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वेणू संदल (वीनस "ज़ोया") का व्यंग्य आलेख - आपका सरनेम क्या है..., क्या आप यूपी से हैं?

आलेख - '' क्या आप यूपी  से हैं

हिमाचल प्रदेश के इक छोटे  से गाँव में पली बढ़ी ,चंडीगढ़ शहर में पढ़ी लिखी ,पंजाब के अमृतसर में ब्याही गयी और अब अपने छोटे से परिवार के साथ नागपुर में रह रही हूँ !  वैसे अक्सर लड़कियों को ही अपना घर बार नौकरी परिवेश दोस्त सब छोड़ के वहां आना पद जाता है जहाँ पति परमेश्वर हों और ये कुछ हद तक सही भी है  !  किसी भी लड़की के लिए परिवार के सुख से बड़ा और कोई सुख नहीं  ! पति कैरिअर  की ऊँचाई के लिए चंडीगढ़ से नागपुर आ गये ...इक साल बाद पीछे पीछे मैं भी आ गयी अपने कान्हा को ले के !  अभी नागपुर आये मुझे एक साल भी नहीं हुआ  !  अच्छा शहर है , हाँ चंडीगढ़  जैसा तो कोई शहर हो ही नहीं सकता क्यूंकि चंडीगढ़ की तो बात ही कुछ और है मगर फिर भी ठीक है  !  भारत के इक आम शहर के जैसा ! पर इक बात जो यहाँ मुझे बहुत अलग लगी वो हे लोगों का नजरिया !  यहाँ किसी से मिलने के एक मिं०  के अंदर पूछा  जाता है "आपका सरनेम  क्या है?

और यही से शुरू हो जाती है नये सवालों की झड़ी  ! 

हिमाचल के छोटे से गाँव में शुद्ध पंडित ब्राह्मणों के घर जन्मी और ब्याही भी ब्राह्मणों में ! ससुराल अमृतसर में हैं और सरनेम है "तिवारी "  ! शादी ब्याह बड़ों का जिम्मा समझा सो कभी कोई सवाल नहीं किया ..जरुरत भी नहीं समझी ...न लगी ! अब अक्सर बातचीत आंटियों से ही हो रही होती है तो वो शुरू हो जाती हैं  ! ''तिवारी '' क्या आप यूपी से हैं ! उनके चेहरे की लकीरें नया ही चित्र बनाती हैं ! फिर मैं उन्हें कहती हूँ की हम पंजाब से हैं !

अरे नहीं ...आपके ससुराल वाले यूपी से यहाँ आ गये होंगे ! तुम्हें पता नहीं होगा वो यूपी से ही होंगे !

मन में आया के कहूँ  की आंटी जी ,जब शादी हो रही थी तो हमने इतनी पड़ताल नहीं की होगी जितनी आपने अभी कर  डाली !

और क्या हुआ अगर वो यूपी से होंगे , इसमें इतना डिस्कशन क्यूँ ? इस तरह की बातों से क्या हासिल ! पर यहाँ आने से पहले ही कुछ मित्रजनों ने यहाँ के लोगों का नजरिया उतर-भारतीयों के बारे में समझा दिया था इसलिए बिना कुछ कहे ..बस मुस्कराहट दे वापिस लौट आई !

अगले दिन फिर बेटे के साथ पार्क में पहुंची वही आंटियों का झुण्ड ...आज उस झुण्ड मैं कोई नया प्राणी था ! मैंने  वहाँ ना जाना ही बेहतर समझा और दूसरी और चल दी ! चलते चलते वो  झुण्ड फिर सामने आ गया और फिर सिलसिला शुरू हो गया सवाल जवाबों का फिर और उस नये प्राणी से मेरा परिचय करवाया गया ! नाम पता पूछा  ,बेटे के बारे में और फिर वही बड़ा सवाल "आपका सरनेम  क्या है?

जी तिवारी !

क्या आप यूपी  से हैं ?

मेरा दिमाग फिर घूम गया ! बड़ी मुश्किल से शालीनता बनाई रखी और बात को रफा दफा कर आगे बढ़ी ! क्यूंकि जानती हूँ इन्हें समझाने का कोई फायदा नहीं उपर से और झमेला ही खड़ा होगा ! बेहतर है अपने रास्ते चलो !

बहुत दुःख होता है ऐसी बातों  से ! आज भारत में कोई पंजाबी है ,कोई कश्मीरी है ,कोई उतर  भारतीय है , कोई दक्षिण भारतीय , कोई असामी है , कोई हिन्दू , कोई मुस्लिम है , कोई सिख है , कोई ब्राह्मण  है बस नहीं है कोई तो वो है भारतीय !

आज हर प्रदेश में दो भाषाएँ दिखेंगी ..एक उस प्रदेश की अपनी भाषा या इंग्लिश ! अभी कुछ दिन पहले हम हैदराबाद गये वहां हर जगह या तेलगु में लिखा था या इंग्लिश में ! हमने जब किसी से कुछ पूछा ,जगह या रास्ते के बारे में तो कुछ जन तो हिंदी समझे ही नहीं और कुछ जन ने इंग्लिश में जवाब दिया क्यूंकि या उन्हें तेलगु आती है या इंग्लिश ! इंग्लिश में कोई बुराई नहीं है मगर हिंदी में क्या बुराई ...समझ ये नहीं आता !

भारत में आजकल सब को भारतीयता से ही मुश्किल है ! हर मुद्दे पर देश को बांटना बस ! अंग्रेज चले गये पर "फुट डालो -राज करो"ये गुण हमारे डी एन ए में भर गये जो निकल ही नहीं रहा और न ही शायद कोई निकालना चाहता है !

अभी कुछ दिन पहले रसोई के कुछ बर्तन लेने इक दूकान पे गये ! जिस तरफ वो दूकान थी वहां पहली बार गये थे ! कुछ बर्तन लिए ! अकसर हम हिंदी में बात करते हैं,  उपर से मेरा और मेरे बेटे का रंग ज्यादा साफ़ (गोरा ) होने के कारण हम खुद ही अलग हो जाते हैं !

अभी हम बिल देख ही रहे थे की दूकानदार ने पुछा,  "आप यहाँ के नहीं लगते हैं ? कहाँ से हैं आप?"

नई जगह जाके मेल मिलाप बढाने की इच्छा बड़ी तीव्र रहती है, हमने बड़े हौसले के साथ मुस्कुरा के जवाब दिया  "जी , अभी कुछ महीने पहले ही आये हैं ? हम पंजाब से हैं !

आपका सरनेम  क्या है? ......................................क्या आप यूपी से हैं ????????????!

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desh ab bhi partantr hai ....dil se

जी बिलकुल सही….पर करे भी क्या … पढ़े लिखों का ये हाल है …क़िसे समझाएं …क्या, कितनी बार और कब तक ,,,टिप्पणी और पढने के लिए धन्यवाद

सदियों से जातपात ,धर्म का जो दुष्प्रभाव मन पर पड़ा है वह जल्दी नहीं जाता
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:) अभी हम पिछले हफ्ते ही चंडीगढ़ गए थे...सच में बड़ा खूबसूरत शहर है!!
और वैसे हैदराबाद में लगभग सभी हिंदी बोलते हैं और बहुत अच्छे से बोलते हैं...
खैर, बहुत अच्छी आपकी ये पोस्ट :) आपका सरनेम क्या है? :P

हजारों साल की गुलामी के दौरान आए पतम का असर समाज से इतनी जल्दी नहीं जाता ... फिर जाने प्रयास भी नहीं हो रहा सामाजिक और राजनेतिक स्तर पर ... शायद और १००० साल न लग जाएं ...

:):) अब यहाँ तो ये भी पूछ लेंगे कि जी आप कौन से ब्राह्मण हो ? वैसे क्या आप यू पी से हैं ?? :):)

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