रविवार, 2 जून 2013

अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव की 'किसी लड़की का दिल' व अन्य कविताएँ

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किसी लड़की का दिल

किसी लड़की का दिल ..........
मुर्गियों का दड़बा नहीं होता ........
कि एक मुर्गी रखो ...कुछ दिन ...
उसे मार डालो ...
दूसरी रखो ..जब तक चाहो ....
फिर उसे भी मार डालो ...
खेलो उसके साथ ...

 

लड़की का दिल ....
तो मंदिर होता है  पावन पवित्र….
सीधा .....सच्चा ....
जिसे अपना ...माना ..
बसाया मंदिर में ......
देवता बनाया .......
अपना ....अपनी आत्मा का ....
सर्वस्व  का ....
वोह कभी नहीं निकलता
देवता कभी नहीं बदलता .....


लड़की का दिल ..
बड़ा कोमल सहृदय होता
कोमल कल्पना में रहता ..
पलता ...रहता ....
कभी माँ का ...कभी पत्नी का ..
कभी बहिन का
और कभी प्रेयसी  का ......
लड़की का दिल ही तो…
दया से ..प्यार ...से ..सराबोर रहता ....
केवल देना जानता ...
पाने की चाह नहीं करता .....


लड़की का दिल…
एक आदर्श है जीवित आज भी ....
उन तमाम दिलों के लिए ...
जो करते हैं लूट ...खसोट ...
कतल ..डकैती ..और ना जाने क्या ...क्या ..


काश ...........हर दिल ....
लड़की का दिल होता ..
तो आज यह विश्व ........
स्वर्ग होता ...
केवल स्वर्ग होता ...
निखालिस स्वर्ग होता
निखालिस स्वर्ग होता

शब्द महिमा
शब्द यदि क्रम से बोला जाय ....
तो मंत्र है ........
शब्द यदि कड़ वाहट  से बोला जाये ...
तो मारक यन्त्र है
शब्द  नरमी से बोला जाये तो
पिघलते हैं दिल ...
शब्द शर्मा के बोला जाये तो
मिलतें हैं दिल ......
शब्द की मार अति भयंकर है ...
शब्द की धार अति भयंकर है ...
काटते हैं शीश तलवार की धार बन…
जब यही शब्द ...
न्यायाधीशों की कलम से निकलतें हें
शब्द का प्रयोग जिसने जान लिया
मानो सारी दुनिया को पहिचान लिया ..

शब्द दिलाएंगे आपको आदर ..स्नेह
शब्द सरस हैं तो बरसेगा नेह
शब्द की महिमा को अतः पहिचानना होगा ..
शब्द क्या हैं ये जानना होगा
शब्द की गाडी पर सवार मीठी वानी
करती है बड़ी बड़ी आगों को पानी ..
शब्द की खेती को अतः लहलहाते रखिये
शब्द का उचित प्रयोग सदा करते रहिये
शब्द फिर दिलायेंगे आपको आदर ..
शब्द फिर आपके साथ को निभाएंगे
शब्द को यदि आपने अपना लिया
शब्द आपको अपना बनायेंगे
अतः लाजिम है कि शब्द का प्रयोग ....
संभल के करो ..
शब्द जो कोष से तुम्हारे निकलें वे अच्छे हों ..
गुदगुदाएँ दूसरों के मन ..आपको भी हर्षित करें
शब्द के इस अंबार में अच्छे शब्दों का संग्रह करे
अच्छे शब्द संग्रह करें ..
अच्छे शब्द संग्रह करें ....
और उचित समय पर उचित शब्द का ..
प्रयोग करें ..........
औरों को हर्षित करें ....
स्वयं भी हर्षित रहें

 

--

काश

काश इस देश मैं ....

ऐसा कुछ हो जाता ...

कि देश से राजनीति में छाया ...

घिनौना पन समाप्त हो जाता ...

ये आरक्षण वाद ..ये जाति वाद

ये अगड़ी पिछडी जातियाँ ..

ये प्रदेशों की राजनीति ..

ये भाषाओँ पर लगती बोलियाँ ...

काश ऐसा कुछ हो जाता

कि देश के नेताओं का बौना  पन ...

समाप्त हो जाता ..

वे अपनी पार्टियों ...हितों से आगे भी ...

कुछ देखते     कुछ सोचते

देशहित में कुछ करते ...

काश ऐसा कुछ हो पाता ...

कि इस देश से ..

भ्रष्टाचार का दानव

हमेशा हमेशा के लिये चला जाता ..

हम निज हित से आगे कुछ देश की ...

समाज की भी सोचते

इस देश में दहेज़ हत्याएँ न होतीं ..

बलात्कार अपहरण न होते ...

इस देश का न्याय जीवित रहता ..

अन्यायी को दण्ड मिलते ..

हम अपने काम को ईमानदारी से करते

देश की सरकारी ..जन सरकारें ...

ईमानदारी पर चलतीं ..

यहाँ की योजनाएँ .
कागज़ से बाहर निकल ..

यहाँ की ज़मीन पर भी दिखतीं

यहाँ के नेता देश को    
दिवा स्वप्न दिखाना बंद करते
देश के बारे में सोचते और करते ..

मानव और मानवता का ध्यान रखते ..

काश ऐसा होता इस देश में

काश ऐसा ही होता इस देश में ..

काश ऐसा ही होता इस देश में

तो यह स्वर्ग बन जाता ..

जीने लायक बन जाता ...

मैंने तो प्रार्थना कर दी है
आप भी करिये ...

क्या पता भगवान किसकी सुन लें

और इस देश का भला हो जाये ...

आमीन ...आमीन ...आमीन ..

ऐसा ही हो ...

---

तेरा अभीष्ट प्राप्त होगा

मरना ..जीना महज़ एक संयोग है
हँसना ..रोना .महज़ एक संयोग है
प्रेम ..मोहब्बत भी महज़ एक संयोग है
तुमसे मुखातिब होना भी एक संयोग है
तुम     इस संयोग को मुकद्दर मानो या किस्मत
इसे भाग्य मानो या luck
तुम्हारा इसमें क्या योगदान है ....?
हाँ ईश्वर बहुत महान है ....!
वो देता है बिना मांगे ...
पूरी करता है सबकी इच्छाएँ ...
तामीर करता है सबके ख्वाब ....
पर कभी सुना है ......
कि God help those...
who helps themselves
अर्थात मुख खोले शेर के मुख में ...
शिकार स्वयं नहीं कूद पड़ता ...
शेर को भी शिकार पाने  हेतु ..
प्रयास रत होना पड़ता है ..
और तुम पाना चाहते हो ...
सबकुछ  कर्म के बिना ...
मुख खोले  शेर के समान ...
ऐसा हर्गिज़ नहीं होगा ..
तुम्हें प्रयास ही नहीं.....
भरपूर  प्रयास करना होगा
भागना दौड़ना और  श्रम करना होगा ..
क्योंकि कर्त्तव्य की गरिमा से ही ..
भरे पड़े हैं तमाम धर्म शास्त्र ..
अगर  दुनिया में यदि ..
कुछ पाने की इच्छा है…
तो प्रयास करो ..
प्रयास  करो .......
जी तोड़ मेहनत करो
फिर सभी संयोग भी  संभव  होंगें ..
ईश्वर भी कृपा करेगा ...
और हे मानव तुझे तेरा ..
अभीष्ट  प्राप्त होगा
अभीष्ट  प्राप्त होगा
अभीष्ट  प्राप्त होगा 

---

कभी ध्यान से सुनो

कभी ध्यान से सुनो ....
रामायण के छंद .....
गीता के बोल ....
अज़ान की आवाजें
या बाइबिल की प्रीचिंग ....
तुम्हें मिलेगी सब में ...
इंसानियत की शिक्षा ...
अच्छे काम करने की हिदायत ...
बुराइयों से दूर रहने की जरूरत ...
तमाम मानव मात्र ...प्राणियों पर दया ...
जीवन को ठीक से .......प्रेम से जीने के उपाय ...
नुस्खे ........
इनमें से कोई नहीं सिखाता .....
लोगों पर जुल्म करो ....
उन्हें लूटो ..पाटो ...जान से मार दो ...
उनकी औरतों को बेईज्ज़त करो ...
उनके घर जला दो ...
भोंक दो छुरा किसी अन्जान ...
मासूम जान को ....
जब हमें नहीं सिखाते हैं हमारे धर्म ग्रंथ ...
यह सब ...तो फिर ...
हम धर्म के नाम पर जो  उपरोक्त सब  करते हैं ...
क्या वे धर्म संगत हैं ...न्याय संगत हैं ...

वास्तव में हमें करते गुमराह ...
राजनीतिज्ञ ...गुंडे ...
विदेशी .एजेंट ....
विकृत मनोवृत्ति के लोग ..
अब ये हमारा फ़र्ज़ है कि हम ...
न हों गुमराह ...इन सब से
न हो दिशाभ्रम ,,,न हों भ्रमित ..
"फेल"  कर दें इनके इरादे ...
करें मनुष्यता से प्यार ....
और पहुँचा दें अवांछित व्यक्तियों को ..
उनके सही ठिकाने पर ....
जहाँ के वे काबिल हैं ...

पर हमारी उदासीनता ...
हमारा आलस ...
ले डूबता है सारा प्रयास ...
गुण्डे करते हैं राज ...
राजनीतिज्ञ पालते हैं गुण्डे ...
जनता बहकती है ...बहकाई जाती है ..
दंगे होते हैं .....घर जलते हैं ...
छुरे भोंके जाते हैं ...
मरते हैं अनजान मासूम
मज़े की बात है ये सब ...
धर्म के नाम पर होता है ...
अब यह बात  अलग  है कि ...
कौन सा धर्म कहता है ...
यह सब करो ...यह सब करो
यह सब करो ..........
कभी ध्यान से सुनो ..
रामायण के छंद ..
गीता के बोल ...
अज़ान की आवाजें ...कुरान की आयतें ..
बाइबिल की प्रीचिंग ...
असलियत सामने आ जायेगी ..
असलियत सामने आ जायेगी ..
----

आवारा कुत्ता और मैं

एक दिन अचानक जब ...
गली में जाते जाते ....
आवारा कुत्ते ने काट खाया ...
मैं दर्द से चिल्लाया ...
दिल मुँह में हो आया ....
तमाम बदन और मुँह पर पसीना ...
छल छाला  आया ....
बहुत गुस्सा भी आया
मैंने एक बड़ा सा पत्थर उठाया ...
कुत्ते पर दे मारा ...वोह गिरा .......
दर्द से छटपटाया ...
हाथ ..पैर फेंके ...
और देखते ही देखते ...
ठंडा हो गया ...
कुत्ते के प्राण पखेरू उड़ गए  ..
लोंगो के मेले लग गए
लोग कभी कुत्ते को ..
कभी मुझे देखते थे ...
कुछ बोले ,,,
बहुत अच्छा किया ....
कट खन्ना कुत्ता था
हर किसी को बिला वज़ह ..
काटता फिरता था ...
बच्चे बूढ़े जवान ...
सभी संतृस्त थे
उस कुत्ते के आगे पस्त थे ...


किसी ने कहा कि भाई साहब ..
काटा था तो क्या ..
इंजेक्शन लगवा लेते ..
पर जीव हत्या तो न करते
कोई बोला भाई साहब  आपने अच्छा नहीं किया ..
जीव दया वालों से नाहक पंगा लिया ..
वे आते  ही होंगे ......
अब आपकी वो ही ख़बर लेंगे ..
अचानक दिखी एक वर्दी ...
पुलिस का सिपाही ..
अरे भाई इस कुत्ते की ...
दिन दहाड़े हत्या किसने कर डाली
किसकी है शामत आयी ......
"मेनका जी " से ले लिया पंगा ...
अब शहर में हो के रहेगा दंगा ...
लोगों ने मेरी ओर इशारा किया ...
सिपाही ने मुझे एक किनारे लिया .....बोला
ज़नाब बवाल में फँस जाओगे ...
"सौ रूपये निकालते हो ...या
हथकड़ी लगवाओगे ..."
मैंने कहा "सौ रुपये किस लिए"..
बोला थाने  चलो ..सब समझ जाओगे ..
दो दिन बंद रहोगे ...
मार खाओगे ..तब सब जान जाओगे ..
अरे भैया " कुत्ते की हत्या पाप है
कानूनन जुर्म है
उसमे भी अदालत है जुर्माना है
बोलो जेल की हवा खाना है ..."


मैं कुत्ता काटे का दर्द भूल चुका था .....
मेरा प्यास से हलक सूख चुका था
मुझे हवालात दिखती थी
यमदूत सा सिपाही दिखता था
मरता न क्या करता ..
सिपाही जी को पटाया .....
5 0  का नोट पकडाया ..
कान को हाथ लगाया ...
कसम खाया ...
सिपाही जी गल्ती हो गयी ..
कुत्ते ने काटा था उसे सलाम करता ..
पर कुत्ते को कभी ना मारता ..
क्या करूँ किस्मत ख़राब थी
दिल में मेनका जी की याद थी


क्या अज़ीब देश है अपना भी ..
लोग रोज़ मरते हैं ....मारे जाते हैं ...
सड़कों पर पड़ी रहती हैं ..लाशें ...
फोटो खिचतें हैं ...तफ्शीश होती है....
पर ना ही  फ़िक्र करता है कोई ...
न जनता न पुलिस न और  कोई .....
अगर गल्ती से पकड़ा भी जाता है
मारने वाला ...,अदालत से छूट जाता है


पर कुत्ते को मारने पर ...
जीव दया वाले दौड़ पड़ते हैं
लगाते हैं तमाम तोहमत मारने वाले पर
जबकि इन्सान को मारने पर चर्चा नहीं होती
जीव दया वालों को कोई फ़िक्र नहीं होती
काश ...इंसान को भी सही जाना जाता
कम से कम कुत्ते से तो बेहतर ....
माना जाता
कम से कम कुत्ते से बेहतर माना जाता
कम से कम कुत्ते से तो बेहतर माना जाता

 

--

मुझे नहीं  अच्छे  लगते

मुझे नहीं  अच्छे  लगते  हैं .......
सूखे पेंड .....गिरे  हुए  पत्ते ...
टूटे हुए  काँच ..............
रुकी  हुई  घडी ....बीमार  लोग…
 
जलती चिताएँ ......
मार - काट ............
क्योंकि  ये  जीवन के विपरीत ..........
जीवन के उलट स्थितियाँ  हैं
 
 
हरे भरे ......फलदार पेड़ .......
प्यारी सुहानी हवाएँ
कांचों से सजी बिल्डिंगें  ....
चलती और समय का पता  देती  घडी
स्वस्थ लोग ......जीवन से सराबोर ...
सब तरफ भाईचारा ...प्रेम ..........
मुझे बहुत तसल्ली देते हैं ....
उस ईश्वर पर विश्वास करने को दिल होता  है
जिनके सृजन ने इन्हें रचा है
 
 
काश सब कोई जीवित रहते सदैव ......
हँसते बोलते बतियाते ...
.तो ..जीवन ...
कितना अच्छा होता ..
मुझे  भाता  और  स्वर्ग  सरीखा होता ...
 

---

ये जनता ये समाज

ये कहना कि ..इस देश में ....जनता
अंधी बहरी और गूँगी है .....
सही नहीं है .....
हाँ उसकी दृष्टि     कमजोर है
कम दूर तक देख पाती है ....
पूरी बहरी भी नहीं है ....केवल ...
भारी कोलाहल और शोर ...
सुन पाती है ....
पूरी गूँगी भी नहीं है ...
क्योंकि कभी कभी जोश में आकर ...
दबी जबान ...जो गलत हुवा ...
उस पर चर्चा भी करती है

इतना ही नहीं उसकी याददाश्त भी ..कमजोर है
किसी प्रकार की गम्भीर बात भी ...
दिल दहलाने  ..वाली घटना भी
किसी के दारुण अत्याचार भी ...
शीघ्र भूल जाती है
हमारी न्याय प्रक्रिया बहुत सुस्त है
बरसों बरस मुक़दमे चलते है ....
गवाह सबूत वकील अपील ..
बहस मुबाहसा में
सत्य बिचारा घुट जाता है ..
मुर्दा पड़ा रहता है
हत्यारा छूट जाता है
एक एक कर टूट्ते हैं गवाह
मिटाए जाते हैं सबूत ..
कुछ मुट्ठियाँ गर्म
कुछ ज़ेबे भारी ....
गवाहों को इतना तंग किया जाता है
कि वे गवाही से तोबा कर लेते हैं
मुर्दा पूछता है कि जब हत्यारे ने नहीं मारा ..
तो क्या मैं यूँ ही मर गया ...?
अदालत कहती है पुलिस का प्रॉसिक्यूशन का केस कमजोर है
सबूत नहीं है गवाह भी सही नहीं है
अतः अपराधी ..छूटेगा ही ..
पहले केस मजबूत करो ...?
कभी कभी प्रॉसिक्यूशन को एक नसीहत भी
कभी मौखिक कभी लिखित ...मिल जाती है
सब निश्चिंत है (everything is fixed)
फिर मुर्दे का कोई नजदीकी ..
लेता है ........बदला ..
खून का बदला खून ..
ये खेल अविरत चलता है
कई लोगों का घर भरता है
कई का धंदा चलता है।

अदालतें भी इसी सब पर निर्भर हैं
ये जलाई जाती बहुएं
ये फाँसी लगाती बहुएँ ..
दहेज़ का दानव ...
उसकी भूख ही नहीं मिटती ..
लालच चरम पर है
हर एक को बिना मेहनत ..
ढेर सा पैसा चाहिए ..
काहे की बहू ........
एक मरी ...हज़ार मिलेंगी
अदालतों के चक्कर काटते लोग
पर कुछ भाग्यशाली लडकियाँ  समय पर ..
बच जाती हैं या बचाई जाती हैं
जीती हैं स्वाभिमान की जिन्दगी
जान है तो जहान है
उस नरक से निकल आये अच्छा  हुआ
खुद कमाएंगे खायेंगे
जियेंगे शान से अपनी  जिन्दगी
स्वाभिमान के साथ
जिन्दगी ऐसे ख़त्म करने के लिए नहीं होती
जीने क लिए ...शान से जीने के लिए होती है
फिर देखा जायेगा ....यदि ..
कोई उचित साथी मिला
तो घर भी फिर बस जायेगा
पर… ज़िल्लत की जिंदगी क्यों जीना
रोज़ रोज़ अपमान का ज़हर क्यों पीना
वोह हुआ जो धोखा था
अच्छा हुआ जो समय से निकल आये
पीछे अपने वो ज़हालत और ज़लालत छोड़ आये
समाज का क्या ....
वोह तो मुर्दा है
न किसी कि मदद करता है
न कोई सहयोग देता है केवल छींटा कशी ...
और बरबादियाँ बोता है
ऐसे समाज की परवाह ..
हम कहाँ तक और क्यों करें
जो अति ताइयों को सज़ा नहीं देता है
जो सताने वालों का साथ देता है
दूसरे के साथ घटने पर खुश होता है
अपने साथ होने पर चार चार आंसू रोता है ...
अतः अपने विवेक पर ..विश्वास करो
अपने लिये जियो ...अपने लिये मरो ....
बहादुर बनो ..विजयी बनो ..
विजयी बनो विजयी बनो 

--

तुम्हारी तुम्हारी फोटो से ...बातचीत

तुमने कहा " हाँ "........मैंने  कहा  "हाँ "
तुमने कहा " ना "...मैंने कहा ....."ना "
तुमने कहा "दिन ".......मैंने कहा "दिन "
तुमने कहा "रात "........मैंने कहा  "रात "
मैंने तुम्हारा हर बात में साथ "निभाया "
तुमने पर  मेरा  साथ  छोड़     दिया
मुझे अकेले "छोड़ दिया ".............
तुमने कहा  था सात जन्मों का साथ "निभाउंगी "
सदा तुम्हारे साथ  रहकर  तुम्हें ..."अपनाऊंगी "
पर तुमने  साथ "  छोड़ दिया "
मुझे मझधार  में" छोड़ दिया"
कहने को तो यह ईश्वरीय  खेल है
तुम्हारा कोई  कसूर नहीं ........उसकी मर्ज़ी है
तुमने जीवन के लिए बहुत संघर्ष  किया ...
जीने के लिए ...मेरा  साथ निभाने  के लिए
मैं  नहीं कहता कि ये तुम्हारी खुदगर्जी है
ईश्वरीय विधान के  आगे  सब मजबूर हैं
तुम भी मजबूर थीं
पर क्या करूँ ...
कुछ अच्छा नहीं लगता तुम्हारे बिना ...
मेरी दुनिया सूनी है तुम्हारे बिना ...
तुम्हारी फोटो को प्यार कर लेता हूँ ...
भरपूर आँखों से रो लेता हूँ .....
तुम्हारी तमाम बातें याद आती हैं ...
मुझे काँटे कि तरह लगती हैं ...
और सताती हैं .............
जब मैं किसी जोड़े को प्यार करते देखता हूँ ...
तो रोता  हूँ ................
मेरा दिल बहुत भावुक  हो गया है ......
आँखों  में न जाने कहाँ  से….
समुंदर भर गया है ....
कि  बार बार आँखें  धुंधलाती हैं
हाँ  तुम्हारी बहुत याद आती है ..
हाँ ....तुम्हारी बहुत याद आती है
" पुष्पाजी " तुम्हारी बहुत याद आती है

2 blogger-facebook:

  1. In samast kavitaon mein kavi ke hardik udgar sarahneeya hain.

    उत्तर देंहटाएं
  2. Akhileshchandra1:06 pm

    Udgar kisi bhi hridaya se upajten. Hain aur. Kavita ki atma bante hain prashansa ke liye dhanyawad



    Akhileshchandra

    उत्तर देंहटाएं

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