचार−प्रसार वर्तमान काल में नए जनसंचार माध्यमों के कारण गतिमान बन रहा है. आकाशवाणी से लेकर स्थानीय रेडियो स्टेशन(एलआरएस)‚ सामुदायिक रेडियो स्टेशन(सीआरएस)‚ एफ एम रेनबो‚ एफ एम गोल्ड‚ डीटीएच सेवा‚ विदेशी सेवा प्रभात(ईएसडी)‚ डी डी के सभी चैनल्स हिंदी भाषा के विविध आयाम जनता के सामने रख रहें हैं.बी बी सी हिंदी(ऑनलाइन)की संपादिका सलमा जैदी कहती हैं‚ “वेब जर्नलिज्म प्रिंट का ही विकसित रूप माना जाता है. यहां लिखने और छपने के स्टाइल में फर्क जरूर होता है. यहां वाक्य छोटे‚ सरल और आसानी से पढ़े जा सकने वाले शब्दों के इस्तेमाल के साथ लिखे जाते है. यहां पैराग्राफ छोटे होते है और खबर की भाषा ऐसी होती है जिसे लोग सहजता से समझ सकें.”4 कहना सही होगा कि नए जनसंचार माध्यमों में वेब का करिश्मा सरल भाषा के लिए अपना प्रभाव बना रहा है. अक्षर सॉफ्टवेअर से हिंदी में शब्द संसाधन की शुरूआत मानी जाती है जो दिन−ब−दिन विकसित होती गयी.अब हिंदी के साथ−साथ सभी भारतीय भाषाओं में कंप्यूटर का प्रयोग आसान बन गया है. युनीकोड के कारण अब हिंदी भाषा का इंटरनेटीय रूप ज्ञानवर्धक दृष्टिगोचर होता है.“कंप्यूटर पर हिंदी और अँग्रेजी दोनों में काम करने के लिए तीन विकल्प उपलब्ध है−इनमें पहला है सामान्य कामों वाले सॉफ्टवेअर.आईबीएम पीसी कंप्यूटर पर द्विभाषी शब्द संसाधन के कई पैकेज बाजार में मिलते हैं.दूसरा विकल्प बहु−उपयोगी सॉफ्टवेअर का है. एमएस डॉस आधारित सॉफ्टवेअर का इस्तेमाल हो सकता है.तीसरा विकल्प ‘भाषा’ नामक एक बहुभाषी शब्द संसाधक है जिसका आईबीएम और समकक्ष कंप्यूटरों पर उपयोग हो सकता है.”5 हिंदी भाषा विकास के कंप्यूटर प्रयोग में नए जनसंचार माध्यम अग्रणी हैं.इसे नकारा नहीं जा सकता.इन दिनों नए जनसंचार माध्यमों में ब्लॉग अपनी अलग भूमिका निभा रहा है.“वर्ष 2003 में ब्लॉग की दुनिया में हिंदी का प्रवेश हुआ और आज बडी संख्या में हिंदी ब्लॉग भी पढे और पढाए जा रहे हैं.”6

चिट्ठा जगत हिंदी को लेकर अब अपनी विशालता की ओर बढ़ रहा है. यह बात सराहनीय है.राजनीति‚ सांस्कृतिक‚ साहित्यिक‚ व्यक्तिगत‚ वाणिज्य‚ अनुसंधान और शिक्षा आदि क्षेत्रो की जानकरी ब्लॉग पर हिंदी भाषा में उपलब्ध हो रही है. 1997से लेकर 2010 तक के ब्लॉगिंग इतिहास का अध्ययन करने से पता चलता है. कि दुनियाभर के अनेक साहित्यकार अब हिंदी भाषा में ब्लॉग लिख रहें हैं.अपनी बात को इस नए जनसंचार माध्यम के जरिए लोगों तक पहुँचा रहे हैं.इंटरनेट के कारण नए जनसंचार माध्यम हिंदी भाषा विकास के लिए सही दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.“हमारा अपना भारतीय प्रौद्योगिकी विकास आज अपने शीर्ष पर है. हमारी जनसंचार प्रणाली पहले से बेहतर और लगातार बेहतर होती जा रही हैं इस विकास की कडी को जुड़ने में एक लम्बा वक्त लगा है. सरकारें आती रही और जाती रही लेकिन भारतीय जनसंचार और प्रौद्योगिकी अपने विकास के पहिये को घूमाती रही”7 हिंदी भाषा के विकास में नए जनसंचार माध्यमों की उपादेयता का विचार किया जाए तो केबल‚ मल्टीमीडिया‚ इंटरनेट आदि अंतरिक्ष नए जनसंचार माध्यम हमकालीन समाज में हिंदी भाषा के साथ−साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को बढावा देने में सफल हुए दृष्टिगोचर होते हैं.आडियो‚ डिजिटल आडियो‚ विविध कोडेक्स‚ डिवाइसेस‚ विभिन्न सॉफ्टवेअर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मेल मोबाइल‚ विडियो ई−मेल‚ विजुअल डिस्प्ले टर्मिनल के माध्यमा से हिंदी भाषा का नया रूप सामने ला रहे हैं. नए जनसंचार माध्यमों में सर्वाधिक शक्तिशाली सूचना माध्यम के रूप में इंटरनेट का उल्लेख करना होगा. इंटरनेट के माध्यम से जो हिंदी का विकास हो रहा है वह सराहनीय है. वेब मीडिया इंटरनेट के कारण ही आज लोकप्रिय बन रहा है. स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड न्यूमीडिया स्टडीज‚ नईद दिल्ली के प्रोफेसर सुभाष धुलिया का मत दृष्टव्य है‚ “प्रौद्योगिकीय युग में आज लगभग सभी समाचार पत्र−पत्रिकाएँ‚ रेडियो और टेलीविजन चैनल्स ऑनलाइन हो रहे हैं.

आज समाचार चैनलों पर दिखाए जाने वाली खबरों और प्रोग्रामों का इंटरनेट वर्जन मौजूद है और इसी तरह सभी समाचार पत्र−पत्रिकाएँ भी वेब पत्रकारिता की दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है. इंटरनेट उपभोक्ताओं की तेजी से बढ़ रही संख्या इसी ओर इशारा कर रही है कि आगले कुछ वर्षो में वेब मीडिया कहीं अधिक प्रभावशाली मंच बनने की ओर उन्मुख है. हालांकि पश्चिमी देशों में काफी हद तक यह पहले ही हो चुका है... नई प्रौद्योगिकी से समाचार मीडिया में भी आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं‚ साथ ही इसके विस्तार की गहराई और व्यापकता भी बेमिसाल है.”8 अतः नए जनसंचार माध्यम भले ही व्यवसायवृत्ति के अनुसार विकास की ओर चल रहें हैं‚ उनका उद्देश्य जन हित का ही रहा है. इसे मानना होगा. अनेक चुनौतियों का सामना नए जनसंचार माध्यमों को करना पड रहा है.उसमें प्रमुख है भाषायी चुनौती. भाषायी चुनौती का सामना करने के लिए नए जनसंचार माध्यम अब विभिन्न सॉफ्टवेअर्स टूल्स का निर्माण कर भाषा विकास खासकर हिंदी भाषा विकास की ओर ध्यान दे रहें हैं.केवल देवनागरी लिपि का कंप्यूटरी विकास ही हिंदी का विकास नहीं है बल्कि हिंदी का संपूर्ण कंप्यूटरी विकास होना जरूरी बन गया है‚ जो नए जनसंचार माध्यम इस संपूर्ण कंप्यूटरी विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.“हिंदी कंप्यूटरी का विकास हिंदी के विकास की गति और दिशा निश्चित करेगा.इस समय हिंदी के सम्मुख वैसा ही अवसर उपस्थित है जैसा बीसवीं शती के आरंभ में था.यदि हम सब हिंदी कंप्यूटरी का समुचित प्रबंधन कर सके तो यह हिंदी के तीव्रतम विकास का एक नया काल सिद्ध हो सकता है.”9 कहना उचित होगा कि नए जनसंचार माध्यमों के कारण हिंदी का कंप्यूटरी विकास अब तेजी से हो रहा है. नए जनसंचार माध्यमों की इस भूमिका का हमें स्वागत करना होगा.अनेक चुनौतियों के कारण भले ही कंप्यूटरी हिंदी का संपूर्ण विकास नहीं हुआ हो पर इंटरनेट पर अब हिंदी का प्रयोग दिन−ब−दिन बढ़ रहा है. इस बात को हम नकार नहीं सकते. “सूचना प्रोद्योगिकी ने आधुनिक जनसंचार माध्यमों को नया विस्तार प्रदान किया हैं। इससे न केवल जनसंचार माध्यम का आयाम विस्तृत हुआ हैं, अपितु भाषा प्रयोग में भी विविधता के दर्शन हो रहें हैं। भाषा का ज्ञान संदेश की सरलता को संप्रेषित करता हैं। भाषा के सहज गुण धर्म को भाषा की प्रकृति माना जाता है।

जनसंचार माध्यमों के लिये जिस भाषा का प्रयोग किया जा रहा हैं वह साहित्यिक भाषा नहीं हैं वरन सामान्य व्यवहार / बोलचाल की भाषा हैं। विज्ञापन के लिए भी एक विशिष्ट भाषा को विकसित कर लिया जाता हैं, जो अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिये अपने रुप को भी परिवर्तित कर लेती हैं। भाषा अभिव्यक्ति का एक सबल और सशक्त माध्यम हैं। इसी कारण से भारत जैसे विशाल हिन्दी समुदाय वाले देश में हिन्दी जनसंचार का सबसे सीधा, सरल एवं सुबोध साधन सिद्ध होता जा रहा हैं।”10 नए जनसंचार माध्यम आम जनता में बोली जानेवाली हिंदी भाषा में व्यवहार कर रहे हैं.अतः सामान्यजनों का रूझान हिंदी भाषा के प्रयोग के प्रति बढ़ रहा है. हम जानते है कि इंटरनेट पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली पहली दस भाषाओं में हिंदी को स्थान नहीं मिला है लेकिन नए जनसंचार माध्यमों के प्रयासों से भविष्य में हिंदी का स्थान निश्चित होगा.इसमें दो राय नहीं. “कंप्यूटर में हिंदी प्रयोग की बढ़ती संभावनाओं को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रॉनिकी विभाग के भारतीय भाषाओं के लिए 'टेक्नोलॉंजी विकास' नामक परियोजना के अन्तर्गत कई प्रोजैक्ट शुरू किए हैं। किसी भी प्रजांतत्र और सरकारी अथवा निजी संगठन में जनभाषा का सम्मान करना फलप्रद होता है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए सूचनाओं का माध्यम जनभाषा होना जरूरी है। इंटरनेट प्रणाली के महाशक्तिशाली तंत्र में भाषा का अपना विशिष्ट स्थान होता है। भाषा-प्रौद्योगिकी के अन्तर्गत इलैक्ट्रॉनिक्स के माध्यम से भाषा का लेखन, पाठन, मुद्रण की नई तकनीक, लिपि का तकनीक के साथ तादात्म्य एवं भाषा-शिक्षण के उपकरणों का विकास आदि सन्निहित हैं।” 11 हिंदी−अंग्रेजी भाषा के संम्मिश्रण से हिंदी भाषा का हिंग्लिशीकरण जनसंचार माध्यमों द्वारा हो रहा है‚ इस आरोप का खंडन होना अनिवार्य है.इस आरोप में तथ्य नहीं है.सभी भारतीय भाषाओं के प्रचलित शब्दों को अब माध्यमतज्ज्ञ आवश्यक मानते है. इस बात से हिंदी विद्वजनों को सहमत होना होगा.मानक हिंदी का प्रयोग नए जनसंचार माध्यम अपनी तरफ से करने का भरकस प्रयास कर रहे हैं.फिर भी त्रुटियां रह जाती है. इन त्रुटियों को दूर करने के लिए सभी स्तर पर प्रयास होना अनिवार्य है.

निष्कर्ष

हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यमों की भूमिका के संदर्भ में अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि अपने उद्भवकाल से ही जनसंचार माध्यमों ने लोकशिक्षक की भूमिका में ही अपना कार्य जारी रखा है.वैसे देखा जाय तो हिंदी भाषा विकास को केंद्र में रखकर भारत सरकार की ओर से अनेक कार्यक्रम आयोजित हो किए जा रहे हैं. भारत सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रमों को आम जनता तक पहुँचाने में नए जनसंचार माध्यमों ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है. वर्तमान में हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यम अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आते है. नए जनसंचार माध्यमों ने विविध प्रकार के भावों‚ विचारों और जानकारियों का आदान−प्रदान सफलता पूर्वक किया है.अबतक जनसंचार माध्यमों को हम हम दृश्य‚ श्रव्य‚ और दृश्य−श्रव्य इन प्रमुख तीन वर्गों में रखकर देख रहें थे. अब दृश्य−श्रव्य माध्यमों के अंतर्गत नए जनसंचार माध्यमों का विकास हो रहा है. कम्प्यूटर‚ इंटरनेट‚ उपग्रहसंचारप्रणाली‚ केबल‚ मल्टी−मीडिया‚ क्षेत्रियचैनल‚ डिटिएचसेवा‚ विदेशी सेवा प्रभाग(ईएसडी)‚ ब्लॉग‚ हिंदी वेबसाइटस्‚ ई−मेल‚ पॉडकास्ट‚ वेबकास्ट‚ सोशल नेटवर्किंग साइट्स−फेसबुक‚ आरकुट‚ गुगल प्लस आदि नए जनसंचार माध्यमों ने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संक्रमण को बढाने के साथ−साथ हिंदी भाषा विकास के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किया है. इसे नकारा नहीं जा सकता. जागरण डॉट कॉम‚ अमरउजाला डॉट कॉम‚ भास्कर डॉट कॉम‚ वेबदुनिया डॉट कॉम‚ प्रभात खबर डॉट कॉम‚ तहलका डॉट कॉम का विचार करेंगे तो 1997 से आजतक ऐसे अनेक वेब पेज मिलते है.जिनके कारण हिंदी दैनिकों का स्तर ऊँचा होता गया.हिंदी वेब पत्रकारिता नए जनसंचार माध्यमों में अपना अलग स्थान बना चुकी है. आज विश्व मीडिया की नजर हिंदी वेब पत्रकारिता पर है‚ इस में संदेह नहीं. हिंदी भाषा विकास में नए जनसंचार माध्यमों में वेब मीडिया का योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है. हिंदी भाषा शिक्षण का प्रचार−प्रसार वर्तमान काल में नए जनसंचार माध्यमों के कारण गतिमान बन रहा है. नए जनसंचार माध्यमों में वेब का करिश्मा सरल भाषा के लिए अपना प्रभाव बना रहा है. अक्षर सॉफ्टवेअर से हिंदी में शब्द संसाधन की शुरूआत मानी जाती है जो दिन−ब−दिन विकसित होती गयी.

अब हिंदी के साथ−साथ सभी भारतीय भाषाओं में कंप्यूटर का प्रयोग आसान बन गया है. यूनीकोड के कारण अब हिंदी भाषा का इंटरनेटीय रूप ज्ञानवर्धक दृष्टिगोचर होता है. राजनीति‚ सांस्कृतिक‚ साहित्यिक‚ व्यक्तिगत‚ वाणिज्य‚ अनुसंधान और शिक्षा आदि क्षेत्रो की जानकरी ब्लॉग पर हिंदी भाषा में उपलब्ध हो रही है. 1997 से लेकर 2010 तक के ब्लॉगिंग इतिहास का अध्ययन करने से पता चलता है. कि दुनियाभर के अनेक साहित्यकार अब हिंदी भाषा में ब्लॉग लिख रहें हैं.अपनी बात को इस नए जनसंचार माध्यम के जरिए लोगों तक पहुँचा रहे हैं.इंटरनेट के कारण नए जनसंचार माध्यम हिंदी भाषा विकास के लिए सही दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं. हिंदी भाषा के विकास में नए जनसंचार माध्यमों की उपादेयता का विचार किया जाए तो केबल‚ मल्टीमीडिया‚ इंटरनेट आदि अंतरिक्ष नए जनसंचार माध्यम समकालीन समाज में हिंदी भाषा के साथ−साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को बढ़ावा देने में सफल हुए दृष्टिगोचर होते हैं.आडियो‚ डिजिटल आडियो‚ विविध कोडेक्स‚ डिवाइसेस‚ विभिन्न सॉफ्टवेअर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मेल मोबाइल‚ विडियो ई−मेल‚ विजुअल डिस्प्ले टर्मिनल के माध्यम से हिंदी भाषा का नया रूप सामने ला रहे हैं. नए जनसंचार माध्यमों में सर्वाधिक शक्तिशाली सूचना माध्यम के रूप में इंटरनेट का उल्लेख करना होगा. इंटरनेट के माध्यम से जो हिंदी का विकास हो रहा है वह सराहनीय है. वेब मीडिया इंटरनेट के कारण ही आज लोकप्रिय बन रहा है. नए जनसंचार माध्यम आम जनता में बोली जानेवाली हिंदी भाषा में व्यवहार कर रहे हैं.अतः सामान्यजनों का रुझान हिंदी भाषा के प्रयोग के प्रति बढ़ रहा है. हम जानते है कि इंटरनेट पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली पहली दस भाषाओं में हिंदी को स्थान नहीं मिला है लेकिन नए जनसंचार माध्यमों के प्रयासों से भविष्य में हिंदी का स्थान निश्चित होगा.इसमें दो राय नहीं.

संदर्भ निदेश

1.डॉ. महेंद्रसिंह राणा – प्रयोजनमूलक हिंदी के आधुनिक आयाम‚ पृष्ठ−235‚ 236

2. वही‚ पृष्ठ−237

3. संपा. हंसराज‘सुमन’‚ एस. विक्रम – वेब पत्रकारिता‚ पृष्ठ−15

4. सौरभ शुक्ल – नए जमाने की पत्रकारिता‚ पृष्ठ−114

5. संपा. डॉ. शशि भारद्वाज – भाषा (द्वैमासिक)मई –जून 2002‚ पृष्ठ−258‚ 259

6. श्याम माथुर– वेब पत्रकारिता‚ पृष्ठ−63

7. संपा. इरशाद अली−कम्प्यूटर मंत्रा(मासिक) जनवरी‚ 2013‚ पृष्ठ−44

8. संपा. शालिनी जोशी − वेब पत्रकारिता नया मीडिया नये रूझान‚ पृष्ठ−08

9. संपा. आर. अनुराधा – न्यू मीडिया इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ‚ पृष्ठ−70

10. www.news24x7. in/moreabhivakti.asp

11. www.kosh.khsindia.org/hindi

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Ø डॉ. साताप्पा लहू चव्हाण
सहायक प्राध्यापक
स्नातकोत्तर हिंदी विभाग,
अहमदनगर महाविद्यालय,
अहमदनगर 414001. (महाराष्ट्र)
दूरभाष - 09850619074
E-mail -
drsatappachavan@gmail.com

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