गुरुवार, 6 जून 2013

जसबीर चावला की क्रिकेटिया कविताएँ - भाग 2 : क्रिकेट कलंक कथा

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क्रिकेट कलंक कथा
.........................
                       जसबीर चावला -
क्रिकेट को ओढे
क्रिकेट बिछाएं
क्रिकेट को अपने
मन में बसाएं
दायें बाएं
जहाँ भी जाएँ
क्रिकेट ही पायें
क्रिकेट चबाएं
क्रिकेट ही खाएं
     **
ये तेरा क्रिकेट
ये मेरा क्रिकेट
तू बचा मेरा विकेट
मैं तेरा विकेट
कुछ प्लेयर
तेरे चेहरे
कुछ बुकी
मेरे मोहरे
तेरे चट्टे
मेरे बट्टे
भारी फिक्सिंग
भारी सट्टे
     **
चीअर गर्ल के
छल्ले हैं
लड़कियों के
दल्ले हैं
गलबहियाँ  डाल रहे
इनकी बल्ले बल्ले है
आओ सबको मूर्ख  बनायें
क्रिकेट को ओढे
क्रिकेट बिछाएं

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वाचाल चुप
---------
           -जसबीर चावला
चुप है धरती चुप हैं चाँद सितारे
चुप है धोनी चुप है सिद्धू
चुप हैं खिलाड़ी प्यारे
चुप हैं शिल्पा चुप हैं जिंटा
चुप हैं शाहरुख़ हमारे
चुप हैं कोच चुप हैं अम्पायर
चुप हैं मालिक सारे **
** मारल:एक चुप सौ सुख

--------------------------

 

मोनालीसा और धोनी
~~~~~~~~~~~~~
                 -जसबीर चावला
बीत गये               
पांच सौ साल
जब
लियोनार्डो डी विंची
की मोनालीसा
मंद मंद मुस्काई
       *
सम्मोहिनी
मुस्कुरा रही
पेरिस के लूवृ में
आज भी
         *
क्यों मुस्काई
मोनालीसा
रहस्य है
बरकरार
           *
किस सदी में
कब खुलेगा
कौन खोलेगा
रहस्य
इस मुस्कान का
         **
धोनी भी मुस्कुराये
मोनालीसा की तरह
मौन रहे
रहस्यमयी बने
अनुत्तरित रहे
ताकते रहे
पत्रकारों को
पत्र वार्ता में
         *
कभी ना कभी
उठेगा पर्दा
खुलेगा राज
मोनालीसा/धोनी
के मौन का
मुस्कान का

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7 blogger-facebook:

  1. sharad joshi ke lekh andha yug cricket ka ki yad ho aai. aapne achha likha he.

    उत्तर देंहटाएं
  2. जसबीर जी जबरदस्त व्यंग्य भरी कविताएं। जहां सबकी गोटिया लाल हो रही हो तो फिक्सिंग पर केवल मुस्काना सामने वाले को मुर्ख बनाने जैसा है और ऊपर कडवाहट भरी मंद मुस्कान। भयानक है। आपने सही पकडा पर अफसोस हम भी केवल मुस्का सकते हैं, आखों से हम सभी देख रहे हैं पर केवल क्रिकेट नहीं तो चारों तरफ फिक्सिंग ही फिक्सिंग शुरू है। जी तो बहुत करता है कि इनकी मौज-मस्ती और मुस्कान पर थूंक दें। पर किस-किस पर थूंके। थूंक-थूंककर अपना पानी कम हो जाएगा। हां अपनी ईमानदारी पर कायम रह सकते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. Akhileshchandra srivastava11:05 am

    Achcha likha hai bhai chawal ji badhai isi prakar likhte rahiye

    उत्तर देंहटाएं
  4. सटीक टिप्पणी के लिये धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  5. ek paripakv vyang. bahoot hi kam shabd par adbhud. Jo bhi aapko janta ho aapse prabhavit hue bina hani reh sakta.

    उत्तर देंहटाएं

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