गोवर्धन यादव की लघुकथाएँ

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अपने-अपने हिसाब से.

 

रामेश्वर ने एम.काम.की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी,और नौकरी के लिए जहाँ-वहाँ आवेदन भी कर दिया था. उसे पूरा भरोसा था कि जल्दी ही वह अपनी योग्यता के आधार पर नौकरी पा लेगा.

समय बीतता रहा. वह आशाएं संजोता रहा,लेकिन उसे अब तक सफ़लता नहीं मिल पायी थी. कुछ न कुछ तो करना पडेगा, यह सोचकर उसने एक कमरा लेकर कोचिंग-क्लासेस डाल दी. उसमें उसकॊ सफ़लता हाथ लगी. अब वह जमकर रुपिया पीट रहा है. बावजूद इसके मन में एक कसक अब भी बनी हुई थी कि सरकारी नौकरी मिल जानी चाहिए.

संयोग से संविदा शिक्षकों की व्हेकंसी निकली और उसने अपना आवेदन प्रस्तुत कर दिया और उसका सिलेक्शन भी हो गया. शहर से पचास किलोमीटर दूर उसकी पोस्टिंग हुई . वह स्थान रेल मार्ग से जुडा था, उसने मंथली पास बनवा लिया था. अब वह रोज सुबह आठ बजे रवाना होकर नौ बजे वहाँ पहुँच जाता और शाम सात बजे उसी ट्रेन में सवार होकर आठ-साढे आठ तक वापिस घर आ जाता और मुँह-हाथ दोकर पुनः अपने सेंटर जा पहुँचता. देर रात तक उसकी कोचिंग कक्षाएं चलती रहती. अब वह दो नावों पर सवार होकर निश्चिन्ता से अपना जीवन यापन करने लगा था.

धीरे-धीरे उसकी जान-पहचान अन्य लोगो से भी हुई जो उसकी तरह उप-डाउन करते थे. अब क्या था, ट्रेन में सवार होते ही पत्तों की बाजी लग जाती. सफ़र कैसे कट जाता, पता ही नहीं चल पाता था. कुछ दिनों उसके साथ सफ़र करने वालों में एक मित्र और आ जुडा, जिसके अपनी किराने की दूकान थी. धीरे-धीरे दोनों में काफ़ी अंतरंगता कायम हो चुकी थी.

एक दिन उसने अपने मित्र के सामने प्रस्ताव रखते हुए कहा:हम रोज-रोज तो आ -जा ही रहे हैं. यदि बारी-बारी से आने लगे तो क्या फ़र्क पडॆगा?. तुम्हारी अनुपस्थिति में मैं सारे पीरियड ले लूँगा, और तुम मेरे पीरियड ले लेना. इस बात पर प्राचार्य मानेंगे अथवा नहीं,मुख्य प्रश्न यह भी था. वे जानते थे कि प्राचार्य भी तो प्रतिदिन अप-डाउन करते हैं और कभी-कभी तो वे लंबा गोल भी लगा जाते हैं. उनके भी तो शहर में अपने बिजिनेस है. अतः ऐसी परेशानी नहीं आएगी,उनका अपना मानना था.

अब सब अपने –अपने हिसाब से आने-जाने लगे थे. किसी को किसी ने न तो कोई शिकायत थी और न ही आपत्ति..

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अतीत

 

माँ अपनी बेटी के साथ लौट रही है. ट्रेन ने अब स्पीड पकड ली है.वह द्रुत गति से भागी जा रही है.मां को इस बात संतोष हो रहा है कि उसने एक बडी झंझट से मुक्ति पा ली है और अब वह भविष्य में अपनी बेटी की शादी किसी अच्छे खाते-पीते घर में कर सकेगी. उसने बडॆ इत्मिनान से गहरी सांस ली और अब उसे नींद घेरने लगी थी. उसे याद नहीं आ रहा है कि उसने कभी इस बीच गहरी नींद ले पायी थी.कारण ही इतना संगीन था कि वह चाह कर भी नींद नहीं ले पायी थी. अब वह निश्चिंत होकर सो सकती है. लड़की गहरी उदासी में डूबी खिड़की से बाहर झांक रही है. पल-पल बदलते दृष्य देखकर और कम्पार्टमेंट के अन्दर उठते शोर से वह अविचलित है. वह कहीं और खोई हुए है. उसका डरावना अतीत बार-बार उसकी आंखों के सामने झूल जाता है. वह सोचने लगी थी-“ पता नहीं वह कौनसा मनहूस दिन था,जब उसकी जिन्दगी में हरीश का आगमन हुआ था.. आगमन अप्रत्याशित था. वह अपने लेपटाप में कुछ खोज रही थी. तभी चैटिंग के लिए वह आ उपस्थित हुआ. स्क्रीन पर उभरते अक्षरों के साथ वह रंगीन दुनिया में खोते चली गयी थी. बात यहां रुकी नहीं थी. मेलमुलाकातें भी होने लगी थी और एक अज्ञात युवक अचानक उसके दिल की धड़कन बन गया था. और एक दिन ऐसा भी आया कि सारी मर्यादाओं को तोड़ते हुए उसने उसके साथ शारीरिक संबंध भी बना लिए थे.दरअसल जिस खेल को वह अतिरेक आनन्द के साथ खेल रही थी,प्यार का ही अंग समझ रही थी,जब कि वह केवल वासना का गंदा खेल था.प्यार और वासना के बीच कितना फ़र्क होता है,वह उस समय समझ ही नहीं पाई थी. होश तो उसे तब आया,जब एक नया जीव उसके गर्भ में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका था. उसने कई बार हरीश को आगाह किया और शादी के बन्धन में बंध जाने की बात कही तो उसने दॊ टूक जवाब देते हुए कहा कि प्यार में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है. और अभी उसका मन शादी जैसे घटिया बंधन में बंध जाने का नहीं है.

हरीश की दलील सुनकर उसे लगा कि किसी ने हिमालय की सी ऊँचाई से उसे नीचे ढकेल दिया है. अब सिवाय रोने के, पश्चाताप करने के अलावा कॊई विकल्प नहीं बचा था,. उसका दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो गई थी. मन में आता कि छत से झलांग लगा कर आत्महत्या कर ले अथवा जहर पीकर इहलीला समाप्त कर ले.

मां की नजरों से यह बात ज्यादा देर तक छुप नहीं सकी थी. एक अज्ञात भय ने पूरे परिवार को अपनी जकड में ले लिया था. अब एक और केवल एक ही रास्ता बचा था और वह था ऎबार्शन करवाने का. मां ने अपने किसी रिश्तेदार की मदद से अच्छी खासी मोटी रकम डाक्टर को देते हुए एक भयावह और नारकीय जीवन से छुटकारा पा लिया था. मां अपनी सीट पर बैठी ख्रुर्राटे भर रही थी और वह अब तक जाग रही थी.पीछे छूट चुका अतीत अब भी भूत बनकर उसकी आंखों के सामने खडा अट्टहास कर रहा था.

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103 कावेरी नगर ,छिन्दवाडा,म.प्र. ४८०००१
07162-246651,9424356400

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