शनिवार, 8 जून 2013

ललिता भाटिया की लघुकथा - वारिस

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वारिस 

उमा जी नाश्ते में हलवा ,क्या कोई ख़ुशी की खबर है ?

हाँ शर्मा जी ये आज मीना ने बनाया हे ,उन के बेटे का फोन आया था १ ५ साल बाद उन के घर बेटा हुआ है । 

यह सुनते ही  हलवे का स्वाद कड़वा हो गया हाथ से चम्मच छूट कर मेज़ पर गिर पड़ा । 

क्या हुआ शर्मा जी रसोई से आती मीना ने पूछा 

ये मैं क्या सुन रहा हूं जिस बेटे बहू ने तुम्हें घर से बेघर कर दिया उसी के घर संतान आने की ख़ुशी मन रही हो ,शर्मा जी के मन का दुःख उन वाणी में भी आ गया । 

ये ख़ुशी पोता होने की नहीं मेरा वारिस आने की है मेरे बाद कोई मेरी यहाँ की विरासत सँभालने वाला भी तो होना चाहिए । 

में समझा नहीं ! 

जब मेरे बेटे ने मुझे बेघर किया तो अब उसे भी तो   घर से बेघर करने वाला कोई चाहिए ओर ये काम बेटा ही कर सकता है !

7 blogger-facebook:

  1. chhoti, sashakt, sateek.....padh kar ankh bhar aayi par mann khushi se jhooma bhi

    abhaar

    naaz

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  2. आपकी यह पोस्ट आज के (०८ जून, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - हबीब तनवीर साहब - श्रद्धा-सुमन पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  3. गज़ब गज़ब गज़ब आज जरूरत है अब ऐसी ही सोच की ताकि आने वाली पीढियाँ ऐसा कुछ करने से पहले सौ बार सोचें।

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  4. सोच कब बदलेगी और उससे भी ज़्यादा बच्चे कब अपना कर्तव्य निभायेंगे

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  5. Akhilesh Chandra Srivastava9:41 am

    maa aur apne bete se badle ki baat sonche voh bhi is tarah ,ye nai soch hai bhai varna jab ek patni ne bhent me sas ka dil manga aur bete ne dil chure se nikal bhi liye aur badha to use thokar lagi aur girne laga to ma ke dil se awaz aaiee beta sambhal ke , ise maa ka dil kahte the pahile .

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  6. Akhilesh Chandra Srivastava9:49 am

    maa ka dil bete se badle ki baat sonche voh bhi is tarah,bhai naye jamane ki sonch hai, varna jab ek patni ne bhent me sas ka dil maanga aur pati ne chure se maa ka dil nikal bhi liya aur lekar chala, to thokar lagi aur ladkhdakar girne laga to maa dil se awaz aayee " Beta zara sambhal kar" ye hota hai maa ka dil , jo aulad se badle ki baat sonch bhi nahi sakta,khair nai sonch ko salam

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  7. एकदम साफ और सटीक बात कह दी है गजब !

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