शनिवार, 25 मई 2013

बेटियाँ - दो कविताएँ

सुमित्रा पारीक की कविता - बेटियाँ

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बेटियाँ!

जीने का सहारा

हर दर्द की दवा

दिन भर की ऊर्जा होती है बेटियां

जीवन की जरूरत

बिन कहे समझ ले

दिल की तहों को जानती  है बेटियां

सूने आँगन में

खिलखिलाहट भर कर

जीवन का संगीत होती है बेटियां

हर पल में जीवन

भरने वाली

एक पल में दूर हो जाती है बेटियां

हर दुःख में दुआ

बन कर के आती

थपकियों सी राहत देती है बेटियां

जीवन के रोंम रोंम

में समां कर

पराया घर सजाती है बेटियां

हर पल दिल पर

दस्तक दे दे कर

इतना क्यों रुलाती है बेटियां

पिता के घर का

हृदय होती है ,

पति के घर की आत्मा बेटियां

कौन कहता है बेटी

बोझ होती है

प्रभु का दिया वरदान बेटियां

सुमित्रा पारीक ......समर्पित श्री सूरज प्रकाश जी कथाकार

19-5-13  

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मीनाक्षी भालेराव की कविता - बेटियाँ

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बेटियाँ

जीने के लिए साँसें होती है बेटियाँ 

आँखों का ख़्वाब होती है बेटियाँ 

जीवन का सवेरा होती है बेटियाँ 

सुनहरा प्रभात होती है बेटियाँ 

घर ,आंगन की खुशबू होती है बेटियाँ 

बगिया का फूल होती है बेटियाँ 

दिल का सकूं होती है बेटियाँ 

खाने का स्वाद होरी है बेटियाँ 

नमक सा स्वाद होती है बेटियाँ 

जन्म का सार होती हैं बेटियाँ 

इन्हें परवाज चढ़ने दो ,जिन्दगी की जंग में 

हर  मुश्किलें आसान करती  है बेटियाँ 

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मीनाक्षी भालेराव की दो अन्य कविताएँ -

सबक

रटते रहे हर बार

जिन्दगी का सबक 

हर बार भूल जाते !

इधर-उधर की सोच कर

अपना पढ़ा,समझा 

छोटा लगने लगा !

औरों के किये में 

दम लगने लगा !

लाख मुझ मैं होंगे

अच्छाइयों के रंग कई 

एक काला रंग जो 

मुझ पर चढ़ा मेरे रगों को 

ढंक गया काला सब 

काला कर गया !

 

खबर

आज अखबार में खबर छपी थी 

रोज की तरह !

खुले  अखबार पर नजर पड़ी तो 

आँखे शून्य हो गयी !

लगा वही तो है मैं दंग रह गयी 

छपी सूरत देख कर !

लगा जैसे मेरी आँखों का धोका हो 

कल शाम की ही बात है !

जिन्दगी के सारे इम्तिहान पास कर 

वो इस मुकाम पर पहुंचा था !

बचपन से इस  दिन का इन्तजार था 

बहुत बड़ी कम्पनी में ! 

बहुत अच्छी नौकरी  पाने का सपना 

कल ही आया था !

मिठाई का डब्बा लेकर बहुत खुश था 

रात ढेर सी  बातें की !

आज आतंकी हमले का शिकार हो 

अखबार के पन्ने पर !

उसकी मोंत की खबर तस्वीर के साथ !

2 blogger-facebook:

  1. aaj ka samay hi aisa hai ki pata hi nahin chalta kab kya ho jaye kab aaj ateet ban jaye

    उत्तर देंहटाएं
  2. meenakshi bhalerao12:15 pm

    जी यह मेरी आप बीती है जिसने मेरे पुरे अस्तित्व को हिला कर रख दिया था यसे मेने कविता की शक्ल में आप तक पहुंचाया है

    उत्तर देंहटाएं

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