बच्चन पाठक 'सलिल' की लघुकथा - वह बहादुर वन-कन्या

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लघुकथा 

वह बहादुर वन- कन्या 

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                   -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

सन 1930 ईस्वी के आस-पास की बात है । चाईबासा में एक अंग्रेज डिप्टी कलेक्टर थे-मि. जेम्स । 

वे वन भ्रमण और वन्य-जीवन की फोटोग्राफी में बहुत रूचि लेते थे । 

एक दिन वे अपने सेवक सल्खू हांसदा के साथ राजनगर के पास के वन में घूम रहे थे । सल्खू के हाथ में एक कुल्हाड़ी थी । 

दोनों एक वृक्ष की छाया में सुस्ता रहे थे । अचानक अनुभवी सल्खू को एक झाड़ी हिलती हुई दिखाई दी । वह बोला- साहब, उठिए । झाड़ी में बाघ है । साहब अलसाए उठे । बाघ चिन्घारा और झाडी से निकला । इसके पूर्व कि वह हमला करता, एक तीर उसे लगा और वह कूदकर गिरा और मर गया । निशाना अचूक था । 

इसी समय एक मोटी, सांवली और स्वस्थ आदिवासी लड़की आई । उसके हाथ में धनुष था । वस्त्र के स्थान पर उसने कमर में किसी पशु की खाल लपेट रखी थी । 

वह इन दोनों को पास के गाँव में ले गई । मिट्टी के आठ दस घर ही थे । उसने एक पेय पिलाया । साहब ने स्फूर्ति का अनुभव किया । वह इन लोगों को चाईबासा-हाता मार्ग पर छोड़ गई । सल्खू को उसने गाँव का नाम भीम खांदा बताया (आज भी वह गाँव है) । सल्खू ने जेम्स को बताया कि महाभारत की हिडिम्बा इसी गाँव की बेटी थी । उसका विवाह भीम से हुआ था । आज भी यहाँ हिडिम्बा की पूजा होती है । 

लन्दन की एक पत्रिका में जेम्स का एक संस्मरण छपा -- '' दैट ब्रेभ फारेस्ट गर्ल वाज हिडिम्बा'' ( वह बहादुर वन कन्या हिडिम्बा थी ) 

पता - बाबा आश्रम, आदित्यपुर-२ 

        जमशेदपुर- १३ 

फोन- 0657/ 2370892

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1 टिप्पणी "बच्चन पाठक 'सलिल' की लघुकथा - वह बहादुर वन-कन्या"

  1. बेनामी9:51 pm

    मन को छूने वाली प्रेरणादायी रचना ।

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