जसबीर चावला की क्रिकेटिया कविताएँ - भाग 3 : दुरभिसंधि:क्रिकेट

दुरभिसंधि:क्रिकेट
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       -  जसबीर चावला
चुप चुप
स्पाट फिक्सिंग
गुप चुप
मैं भी चुप
तू भी चुप
   *
छुप छुप
देश में छुप
विदेश में छुप
मीडिया से भाग
कहीं भी छुप
     *
रुक रुक
होटल में रुक
डील कर
फील कर
इन्द्रिय लोलुप
       *
भिड़ा तुक
फंसा हुक
डाल अड़ंगें
हम्माम में नंगे
पूरा झुक

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सखी वे मुझसे कह कर जाते
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                      -जसबीर चावला

पच्चीस सौ साल पूर्व
नींद से उठी यशोधरा
बगल में लेटे
तथागत गायब
पलायन बाद
गौतम बुद्ध कहलाये
यशोधरा का त्याग/पीड़ा
'सखि वे मुझसे कह कर जाते'
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                *
चौदह बरस का बनवास
राम सीता गमन
साथ भाई लक्ष्मण
सीता के संग राम
विवाहित उर्मिला
विरहिणी एकाकी
उर्मिला का त्याग/पीड़ा
'सखि वे मुझे वन लेकर जाते'
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                  *
इन्हीं दिनों की बात
जमानत पर छूटे
अंकित चव्हाण का साथ
ले हाथों में हाथ
मंगेतर नेहा ने रचाया ब्याह
कोर्ट में समर्पण
अधूरे हनीमून की कसक/पीड़ा
'सखि मुझे भी जेल लेकर जाते'
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