बुधवार, 7 अगस्त 2013

रामा चंद्रमौली की तेलुगु कविता - बचपन जल रहा है!

बचपन जल रहा है !
तेलुगु मूल : रामा चंद्रमौली
अनुवाद : डॉ. दण्डिभोट्ला नागेश्वर राव

    मूछों पर खिलती जवानी लिए .. नाजुक पत्ता-सरीखा वह लडका,
    पीठ पर किताबों का पहाड ढ़ोता हुआ
    स्कूल को जाता।
    सुबह सात बजे को टी.वी. में ‘एरोबिक्स’ के स्तनों की याद आती -
    दिल में हल्ला-होड मचा जाती-
    सडक पर स्कूल बस केलिए इंतजार करते समय सामने-
    पोस्टर पर पतली कमर वाली इलियाना। गुदगदाती!
    कक्षा में दिलीप ........
    सेवेन्त स्टाण्डर्ड की छोकरी मंजरी से भेजा गया एस.एम.एस.
    अपनी मोबाइल फोन में दिखाता- ‘विल यु किस मि ईवनिंग’
    पढ़कर नस-नस में आग डैनमाइट की तरह सुलगती रहती ...
    सिर उठाया ......
    तो बोर्ड पर लिखने वाली सोशल टीचर के लो बैक में से..बहुत कुछ दिखाई देता!
    लंच ब्रेक में स्कूल के बगलवाली बॉर में से
    ‘ये...मेरा दिल प्यार का दीवाना’ गीत सुनाई देता।
    शाम को घर लौटते समय रवि...
    अपने घर जबरदस्ती ले जाता और इंटरनेट में .... न्यूड डॉट कॉम दिखाता!
    घर पहुँचा तो माँ... टी.वी.सीरियल में समाधि लगाकर रोती रहती !
    ट्यूशन मास्टर रात में आठ बजे को आते...
आई.आई.टी. की फाउण्डेशन क्लास लेने!
    रात के ग्यारह बजे पापा आते....
    मुँह में व्हिस्की की बदबू लिए - जेबभर रिश्वत के पैसे लिए
    माँ से बतियाते रहते- ‘बच्चे को अमरीका कैसे भेजें....डॉलर्स कैसे कमाये जाय !’
            सब कुछ उलट-पलट
            सब कुछ तहस-नहस
        जिसका पता लगना चाहिए वह नहीं लगता.....
        जिसे मालूम करने की जरूरत नहीं, वह बहुत ज्यादा मालूम हो जाता...


            वह लडका ....
            आग की लपटों में कागज का टुकडा!
            कहीं कुछ जलने की बू आ रही है....
                 हाँ ! बचपन जल रहा है !

।।।

    । ( इलियाना तेलुगु फिल्मों की एक प्रसिद्धअभिनेत्री है )


तेलुगु मूल : रामा चंद्रमौली
अनुवाद : डॉ. दण्डिभोट्ला नागेश्वर राव,
सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग,
श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती विश्वमहाविद्यालय,
एनात्तूरु, कांचीपुरम् ६३१५६१

4 blogger-facebook:

  1. सही लिखा. हर कहीं बचपन जल रहा है ओर जिन्हें पता होना चाहिये वे अनजान हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  2. Akhilesh Chandra Srivastava9:46 am

    lekhak chandramolly ka ek ek shabd jo kavita men hai sach hai aur keval sach ki bahadur abhivyakti hai ek rishvatkhor pita jebon men rishvat ke paise bhare daaru men dhutt bete ko america bhejne ka sapna dekhta hai yeh sach keval ek aadmi ka sach nahin tamam logon ka sach hai jo behter jindgi ke liye parivar ke bhavishya ke liye b hrishtachar karte hain fir jiske pass jo hai voh vohi to bechega koi desh ki surksha ho to koi desh ka bhavishya aakhir is desh ko bazaar kisne bana diya jahan K G me admission ke liye bhi badi badi rishwaten aur feesen lagti hain aur jayaj tareekon se milengi nahin atah yadi prayogita me rahna hai aur jinda bhi rahna hai to bhrist bano

    samaj ke karta dharta is tathya ko smjhen aur samaj ki sonch aur vyvhar badalne ki disha me mahatvpoorn kadam uthaven

    उत्तर देंहटाएं
  3. बचपन जल रहा है एक सम सामयिक रचना होकर बच्चोके भविष्य को लेकर सही चिंता व्यक्त की गयी है

    उत्तर देंहटाएं
  4. Thank you for the responses..
    Nageswara rao

    उत्तर देंहटाएं

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