जसबीर चावला की सामयिक हास्य-व्यंग्य कविताएँ

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गोआ में धड़ाम
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तोड़ मरोड़
टुकड़ा जोड़
गिनती कर
जोड़ बेजोड़
*

ओर दौड़
तेज दौड़
राजनीतिक रेस
घुड़दौड़
*

कर होड़
अडवानी छोड़
इसी पढ़ाव
इसी मोड़
*

रणछोड़
बने हंसौड़
करो बैठकें
ताबड़तोड़
*

भण्डाफोड़
निकालो तोड़
इधर खाज़
उधर कोढ़
**


मस्तकाभिषेक
~~~~~~~~



न चाल बदली
न चरित्र
न चेहरा


एक फोटू
हटाया
एक फोटू
बदला

मोदी के सिर
कर आरती
बांधा सेहरा
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