रविवार, 9 जून 2013

जसबीर चावला की क्रिकेटिया कविताएँ - भाग 3 : दुरभिसंधि:क्रिकेट

दुरभिसंधि:क्रिकेट
~~~~~~~~~~~
       -  जसबीर चावला
चुप चुप
स्पाट फिक्सिंग
गुप चुप
मैं भी चुप
तू भी चुप
   *
छुप छुप
देश में छुप
विदेश में छुप
मीडिया से भाग
कहीं भी छुप
     *
रुक रुक
होटल में रुक
डील कर
फील कर
इन्द्रिय लोलुप
       *
भिड़ा तुक
फंसा हुक
डाल अड़ंगें
हम्माम में नंगे
पूरा झुक

---

सखी वे मुझसे कह कर जाते
************************

                      -जसबीर चावला

पच्चीस सौ साल पूर्व
नींद से उठी यशोधरा
बगल में लेटे
तथागत गायब
पलायन बाद
गौतम बुद्ध कहलाये
यशोधरा का त्याग/पीड़ा
'सखि वे मुझसे कह कर जाते'
~~~~~~~~~~~~~~~~~
                *
चौदह बरस का बनवास
राम सीता गमन
साथ भाई लक्ष्मण
सीता के संग राम
विवाहित उर्मिला
विरहिणी एकाकी
उर्मिला का त्याग/पीड़ा
'सखि वे मुझे वन लेकर जाते'
~~~~~~~~~~~~~~~~
                  *
इन्हीं दिनों की बात
जमानत पर छूटे
अंकित चव्हाण का साथ
ले हाथों में हाथ
मंगेतर नेहा ने रचाया ब्याह
कोर्ट में समर्पण
अधूरे हनीमून की कसक/पीड़ा
'सखि मुझे भी जेल लेकर जाते'
~~~~~~~~~~~~~~~~~~

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------