पुस्तक समीक्षा - समय भारती

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दोहे को समर्पित: समय भारती 

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                              -- मनोज 'आजिज़'

बाल कवि 'हंस' बाल साहित्य सृजन और दोहा लिखने के लिए एक जाना-पहचाना नाम है । गत वर्ष 'हंस के दोहे' पुस्तक प्रकाशित हुई थी जिसमे विभिन्न विषयों पर लगभग २०० दोहे थे । 'समय भारती' इनका दूसरा संग्रह है जिसमे 'हंस' के शताधिक दोहे प्रकाशित हैं । डॉ बच्चन पाठक 'सलिल' ने कहा है कि आज के छंद हीन युग में बाल कवि 'हंस' ने दोहे को पुनर्प्रतिष्ठित किया है । प्रस्तुत संग्रह में सामाजिक विसंगति, भ्रष्टाचार, विज्ञान की असंतुलित उन्नति और पारिवारिक समस्यायों पर दोहे लिखे गए हैं जिनमे भरपूर व्यंग्य है और कहीं कहीं कवि तुलसी और रहीम की तरह नीति का उपदेश करता हुआ भी प्रतीत होता है । एक उदहारण देखिये --

'' मानव पहुंचा चाँद पर , रहा ख़ुशी में फूल 

  धरती पर चलना मगर, आज गया वह भूल । ''

भारत की राजनीति आज के दौर में काफी गन्दी हो गयी है । अगर १० कवितायेँ लिखी जा रही हों तो उनमे से ८ राजनैतिक अनैतिकता पर होती हैं । हंस जी भी अपने दोहों से इस स्थिति पर वार करते हैं । बानगी के तौर पर --

'' बढ़ी निराशा है यहाँ, भंग पड़ी है कूप 

  भारत का है बन गया, आज इंडिया रूप । ''

देश के कुर्सी-मोही लोगों को सीख भरी लहजे में 'हंस' कहते हैं --

'' कुर्सी की महिमा बहुत, जाने यह संसार 

  कुर्सी पा मत छोड़िये, मानवीय व्यवहार ।''

भाग-दौड़ की जिन्दगी सिर्फ शहरों में ही नहीं है बल्कि गाँवों में भी यही हाल है । गाँव-घर के पुराने माहौल अब इतिहास बन गया है । भारतीय गाँव अभी अपनी पहचान खो रहा है और इस पर 'हंस' लिखते हैं--

'' गाय-बैल न दूध-दही, ना पीपल की छांव 

'हंस' पैर ही खींचते, जेल बना है गाँव । ''

दार्शनिक अंदाज में कवि कहते हैं--

''दुश्मन,अग्नि, रोग मिटे, 'हंसा' चुके उधार 

तभी चैन से बैठिये, खतरनाक हैं चार । ''

बाल कवि 'हंस' अपने दोहों में काफी बोल-चाल की भाषा का प्रयोग किया है । इससे आम जन तक दोहे फिर पहुँच पाएंगे । इनके दोहों में काफी सरलता है और गंभीर बातों को भी कवि ने सहज रूप से अभिव्यक्त किया है जो उनकी विशेषता बन कर उभरी है । दोहा विधा को पुनः सशक्त करने के लिए 'हंस' जी साधुवाद के पात्र हैं । आशा है 'हंस' जी अपनी इस रूचि में रुचिकर रहेंगे । उनकी इस कृति के लिए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं !

समीक्ष्य पुस्तक- समय भारती

रचनाकार-- बाल कवि 'हंस'

समीक्षक-- मनोज 'आजिज़'

विधा- दोहा

प्रकाशक-- भारतीय बाल साहित्य परिषद् , जमशेदपुर

मूल्य-- ६० रु मात्र

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