गुरुवार, 25 जुलाई 2013

नीति जयचंदर का आलेख - ट्रैंस्जेंडर : काल्की सुब्रमण्यम - एक उपेक्षित वर्ग की नुमाइंदा

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(ऊपर का चित्र - काल्की सुब्रमण्यम)

खुशमिजाज और बेहतरीन वक्ता काल्की सुब्रमण्यम ने उन दकियानूसी विचारधारावालों को सिरे से नज़रअंदाज़ कर दिया, जो लिंगभेद जैसे कुंठित विचारों को पाले हुए हैं. काल्की, जो कि एक ट्रैंस्जेंडर हैं, की पारिवारिक जड़ें काफ़ी मज़बूत हैं. वे बेहतरीन सामाजिक जीवन जी रही हैं, उनके लगभग हर क्षेत्रों से संबंधित दोस्त हैं और वे मुख्यधारा से जुड़े कामों में रुचि रखती हैं. जब मैंने उन्हें फ़ोन करके मिलने के लिए समय मांगा तो उन्होंने बताया कि वे तमिलनाडु के पोलाच्ची में एक पारिवारिक विवाह में सम्मिलित होने के लिए आई हैं. '' अपने जैसे लोगों को समाज की मुख्यधारा से बहिष्कृत देखकर बचपन में मेरे अंदर असहाय होने की भावना पैदा हो गई थी और गुस्सा भर गया था. मैंने तय कर रखा था कि जब मैं बडी होऊंगी तो अपने साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होने दूंगी. मेरे लिए आदर और आत्मसम्मान की अहमियत सबसे अधिक है. मुझे इस बात से समस्या नहीं है कि मैं ट्रैंस्जेंडर हूं बल्कि मुझे लोगों के संकीर्ण दृष्टिकोण और अज्ञानता से समस्या है, '' 29 वर्षीया काल्की कहती हैं.

हालांकि काल्की स्वीकार करती हैं कि अपनी लैंगिक अस्पष्टता की जटिलता के चलते उनका बचपन बड़ा ही पीड़ादायक गुज़रा था, पर वे हमेशा अपने आप को विशेष मानती थीं और दूसरों से अलग होने के दबाव के सामने घुटने नहीं टेकना चाहती थीं. ' मुझे लगता था कि मैं अपना भाग्य खुद लिखूंगी. मैंने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगाया था और चाहती थी कि अधिक से अधिक पढ़ सकूं. मुझे हमेशा से एहसास था कि मैं प्रकृति की एक खास संतान हूं- मैं खुद से प्यार करती थी, क्योंकि एक बार आप खुद से ष्यार करना शुरू कर दे तो आप हर किसी से हर तरह की लड़ाई लड़ सकते हैं. '' सफलता को लेकर दृढ़ संकल्पित काल्की ने कड़ी मेहनत करते हुए दो मास्टर्स डिग्रीज प्राप्त की, पहली जर्नलिजम ऐंड मास कम्यूनिकेशन और दूसरी-इंटरनैशनल रिलेशन्स में.

पिछले कई सालों से काल्की अपने जैसे दूसरे लोगों के लिए काम कर रही हैं. मेरा उद्देश्य है अधिक से अधिक लोग ट्रैंस्जेंडर्स को स्वीकार करें और उनकी सहायता करें, काल्की बताती हैं. '' मैं न्यायपालिका से संबंधित लोगों, डॉक्टर्स, नीति-निर्धारित करनेवालों शिक्षाविदों और मीडिया कर्मियों से मिलकर अपने जैसे लोगों के बिना किसी भेदभाव व सामाजिक कलंक के साथ जीने के अधिकार की हिमायत करती हूं वर्ष 2000 में उन्होंने ट्रैंस्सेक्यूअल महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम करनेवाली सहोदरी फ़ाउंडेशन नामक एक संस्था की स्थापना की. वे स्पष्ट करती हैं '' पारिवारिक व सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव के चलते अक्सर ऐसी महिलाएं सेक्स वर्कर या भिखारी बनने को मजबूर हो जाती हैं. ''

मानसिक तनाव, एचआईवी संबंधी जागरूकता, विवाह और गोद लेने के बारे में जानकारी देने के अलावा सहोदरी फ़ाउंडेशन ट्रैंस्जेंडर महिलाओं को शिक्षा तथा कार्य कुशलता के विकास के लिए प्रशिक्षण देती है. '' सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे अभियानों व कार्यक्रमों के माध्यम से ट्रैंस्जेंडर्स में आत्मसम्मान और आत्मनिभरता का बीज बोया जा रहा है.'' काल्की ट्रैंस्जेंडर्स को वैकल्पिक मीडिया की मदद से अपनी बातें दुनिया के सामने रखने का प्रशिक्षण भी देती हैं 'मैं उनसे कहती हूं कि छोटी-छोटी डॉक्यूमेंट्रीज बनाएं ताकि उनके माध्यम से अपनी वह कहानी दूसरों तक पहुंचा सकें, जिसे मुख्यधारा की मीडिया द्वारा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है. ''

यह पूछे जाने पर कि ट्रैंस्जेंडर्स के लिए मुख्यधारा से संबंधित क्षेत्रों में करियर बना सकने की संभावना कितनी है, काल्की तुरंत कहती हैं कि यदि कोई प्रतिभाशाली है तो लिंगभेद कोई मुद्दा नहीं रह जाता. '' भारतीय कॉर्पोरेट जगत में लेस्बियन, गे, बाइसेक्यूअल और ट्रैंस्जेंडर्स (एलजीबीटी) समुदाय के लोगों को स्वीकार किया जाने लगा है. उम्मीद है कि आनेवाले समय में बननेवाली अनुकूल नीतियां, नौकरी की सुरक्षा और भेदभाव का खात्मा सुनिश्चित करेंगी हमें कार्यस्थल पर महत्व दिलाएंगी. इस संदर्भ में कॉर्पोरेट जगत से हमारी बातचीत चल रही है.

काल्की का काम उन्हें अक्सर सुर्खियों में लाता रहा है वर्ष 2०11 में उन्होंने तमिल फ़िल्म नर्तकी में मुख्य किरदार निभाया था.

' 'निर्देशक विजयपद्मा ने एक मैग्जीन को दिए गए मेरे साक्षात्कार को पढ्ने के तुरंत बाद फ़ैसला किया था कि मैं उनकी फ़िल्म में मुख्य भूमिका निभाऊंगी '' उस फिल्म में अपने परिवार और दुनिया में अपनी पहचान बनाने और खुद को स्वीकार किए जाने के लिए एक ट्रैंस्जेंडर बच्ची द्वारा किए जा रहे संघर्षों को दर्शाया गया था. जीवन में मिली अनेक असफलताओं के बाद आगे चलकर वह बच्ची एक सफल महिला बनती है. '' वह फ़िल्म आलोचकों द्वारा सराही गई थी और मेरे अभिनय की भी काफ़ी तारीफ़ हुई थी. कैमरे के आगे मैं बिल्कुल सहज थी. ''

अपने नए अभियानों, सामाजिक कार्यों व सार्वजनिक प्रदर्शनों के चलते काल्की हमेशा खबरों में बनी रहती हैं. हमेशा लोगों की नज़रों में बनी रहने के दबाव को वे कैसे झेलती हैं? पूछे जाने पर कहती हैं,''हर सप्ताह मुझे भारत सहित दुनियाभर के सैकड़ों छात्रा के मेल आते रहते हैं, ज्यादातर में लिखा होता है कि मुझसे उन्हें प्रेरणा मिलती है मैं एक ज़िम्मेदार इंसान हूं पर साथ ही अपनी ज़िंदगी को खुलकर जीती हूं मैं आलोचनाओं से प्रभावित नहीं होती, बजाय इसके उनसे अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने की प्रेरणा लेती हूं

आइडियाज़ और उत्साह से भरी हुई काल्की का भविष्य काफ़ी व्यस्त है. वे भारतीय युवाओं को प्रेरणा देनेवाली किताबों की एक शृंखला प्रकाशित करना चाहती हैं. बतौर कलाकार काल्की संगीत की रचना करने के साथ ही विदेशी फ़िल्मों में भी काम कर रही हैं '' मैं अभिनय को गंभीरता से लेती ' हूं और ज्यादा से ज्यादा फ़िल्में और नाटक करना चाहती हूं हाल ही में मैंने काल्की एंटरप्राइजेस बैंड नेम वाला अपना व्यवसाय भी लाँन्च किया है, जिसका उद्देश्य है ग्रामीण कला को प्रोत्साहित करना. मैं एक सफल महिला व्यवसायी, कलाकार और सामाजिक उद्यमी के रूप में पहचानी जाना चाहती हूं ''

काल्की ने साबित कर दिया है कि वे किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने से नहीं डरतीं. अपने सपनों की तलाश में वे अब तक कई बाधाओं को पार कर चुकी हैं. ज़िंदगी को भरपूर जीने की उनकी प्रबल में इच्छा इस बात का संकेत देती है कि वे नहीं रुकने वाली हैं..

(आलेख -  साभार - फ़ेमिना, जुलाई 2013)

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