एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - भूत

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भूत

माधव की पत्नी मालती कुछ खट-पट सुनकर जल्दी से यानी हड़बड़ी में कमरे में दाखिल हुई। डर था कि बिल्ली घुसकर कहीं दूध न पी जाय । ऐसा होने पर रात भर जगने का सहज प्रबंध हो जाता। क्योंकि न तो मालती के ही बच्चे को पिलाने के लिए पर्याप्त दूध उतरता था। और न ही घर में कोई गाय-भैंस थी। एक लीटर दूध रोज मोल लेना पड़ता था। किसी तरह से काम चलता था। मालती अक्सर कहती कि इससे अच्छा होता जो निरा पानी ही पिला देती। कम से कम पैसा तो बचता। क्या फायदा है, दूध के नाम पर पानी पिलाने से। माधव समझाता कि अपनी गाय तो है नहीं। जो निरा दूध पिलाने को मिलेगा । मोल का दूध है, तो कैसा रहेगा ? मिल जाता है, यही क्या कम है ? अभी पिछले महीने का दाम भी चुकता नहीं हुआ है।

खैर दूध ज्यों का त्यों ढका हुआ रखा था। कमरे में बिल्ली कहीं नहीं दिखी। बिल्ली आई होती तो दिखती जरूर। हो सकता है कि कहीं छुप गई हो। लेकिन छुपने के लिए बचा ही क्या है। कोना-कोना देख चुकी हूँ । अब आवाज भी नहीं सुनाई पड़ती। आखिर माजरा क्या है ?

वह यही सब सोचते हुए चल रही थी। इतने में उसका पैर किसी चीज से टकरा गया। खून भी बहने लगा। सारे शरीर में सनसनी सी दौड़ गई। क्योंकि उसे नीरा के घर की याद आ गई थी। किसी ओझा ने पड़ताल करके बताया था कि उसके घर में भूत का वास है। और इसलिए ही नीरा परेशान रहती है। खाने पीने तक को लाले पड़े रहते हैं। लड़ाई-झगड़ा ऊपर से। कहीं पति से तो कहीं सास से तो कभी गाँव में किसी न किसी से। अभी कल ही उसके लड़के का सिर फूटा है।

मालती के मन में ओझा की एक-एक बात उतरने लगी। नीरा के लड़के के साथ कई लड़के खेल रहे थे। उसी के सिर पर पत्थर गिरना चाहिये था क्या ? और किसी के सिर पर क्यों नहीं गिरा ? नीरा रात में डरावने सपने भी देखती है। रात में घर में खटर-पटर भी होता है। बाहर निकलती है तो कोई छाया दिखती है।

यह सोचते हुए मालती थोड़ा और असहज हो गई । उसे पसीना हो गया। उसने नजर घुमाई। पेड़ के ऊपर कोई छाया दिखी। वह आँख मूँदकर बैठ गई। इतने में बच्चा जोर से चिल्लाया। साथ ही कुछ खटर-पटर की आवाज भी सुनाई पड़ी। मालती बच्चे की ओर दौड़ी। इतने में वह नीद से जग गई। बच्चा सो रहा था। माधव बाहर गया हुआ था। मालती थोड़ा सहमी-सहमी सी थी। उसे लग रहा था कि घर में कोई भूत आ गया है।

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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

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