रविवार, 4 अगस्त 2013

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - हड्डी की तलाश

हड्डी की तलाश

रखू ओझा रास्ते में पंडित सत्यदेवजी को खड़ा करके, इधर-उधर कुछ तलाशने लगे। थोड़ी देर बाद एक हड्डी लेकर लौटे। पंडित जी को देते हुए बोले “ पंडितजी इसे झोले में कहीं छुपा लीजिए”। पंडितजी आश्चर्यचकित होकर बोले “ आखिर यह क्या कह रहे हो ? कहीं तुम्हारा दिमाग तो नहीं फिर गया। जिस झोले में भगवान को रखता हूँ, उसमें हड्डी रखने को कह रहे हो। मुझसे यह नहीं होगा ”।

हरखू बोला “पहले मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए”। पंडितजी ने कहा मुझे कुछ नहीं सुनना है और लौटने लगे। हरखू ने हड्डी अपने कपड़े में किसी तरह छुपाया और पंडितजी को मनाकर मंहगू के घर पहुँच गया।

हरखू ने मंहगू को बता रखा था कि उसके घर में कोई हड्डी दबी हुई है। उसी के तलाश में कुछ अपवित्र आत्माएँ घर में घुस आती हैं। और घर वालों को कष्ट देती हैं। हरखू ने हड्डी को खोज निकालने का वादा किया था। तथा साथ ही पंडित जी से शांति पाठ करवाने को भी कहा था। आज उसी वादे को पूरा करने के लिए वह मंहगू के घर आया था।

हरखू ने कुछ समय के लिए आँख बंद किया और मंहगू को घर के अंदर एक कमरे में ले गया। हरखू ने बताया कि इसी कमरे में हड्डी है। फावड़ा लाओ और खुदाई करो। सभी लोग बाहर रहेंगे। केवल तीन लोग अंदर रहेंगे।

मंहगू खुदाई करने लगा। कई फिट गहरी खुदाई हो गई लेकिन फिर भी हड्डी नहीं निकली तो पंडित जी को दया आई। हरखू को पास बुलाकर धीरे से बोले “अब हद हो गई। मुझसे अब सहा नहीं जाता। देख रहे हो पसीना-पसीना हो गया है”।

हरखू बोला “ अभी कम से कम आधे घंटे तक और खुदवाऊंगा। आसानी से बनने वाले काम की कीमत भी कम आँकी जाती है। गड्ढा देखकर गाँव वालों के भी छक्के छूट जाने चाहिये”।

खैर थोड़ी देर और खुदाई जारी रही। पंडितजी ने फिर से इशारा किया। तब हरखू ने मंहगू को पीपल के पांच पत्ते लाने के लिए बाहर भेज दिया। कुछ देर बाद मंहगू लौटा और फिर से खुदाई करने लगा।

कुछ समय बाद मंहगू को जमीन में हड्डी जैसी कोई चीज दिखी। उसे सहसा विश्वास नहीं हुआ। निश्चय होने पर उसके खुशी का ठिकाना न रहा। पूरा गाँव उमड़ पड़ा। मंहगू के घर में पाँव रखने को भी जगह शेष न रही। हड्डी की तलाश पूरी हो चुकी थी।

--------- (पूर्व प्रकाशन ‘मिताली’ मई-२०१३).

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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