शनिवार, 20 जुलाई 2013

नीरा सिन्हा की लघुकथा - पहला और आखिरी खत

पहला और आखरी खत

अंशु ट्यूशन क्लासेज में अनुराधा से मिला था. धीरे-धीरे अंशु और अनुराधा एक-दूसरे के करीब आते गए, दोनों का एक-दूसरे के घर आना जाना भी शुरू हो गया. अनुराधा की माँ अंशु के बात-व्यवहार से बहुत प्रभावित थी. अनुराधा के पिता नहीं थे उनका देहांत जब अनुराधा छोटी थी उस वक्त ही हो गया था. अनुराधा अपनी माँ और छोटी बहन के साथ रहती थी. अनुराधा की माँ ने अंशु को एक दिन ट्यूशन और स्कूल में अनुराधा पर ध्यान रखने की नैतिक जिम्मेदारी भी सौंप दी थी जिसे निभाते हुए अंशु मन ही मन खुश रहा करता था.

अनुराधा बहुत इंटैलीजेंट लड़की थी, मैथ्स के सवाल तो वह चुटकी में हल करती. अंशु कई बार मैथ्स के कठिन सवाल अनुराधा से ही हल करवाया करता था. साधारणत लड़कियां मैथ्स में दिलचस्पी नहीं लिया करती परंतु अनुराधा अन्य विषयों में जितनी तेज थी उतनी ही तेज मैथस में भी थी.

स्कूल और ट्यूशन के क्लासेज में अंशु समय से थोड़ा पहले ही पहुंच जाया करता था और उस सीट को चुनकर बैठता था जहां से अनुराधा को वह देखता रह सके. अंशु का ध्यान अब सिर्फ अनुराधा पर ही लगा रहता. एक दिन मौका देखकर अंशु ने अपने दिल की बात अनुराधा को बतायी कि वह उससे प्यार करता है परंतु अनुराधा उसकी बात पर ज्यादा ध्यान न देकर अंशु की बातों को हंसी में टाल गई. अंशु समझ रहा था कि अनुराधा उसकी भावनाओं को समझते हुए भी अपने प्यार का इजहार नहीं करना चाहती.

समय बीतता गया, एक दिन अनुराधा स्कूल और ट्यूशन दोनों ही क्लासेज से अनुपस्थित हो गयी, अंशु अनुराधा को अनुपस्थित पाकर बहुत ही बेचैन सा हो गया था. अनुराधा का स्कूल में और ट्यूशन क्लासेज में होना अंशु की जरूरत बन चुकी थी. अंशु के पता लगाने पर उसे पता चला कि अनुराधा अपनी मौसेरी बहन की शादी में एक सप्ताह के लिए बाहर गयी हुई है. अंशु की बेचैनी अब गुस्से में बदलती जा रही थी. अंशु को इस बात का बहुत गुस्सा था कि अनुराधा उसे बिना बताए क्यों चली गयी. एक दिन बिता, दो दिन बिता, अब अंशु का गुस्सा ठंडा हो चुका था, उसने उंगलियों पर दिन काटना शुरू किया. किसी तरह उसने सप्ताह भर काटा और जब अनुराधा आयी तो उसे देखकर पहले तो उसे बहुत शकुन महसूस हुआ लेकिन जब अनुराधा उससे मिलने आयी तो वह उसे बहुत डांटा हालांकि उसके डांटने में भी प्यार मिला हुआ था. अनुराधा अपनी गलती को मान गयी और उसने अंशु से माफी भी मांगी.

कुछ दिनों बाद अंशु और अनुराधा के 12वां का रिजल्ट आया, दोनों ही प्रथम स्थान प्राप्त किया था. अनुराधा का आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली के एक कॉलेज में सेलेक्शन हो गया. अंशु चाह कर भी शहर नहीं छोड़ सकता था क्योंकि वह अपने माता-पिता का एकलौता लड़का था.

अंशु के माता-पिता उसे बाहर नहीं भेजना चाहते थे.

अंशु अनुराधा के दिल्ली जाने की बात सुनकर उदास रहने लगा था क्योंकि वह अनुराधा को दिल से अपना मान लिया था और अपनी दिल की बात को एक बार फिर अनुराधा को कहना चाहता था. दिल्ली जाने के एक दिन पहले अंशु अपने दिल की बात अनुराधा से कहा. उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था फिर भी हिम्मत कर अंशु ने एक ही झटके में अनुराधा को बोला, मैं तुमसे प्यार करता हूँ, क्या तुम मुझसे ब्याह करोगी ? अनुराधा चुप रही, कुछ नहीं बोली और उठ कर वहां से चली गयी. यह देख कर अंशु भी वहां से चला गया. अगले दिन सुबह अनुराधा को जाना था इसलिए अनुराधा अंशु की किताब लौटाने आयी, आते ही थोड़ा मुस्कुराई और बोली, किताब में एक खत है, पढ़ लेना. इतना सुनना था कि अंशु झाट से अपने घर की ओर भागा और खत पढ़ने लगा. अनुराधा का पहला और आखरी खत में लिखा था.

मेरे प्यारे दोस्त अंशु, मैं जानती हूँ कि तुम्हें गुस्सा और दुख हुआ होगा कि मैं कल तुमसे कुछ कहे बिना वहां से चली आयी. तुम जैसे दोस्त को मैं खोना नहीं चाहती. मैं नही चाहती कि मेरे कारण तुम्हारे या मेरे घर की बदनामी हो क्योंकि लड़की को खूद हमसफर चुनने का आज भी समाज ने अधिकार नहीं दिया है और ऐसा करने पर जो दाग लड़की के माथे पर लगता है उसे समाज कभी धुंधला होने नही देता. बस इतना समझना कि मैं परिस्थिति की नजाकत को समझ कर ही ऐसा कर रही हूँ. मेरे प्यारे अंशु शायद तुम यह समझ पाओगे.

खत पढ़ कर अंशु के आंखों से आंसू बहने लगे लेकिन अंशु इस बात से खुश था कि अनुराधा उससे प्यार तो करती है. वह सोचने लगा कि क्या हुआ अगर हम एक न हो सके. प्यार सिर्फ पाने का ही नाम तो नहीं, यही क्या कम है कि हम दोनों ने एक-दूसरे को सच्चा प्यार किया.

दूसरे दिन अंशु ने अनुराधा को हंसते हुए विदा जरूर किया ताकि वह खुशी-खुशी अपने आगे की मंजिल पा सके परंतु मन ही मन वह बहुत उदास था. आज इस बात को लगभग दस साल हो चुके है लेकिन अब भी अंशु जब भी उस खत को पढ़ता है तो रो पड़ता है. आज अनुराधा सफलता के नये सोपान पर है और सुना है उसकी शादी होने वाली है लेकिन अंशु आज भी अनुराधा से उतना ही प्यार करता है जितना वह दस साल पहले करता था और अंशु यह सोच कर खुश है कि अनुराधा की खुशी ही उसकी खुशी है.

नीरा सिन्हा

सेल फोन - 9931584588

4 blogger-facebook:

  1. lagu katha achchi hai par aajkal yesa ant kaha ho raha hai

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  2. kahani hai kah bhar di hai esa kuch hkas nahi hai
    good luck for next story

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  3. kuch khas nahi hai sirf banao par chalti hai

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  4. akhilesh Chandra Srivastava2:06 pm

    Eek sachcha pyar karnewala hi is kahani ko likh aaur samjh sakta hai. Itni sunder rachna. Ke liye. Badhaiee

    उत्तर देंहटाएं

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