June 2013

रामवृक्ष सिंह की कहानी - घर की तलाश

कहानी घर की तलाश डॉ . रामवृक्ष सिंह उस सुबह दफ्तर आते समय बस पकड़ने के लिए मैं बस स्टैण्ड पर पहुँचा ही था कि पहले से वहाँ खड़ी एक महिला ...

सप्ताह की कविताएँ

श्याम गुप्त १. क्यों धड़के वह दिल दिशा बोध जिस दिल में नहीं हो उसको हलचल से क्या लेना | प्रीती भाव जिस ह्रदय नहीं हो, उसको धड़कन से क्या लेना...

राजीव आनंद का आलेख - 30 जून-झारखंड़ में संथाल हूल की 158वीं वर्षगांठ पर विशेष

30 जून-झारखंड़ में संथाल हूल की 158वीं वर्षगांठ पर विशेष झारखंड़ में बिरसा मुंड़ा के जन्‍म से कई वर्षों पहले संथाल परगना के भगनाडीह गांव में...

पद्मा मिश्रा का आलेख - गांधी और कबीर

-- कबीर जयंती पर आलेख --पद्मा मिश्रा गाँधी और कबीर [एक तुलनात्मक विवेचन ] पूजित था जीवन में ,मानव का प्रेम जहाँ , भक्ति ,प्रेम ,सेवा के व...

सुशील यादव का व्यंग्य - हमारा (भी) मुंह मत खुलवाओ

  उ नको मुंह बंद रखने का दाम मिलता है। कमाई का अच्छा रोजगार इन्ही दिनों ईजाद हुआ है| सुबह ठीक समय पर वे दफ्तर चले जाते हैं। खास मातहतों को क...

बसंत भट्ट की कहानी - डर का अहसास

                      डर का अहसास                बात उस समय की है। जब अपने मामा के वहा रहता था। मेरे मामा एक किसान थे| जो उतरांचल के  पहाड़ी...

उमेश मौर्य की व्यंग्य कहानी - अंगूरी जनता

अंगूरी जनता गणित, मैथ और अंग्रेजी ये तीनों विषय मेरे पैदा होने के पहले से ही कमजोर थे। आकलन करना, अन्‍दाजा लगाना तो मेरे लिए टेढी जलेबी थी...

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - घृणा

घृणा मैं जीटी रोड पर पहुँचने वाला था। देखा उधर से रामू मुस्कराता हुआ चला आ रहा है। मैंने पूछा क्या बात है भाई ? बड़े खुश दिखाई दे रहे हो। रा...

सुधीर मौर्य की कहानी - सुबह की कालिमा

सुबह की कालिमा अंकिता आज थोड़ा उलझन में है। वो जल्द से जल्द अपने रूम पर पहुँच जाना चाहती है। न जाने क्यूँ उसे लग रहा है, ऑटो काफी धीमे चल ...

पुस्तक समीक्षा - प्रीत मंजरी

पुस्तक का नाम – प्रीत मंजरी ( काव्य – संग्रह ) लेखिका का नाम – डॉ प्रीत अरोड़ा प्रकाशक --- देवभूमि प्रकाशन ,नैनीताल पुस्तक मूल्य – ९० रूपये...

साताप्पा लहू चव्हाण का आलेख - विष्णु प्रभाकर और वर्तमान रचनाधर्मिता

साक्षात्कार द्वारा अभिव्यंजित साहित्यकार विष्णु प्रभाकर और वर्तमान रचनाधर्मिता - डॉ. साताप्पा लहू चव्हाण Email : drsatappachavan@gmail.com ...

डाक्टर चंद जैन "अंकुर " की कविता - माँ और मैं

शरीर और आत्मा के योग से जीवन का निर्माण हुआ है । माता ,पिता माध्यम है किसी भी जीव के अवतरण का, पर जन्म देने वाला माँ है और जन्म लेने वाला &...