सोमवार, 19 अगस्त 2013

राजीव आनंद की लघुकथा - रहमदिल अपराधी

रहमदिल अपराधी

पुलिस से भागते-भागते जावेद काफी थक गया था इसलिए वह शहर के मुख्‍य सड़क को छोड़कर एक गली में प्रवेश कर गया और आगे गली जहां मुड़ती थी वहां कचरे से भरा हुआ एक कचरापेटी के ओट में चुपचाप पसर गया. नगरपालिका वालों ने अपनी आदत के अनुसार लगता है महीनों से कचरा नहीं हटाया था, जावेद कचरे से आ रही दुर्गंध से अंदाजा लगाया.

आठ-दस किलोमीटर की दूरी पुलिस को चकमा देते हुए जावेद ने तय किया था इसलिए उसके पोर-पोर में दर्द हो रहा था, सांसें फूल रहीं थी, कचरापेटी में पसरे हुए जावेद को दुर्गंध में भी राहत महसूस हो रही थी. उसने पड़े-पड़े देखा कि मुख्‍य सड़क से पुलिस दस्ता पार हो रही थी. जावेद पुलिस दस्‍ते को पार होते देख खूद को समेट ही रहा था कि उसके हाथ से एक कपड़े का पोटली टकराया. अंधेरे में जावेद ने महसूस किया कि पोटली के अंदर कोई सांस ले रहा हो. जावेद हड़बड़ा कर उठ बैठा और पोटली को टटोलते हुए हाथों में उठा लिया, उसके हाथों के स्‍पर्श को पाकर पोटली में लिपटा एक नन्‍हा सा बच्‍चा कुलबुलाने लगा था. बच्‍चे का चेहरा जावेद के एक हाथ में समा गया था, रह-रहकर बच्‍चे का मुंह खुलता और चुस्‍कियां भरता, फिर बंद हो जाता, मानो अपनी माँ का स्‍तन ढूंढ़ रहा हो. मानव स्‍पर्श पाकर बच्‍चा रोने लगा मानो दूध मांग रहा हो. जावेद का हाल बेहाल हो रहा था, यह सोच कर कि वह क्‍या करे और क्‍या न करे. उसने उंगली को होंठों पर रख सू-सू की आवाज करने लगा ताकि बच्‍चा चुप हो जाए. जावेद को इस बात का भय सता रहा था कि इस बिरान रात में कहीं बच्‍चे के रोने की आवाज से पुलिस न आ जाए.

जावेद अपने अंदर एक द्वंद महसूस कर रहा था, एक बार तो ख्‍याल आया कि बच्‍चे को उसके हाल पर जहां से उठाया था वहीं छोड़कर भाग निकले फिर ख्‍याल आया कि ऐसा करना इस बच्‍चे की उस माँ के जैसा नहीं होगा जो निर्दयी इस नन्‍हीं सी जान को कचरापेटी में फेंक गयी. जावेद उस अनजान औरत को कोसने लगा यह कहते हुए कि औरत के नाम पर कुतिया रही होगी, इधर-उधर मुंह मारा, अपनी हवस मिटायी और जब बच्‍चा पैदा हुआ तो उसे मरने के लिए कचरापेटी में फेंक दिया. क्‍या उस औरत को इतना भी नहीं पता कि कचरापेटी में फेंक देने से एक नवजात शिशु तो इन्‍फेंक्शन से मर जाएगा ? देह सूख की भूखी औरत तुझे फेंकना ही था तो किसी अनाथालय के देहरी पर फेंक दिया होता, कम से कम इस अवोध शिशु के जीवित रहने की संभावना तो रहती. अगर मुझे कभी इस बच्‍चे की माँ मिल गयी न तो मैं उसकी हड्‌डी-पसली एक कर दूंगा कि फिर कभी ऐसा करने की हिम्‍मत न करें और अंततः बच्‍चे को लेकर चल पड़ा.

उस गली से दूसरी गली फिर तीसरी गली होता हुआ जावेद जहां मुख्‍य सड़क पकड़ा सामने से पुलिस दष्‍ते ने उसे घेर लिया.

एक पुलिस वाले ने जावेद को धमकी भरे स्‍वर में कहा, अगर भागने की कोशिश की तो गोली मार दूंगा.

तब तक दूसरे पुलिस वाले ने जावेद से पूछा, अरे कमीज के अंदर क्‍या छुपा रखा है, अफीम, चरस या गांजा, दिखा जल्‍दी नहीं तो कमीज फाड़ दूंगा.

जावेद ने धीरे से कमीज के अंदर से कपड़े के पोटली को निकाला, सभी पुलिस वाले बच्‍चे को देखकर स्‍तब्‍ध थे, अरे यह तो इंसान का बच्‍चा है, एक पुलिस वाले ने कहा. ये कहां मिला तुम्‍हें, एक पुलिस वाले ने पूछा ?

जावेद ने स्‍पष्‍ट बता दिया कि कचरापेटी में छुपने के बाद कचरे में ही पड़ा मिला था यह बच्‍चा. पुलिस वाले भी उस अबोध शिशु की माँ को गरियाने लगे थे.

जावेद को बच्‍चे सहित जीप में बैठने को कह, सभी पुलिस वाले जीप में बैठ चुके थे. बच्‍चा अब जोर-जोर से रोने लगा था, शायद उसे भूख लगी थी. जावेद उसे हाथों में हिला-डुलाकर चुप कराने की कोशिश कर रहा था.

एक पुलिस वाले ने जावेद से बच्‍चा मांगा और अपने हाथों में लेकर सीने से चिपका लिया. बच्‍चा पलभर को चुप हो गया और पुलिस वाले के सीने से लग कर दूध खोजने लगा. पुलिस वाला नरम दिल का था, उसने जीप चालक को आदेश दिया कि जीप उसके घर ले जाए. चालक स्‍पीड बढ़ा दिया था, थोड़ी देर में उस पुलिस वाले का घर आ गया था. पुलिस वाले ने जीप से उतरकर लगभग दौड़ते हुए अपने घर का मुख्‍य दरवाजा जोर-जोर से खटखटाने लगा. अंदर से पुलिस वाले की घरवाली ने आवाज दिया और दरवाजा खोला, हाथ में बच्‍चे को देखकर स्‍तब्‍ध खड़ी रह गयी. पुलिसवाले ने जल्‍दी से बच्‍चे को दूध पिलाने का आदेश देकर बच्‍चे को अपनी पत्‍नी के हवाले कर दिया. पुलिसवाले का तीन महीने का बेटा सोया हुआ था, उसकी पत्‍नी झट से अंदर गयी और नवजात शिशु को अपना स्‍तन थमा दिया, बच्‍चा को उसकी माँ मिल चुकी थी.

जावेद जीप में बैठा सोच रहा था कि बच्‍चे के चक्‍कर में वह फंस गया लेकिन उसके चेहरे पर करूणा और संतोष के भाव उभर आए थे. वो सोच रहा था कि उसके फंस जाने से एक अवोध शिशु की जान तो बच गयी, एक ऐसा काम तो वह कर गया जिसे देखकर खुदा भी खुश हुआ होगा.

पुलिसवाला अपने घर से बाहर आकर जावेद को कहा, तुमने इस बच्‍चे को कचरापेटी से उठाकर एक अच्‍छा काम किया, इसका मैं ख्‍याल रखूंगा. ले जाओ, इसे हवालात में डाल दो, उसने जीप में बैठे अन्‍य पुलिसवालों को आदेश दिया.

राजीव आनंद

सेल फोन - 9471765417

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