मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

मनोज 'आजिज़' की लघुकथा - फुफकार

 

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लघुकथा

फुफकार

      -- मनोज 'आजिज़'

''अरे, रोना बंद करो और साफ़-साफ़ बोलो  क्या हुआ!''

इंस्पेक्टर साहब ने  फूलवारी को सांत्वना के स्वर में कहा । फूलवारी फिर फूफक-फूफ़क कर रोने लगी । एक महिला कांस्टेबल को बुलाकर इंस्पेक्टर साहब  फूलवारी को साथ ले जाकर बैरक में नास्ता कराने को कहे । कुछ देर बाद फूलवारी से पूछ-ताछ शुरू हुई तो वो कहने लगी--

''हुजूर, वो संग्राम सिंह गलत किया हुजूर । वही कमीना ग़लत किया । ''

फूलवारी अपनी छोटी आँचल से आँखों को पोंछते हुए कही -- ''साहब काम दिलाने दिल्ली ले जा रहा था, रस्ते में कहीं उतारकर इज्जत उतार दिया और छोड़ कर भाग गया । पाँच हजार रूपया भी ले भागा हुजूर । अब हम कहीं के नहीं रहे ....''

और तुम्हारा पति कहाँ है ?

वो माताल क्या करेगा साहब ! होगा कहीं कोठी में।

फूलवारी की नाजुक हालत देखकर इंस्पेक्टर साहब ने जल्द संग्राम सिंह का पता जानकर फूलवारी को अस्पताल भेज दिया और कांस्टेबल से कहा -- ''इलाज करा कर घर भेज देना ।

कहना, जाँच करके जल्द संग्राम को गिरफ्तार करेंगे । ''

कुछ दिन बाद जब फूलवारी गिरफ्तारी की सूचना लेने थाना आई तो इंस्पेक्टर साहब ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया-- ''काहे ला पीछे लगी हो? बाहर हुआ शान्ति नहीं है? घर पे हो, इ

चाहती हो क्या ? जाओ, फिर कहीं नौकरी ढूंढो ।''
फूलवारी बात समझ गयी और बेबसी में नम आँखों के साथ वहाँ से निकल पड़ी ।

फूलवारी के कदम इस बार घर की ओर न जाकर एस पी कार्यालय की ओर बढ़े । एक सप्ताह के अन्दर संग्राम सिंह सलाखों के पीछे था और इंस्पेक्टर ससपेंड हुए ।

फूलवारी का पति भी अब काम करने लगा । फूलवारी की फुफकार रंग लायी । 

पता- इच्छापुर, ग्वालापारा

      पोस्ट- आर . आई . टी .

      जमशेदपुर - १४

      झारखण्ड

फोन- +91 9973680146

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