बुधवार, 5 जून 2013

शेफाली पाण्डे का व्यंग्य : मैं और मेरी इनकम्प्लीट फैमिली ......

आमतौर पर रचनाकार में इंटरनेट पर पूर्वप्रकाशित रचनाओं का पुनर्प्रकाशन नहीं किया जाता. यह भी पुनर्प्रकाशन नहीं है, परंतु यह एक अत्यंत प्रभावशाली, धारदार, मगर उतनी ही मार्मिक व्यंग्य रचना की लिंक है जिसे हर भारतीय को पढ़ना चाहिए. इसे शेफाली पाण्डे ने अपने ब्लॉग पोस्ट मैं और मेरी इनकम्प्लीट फैमिली ..... पर  लिखा है. व्यंग्य के कुछ प्रारंभिक अनुच्छेद यहाँ प्रस्तुत हैं -

मैं और मेरी इनकम्प्लीट फैमिली ......

जिस तरह भारत वर्ष में ज़िंदा रहने के लिए विवाह करना जितना अनिवार्य  है,  ठीक उसी प्रकार विवाह होने के उपरान्त बच्चा पैदा करना उतना ही अनिवार्य है । आपको कोई कुंवारा रहने नहीं देगा और शादी के बाद बिना बच्चे के जीने नहीं देगा । 

इधर विगत कुछ वर्षों से समाज में दो तरह के लोग आपसे टकराते हैं, एक वे हैं जो पहली संतान के विषय में बेधड़क होकर कहते हैं '' पहला  बच्चा कोई भी हो चलेगा ।'' कोई भी से मतलब यह ना निकाला जाए कि चूहा, बिल्ली या कोई भी जानवर पैदा हो जाए और ये उसे अपना लेंगे । कोई भी का मतलब यहाँ लड़की से होता है ।  ये बहुत बड़े दिल वाले होते हैं । ऐसे लोगों की वजह से ही शायद संसार में लड़कियों का जन्म हो पाता है  । 

दूसरे  वे लोग हैं जो ज़िंदगी में किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेते ।'' पहला तो लड़का ही होना चाहिए, दूसरा चाहे कोई भी हो जाए ''  यहाँ भी कोई भी का  मतलब कीड़ा - मकौड़ा, पक्षी या जानवर नहीं बल्कि लड़की से ही है । ऐसे लोग शुरू में भले ही परेशान हो लें लेकिन बाद में स्वयं को सुखी महसूस करते हैं । 

ये दूसरी तरह के लोग बड़े ही स्मार्ट किस्म के होते हैं । इधर स्त्री ने गर्भधारण किया नहीं उधर ये अल्ट्रा साउंड सेंटरों की खोज में आकाश - पाताल एक कर देते हैं । इन सेंटरों में, जहाँ बाहर से बड़े - बड़े अक्षरों में लिखा होता है '' गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण करना कानूनन अपराध है '' और अन्दर सब जगह अलिखित रूप से लिखा रहता है '' यहाँ ये अपराध इत्ते रुपयों में खुशी - खुशी किया जाता है '' । 

अगर आपकी पहली लड़की है और आप दूसरी संतान की इच्छा रखती हैं और कई साल बाद दोबारा गर्भधारण करतीं हैं तो समाज में बड़ी ही विचित्र परिस्थितियाँ जन्म लेने लगती हैं । आपसे मिलने आने वाली आपकी हर मित्र, रिश्तेदार या किसी भी पड़ोसी महिला को जाने किस गुप्त विधि से यह पता होता है कि आपके गर्भ में निश्चित रूप से लड़का है । सिर्फ आपको ही नहीं पता होता बाकी सबको पता  होता है । कह सकते हैं '' जाने तो बस एक गुल ही ना जाने, बाग़ तो सारा जाने है ''। आप उन्हें कितना ही यकीन दिलाने की कोशिश करें कि वाकई आपको बच्चे का लिंग नहीं पता या आपने डॉक्टर पूछने की ज़रुरत ही नहीं समझी है, उन्हें किसी भी सूरत में यकीन नहीं होता है । आपकी हर कोशिश को काटने के यन्त्र इनके पास मौजूद रहते हैं । 

पूरी रचना आगे यहाँ शेफाली पाण्डे के ब्लॉग - कुमाउँनी चेली पर पढ़ें >>>>

4 blogger-facebook:

  1. AKHILESH CHANDRA9:39 am

    shefaliji itne sunder dhang se apni baat kahne ke liye badhai ,baat marmic bhi hai aur such bhi, kuch purani yasden taza ho gaieen... teen betiayan hone ke baat log hamenbechara bhi kahte the aur bewkoof hum pati patni ko chod kar sara zamana dukhi tha hamari teesri beti hone par . Par hamne unhe dheeraj aur jatan se pala aur aaj ve hamara garv hain. Badi beti pathologist doctor,manjhali computer engineer aur choti Architect hai .Hamare dono bade damad Doctors hain aur chote damad ek high profile bank men uchchadhikari hain aur is prakar hamen apni betiyon ke karan bahut izzat mili hai.

    ladka ya ladki hona chance ki baat hai ise lakar itna issue nahin ban na chahiye...Aapki dono betiyon ko hamara aasheerwad tatha itni sunder rachna ke liye badhai, umeed hai aage bhi isi prakar likhti rahengi

    उत्तर देंहटाएं
  2. रचनाकार के माध्यम से शेफाली पांडेय का व्यंग्य पढ़ा. यह व्यंग्य बड़ा ही चुटीला और धारदार है. रचनाकार में इसके प्रकाशन के लिए आपको धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  4. शेफाली जी क अयत सुंदर रचना के लए उह बधाई ! मेरा यिगत अनुभव तो कुछ इससे अलग हट कर है! मेरी तीसरी बेटी के जम लगभग32-33साल पहले होने पर उसका मेरे माता िपता सिहत पूरे परवार ने वागत िकया. ी-पंच क बातेँ तो मैँ नहीँ जानता मेरी तीन पुियो से मुझे या मेरे परवार को कोई पु क कमी कभी महसूस नह हई! अत: यह रचना िकस कल और िकस समाज का ितिनधव करती है पता नहीँ परतु एक अयत सुंदर और रोचक रचना है

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------