बुधवार, 19 जून 2013

जसबीर चावला की सामयिक हास्य व्यंग्य कविताएँ व कणिकाएँ - आल इज वेल


आल इज वेल
..........
-जसबीर चावला

पापा पापा
हां बेटा
राजनीति खेलें
हां बेटा
मम्मी का बेटा
हां बेटा
पापा का बेटा
ना बेटा
?.....?.......?

मारल ः राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता

-------------

आओ गठबंधन तोड़ें
.............
    -  जसबीर चावला


घात          हुआ
प्रतिघात    हुआ
            +

तनी        मुट्ठीयां
आघात        हुआ
            +

शब्द  बाण    चले
विश्वासघात  हुआ
            +

गुर्राये  बड़बड़ाये
सन्निपात      हुआ
              +

पेट दिमाग बंद  हुए
शहर में उत्पात हुआ
              +

मर  गई    संवेदना
तन में पक्षाधात हुआ

--------------

नौ कणिकाएं
............
-जसबीर चावला

बीते
दिन
रीते
~*~
पल
आना
कल
~*~
रूक
मत
झुक
~*~
आई
रुकी
गई
~*~
आग
गई
जाग
~*~
प्रेम
खुला
फ्रेम
~*~
रात
खुला
गात
~*~
दिन
तारे
गिन
~*~
हारा
जग
मारा
[]*[]

          "आय बट व्हाय"-"हूं पर क्यूं"-इंग्लिश में लिखी इस अर्थ पूर्ण कविता की तर्ज पर ये लघू कणिकाएं/कविताएं अचानक एक कौंध-एक छपाक् की ध्वनि करती हैं ओर फिर गहरा मौन/गुड़ुप...........!

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विचारों के बंदी
''''''''''''''''''
-जसबीर चावला

ये  न    दवा  करते    हैं
न    ये  दुआ  करते    हैं
            ~*~
टी वी    के  चेनलों    पर
बस  हुआ  हुआ  करते  हैं
            ~*~
बंदी    हैं  कुंद  विचारों  के
गैर    को  बंधुआ कहते हैं
            ~*~
बोलते  गुलामी  की  बोली
हम पिंजरे का सुआ  कहते हैं
            ~*~
देश को  मारते  निस  दिन
श्राद्ध  में हलुआ  करते हैं
            ~*~
बहस  को  जिंदा  रखना  है
ये  तो  बददुआ  करते  हैं
            ****



2 blogger-facebook:

  1. achchhi hain
    sochney ko majboor karti hain
    yadi hamney sochna band na kiya ho!

    Surendra Bothra 'Manu'

    उत्तर देंहटाएं
  2. akhileshchandra srivastava4:05 pm

    Chawal ji ne short aur sweet likha hai vastav me kam se kam shabdon me baat kahna kala hai aur aaj ke vyast sansar ki awashykta bhi badhaiee

    उत्तर देंहटाएं

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