सोमवार, 19 अगस्त 2013

बच्चन पाठक 'सलिल' की लघुकथा - धर्म की परिभाषा

धर्म की परिभाषा 

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                   -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

सन 1964 ईस्वी में जमशेदपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ । लोग हिंसा , आक्रोश, भय और संदेह के साये में पल रहे थे । सैकड़ों लोगों की जानें गईं । रात में पूरी तरह कर्फ्यू लागू थे । बिष्टुपुर के एक मंदिर में पंडित रामानंद जी पुजारी थे । वे सत्यवादी और पक्के सनातनी थे । मंदिर में बीसों कच्चे घर थे जिनमे किरायेदार रहते थे । मंदिर कमीटी की ओर से पंडित जी ही कमरे आवंटित करते थे और किराया वसूलते थे । 

एक दिन उनके गाँव का रहमान नाम का एक मुसलमान आया । वह शास्त्रीनगर से भाग कर आया था जहाँ दर्जनों हत्याएं हो चुकी थी । 

उसने पंडित जी से पनाह मांगी । पंडित जी ने उसे एक कमरा दे दिया और कहा कि अपना नाम रघुवर बताना । असली नाम बताओगे तो बवाल खड़ा हो जायेगा । 

दो दिनों के बाद किसी तरह भेद खुल गया कि वह मुसलमान है । रात को करीब एक दस बजे कुछ लोग आए और बोले कि यहाँ एक मुसलमान छिपा है । हम उसे मैदान में ले जाकर काट डालेंगे । 

पंडित जी घबराए । बोले-- यहाँ सभी पुराने लोग हैं । एक रघुवर आया है, वह नया है पर मैं उसे जानता हूँ ।  

रघुवर बुलाया गया । वह थर- थर कांप रहा था । पंडित जी ने कहा-- यह रघुवर है और यादव है । मैं इसे जानता हूँ । एक यादव पहलवान ने कहा-- अगर पंडित जी इसका छुआ पानी पी लेंगे तो हम लोग मान जायेंगे । 

पंडित जी धर्म-संकट में पड़े । उन्हें मानस की याद आई -- पर हित सरिस धर्म नहि भाई । उन्होंने रघुवर के हाथ का पानी पी लिया । लोग चले गए । 

दो चार दिनों के बाद दंगा शांत हुआ । पंडित जी आश्वस्त थे कि मैंने धर्म का सही पालन किया है । जीव-रक्षा रुढी पालन से अधिक महत्वपूर्ण होता है । 


पता -- बाबा अश्रम, पंच मुखी हनुमान मंदिर के पास

         आदित्यपुर-२ , जमशेदपुर-१३

फोन- ०६५७ / २३७०८९२

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